West Bengal EVM Controversy: ममता बनर्जी के आरोपों पर बीजेपी का तीखा पलटवार, कहा- ‘हार के डर से बहाने बना रही है टीएमसी’
West Bengal EVM Controversy: ममता के आरोपों पर BJP का पलटवार
West Bengal EVM Controversy: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने से पहले राज्य में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम के अचानक दौरे और धांधली के आरोपों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। बीजेपी ने ममता बनर्जी के इन कदमों को उनकी घबराहट और संभावित हार का डर बताया है। बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को अब जमीन खिसकती नजर आ रही है, इसलिए वह पहले से ही हार की भूमिका तैयार कर रही है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने को लेकर भी सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
West Bengal EVM Controversy: ममता बनर्जी का स्ट्रॉन्ग रूम दौरा
गुरुवार 30 अप्रैल की रात पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी हलचल भरी रही। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अचानक दक्षिण कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल पहुंचीं, जहां भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र का मतगणना केंद्र और ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम बनाया गया है। ममता बनर्जी करीब चार घंटे तक वहां मौजूद रहीं और रात 12 बजे के बाद बाहर निकलीं। बाहर आते ही उन्होंने चुनाव आयोग और सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाए। ममता बनर्जी का कहना था कि उन्हें शुरुआत में केंद्रीय सुरक्षा बलों ने अंदर जाने से रोका, जो कि एक मुख्यमंत्री और उम्मीदवार के तौर पर उनके अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने आशंका जताई कि वोटों के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की जा सकती है, इसलिए वह खुद स्थिति का जायजा लेने पहुंची थीं।
ममता बनर्जी ने मतगणना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग को सुझाव दिया कि मीडिया के लिए सीसीटीवी फुटेज की लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि 4 मई को होने वाली मतगणना के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि मतगणना केंद्र के भीतर केवल उम्मीदवार या उसके एक अधिकृत एजेंट को ही रहने की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप न हो सके। उनके इस रुख ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
बीजेपी का करारा जवाब: हार के डर से ध्यान भटकाने की कोशिश
ममता बनर्जी के इन आरोपों पर बीजेपी ने तत्काल प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि ममता बनर्जी का स्ट्रॉन्ग रूम जाना और ईवीएम पर सवाल उठाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि टीएमसी चुनाव हार रही है। पूनावाला के अनुसार विभिन्न एग्जिट पोल्स और जमीनी रुझानों से यह साफ हो गया है कि इस बार बंगाल में बीजेपी ऐतिहासिक जीत दर्ज कर अपनी सरकार बनाने जा रही है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई पार्टी हारने वाली होती है, तो वह सबसे पहले ईवीएम और चुनाव आयोग को निशाना बनाना शुरू कर देती है। टीएमसी भी वही पुराना फॉर्मूला अपना रही है ताकि हार के बाद अपने कार्यकर्ताओं को जवाब दे सके।
शहजाद पूनावाला ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री का चार घंटे तक मतगणना केंद्र के पास रुकना प्रशासनिक दबाव बनाने की एक कोशिश है। उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि वह इस तरह के दबाव में न आए और निष्पक्ष तरीके से मतगणना संपन्न कराए। बीजेपी नेता ने तंज कसते हुए कहा कि टीएमसी अब विकास या कामकाज के नाम पर वोट नहीं मांग सकती, इसलिए वह सहानुभूति बटोरने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है। बंगाल की जनता ने बदलाव का मन बना लिया है और नतीजे आने पर टीएमसी का सारा भ्रम टूट जाएगा।
राम कृपाल यादव ने भी टीएमसी को घेरा

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम कृपाल यादव ने भी इस पूरे प्रकरण पर टीएमसी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने इस बार ममता सरकार के भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण की राजनीति को पूरी तरह नकार दिया है। राम कृपाल यादव ने चुनाव आयोग के काम की सराहना करते हुए कहा कि आयोग ने पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ चुनाव संपन्न कराए हैं। उन्होंने ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह केवल जनता को गुमराह करने का प्रयास है। बीजेपी नेता ने विश्वास जताया कि 4 मई को जब नतीजे आएंगे, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और बंगाल में कमल खिलेगा।
वोट लूट और धरने पर बैठीं मंत्री शशि पांजा
बंगाल की राजनीति में यह विवाद केवल जुबानी जंग तक सीमित नहीं रहा। टीएमसी की वरिष्ठ नेता और मंत्री शशि पांजा ने भी ‘वोट लूट’ का आरोप लगाते हुए धरना दिया। टीएमसी नेताओं का दावा है कि कई जगहों पर सुरक्षा बलों की मदद से बीजेपी ने चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की है। चुनाव आयोग ने हालांकि इन आरोपों पर सफाई दी है और कहा है कि सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार और कैमरों की निगरानी में हो रही हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा त्रिस्तरीय है और वहां किसी भी प्रकार की अनधिकृत गतिविधि संभव नहीं है।
West Bengal EVM Controversy: मतगणना से पहले सुरक्षा के कड़े इंतजाम
4 मई को होने वाली मतगणना को देखते हुए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। पूरे राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। खास तौर पर स्ट्रॉन्ग रूम के आसपास धारा 144 लागू कर दी गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार का मुकाबला बेहद कड़ा है, जिसकी वजह से दोनों ही दल छोटे से छोटे मुद्दे पर भी आक्रामक रुख अपना रहे हैं। ममता बनर्जी की चेतावनी के बाद पुलिस प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है ताकि मतगणना के दिन किसी भी तरह की हिंसा या अव्यवस्था न हो।
निष्कर्ष: बंगाल के भविष्य का फैसला 4 मई को
ममता बनर्जी के आरोप और बीजेपी का पलटवार यह दर्शाता है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता की लड़ाई अब अंतिम और सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। जहां टीएमसी अपनी सत्ता बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है, वहीं बीजेपी पहली बार बंगाल के सिंहासन पर बैठने के लिए पूरी तरह आश्वस्त दिख रही है। ईवीएम पर उठते सवाल और स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर जारी ड्रामा आने वाले दिनों में और भी गंभीर हो सकता है। फिलहाल राज्य की नजरें 4 मई के नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि बंगाल में ‘दीदी’ का राज बरकरार रहेगा या ‘परिवर्तन’ की लहर टीएमसी का सूपड़ा साफ कर देगी। बंगाल की जनता ने अपना फैसला ईवीएम में कैद कर दिया है और अब बस कुछ ही घंटों का इंतजार बाकी है।
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