Health Study: जन्म के समय कम वजन से जवानी में बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा, 8 लाख लोगों पर हुई रिसर्च में खुलासा
Health Study: जन्म के समय कम वजन से जवानी में बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा
Health Study: क्या आपने कभी सोचा है कि जन्म के समय आपके शरीर का वजन आपकी वयस्क उम्र की सेहत पर भी असर डाल सकता है? हाल ही में हुए एक बड़े वैज्ञानिक अध्ययन ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि बचपन की शुरुआत और जन्म के समय की स्थितियां जवानी की स्वास्थ्य समस्याओं की नींव रख सकती हैं। तुर्किए में आयोजित ‘यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी’ में पेश की गई एक महत्वपूर्ण रिसर्च के अनुसार, जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों को युवावस्था में स्ट्रोक यानी मस्तिष्क घात का खतरा काफी अधिक होता है। यह खुलासा स्वास्थ्य के प्रति हमारे नजरिए को पूरी तरह बदलने वाला है।
Health Study: 8 लाख लोगों पर हुई विशाल रिसर्च
यह कोई सामान्य अध्ययन नहीं था। गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं, जिनमें डॉ. लीना लिलजा और डॉ. मारिया बाइग्डेल शामिल थे, ने 1973 से 1982 के बीच पैदा हुए करीब 8,00,000 पुरुषों और महिलाओं के स्वास्थ्य डेटा का गहराई से विश्लेषण किया। शोध टीम ने 31 दिसंबर 2022 तक के स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स को ट्रैक किया ताकि यह देखा जा सके कि किन लोगों को स्ट्रोक का सामना करना पड़ा। इतने बड़े पैमाने पर किया गया यह विश्लेषण स्पष्ट रूप से दिखाता है कि हमारे जन्म के समय के शारीरिक आंकड़े आने वाले दशकों के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
आंकड़ों में छिपा है डर
इस अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं को पहली बार स्ट्रोक का शिकार हुए लोगों के कुल 2,252 मामले मिले। इनमें से 1,624 मामले इस्केमिक स्ट्रोक (मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में रुकावट) के थे, जबकि 588 मामले इंट्रासेरेब्रल हैमरेज (मस्तिष्क के अंदर रक्तस्राव) के थे। शोध में साफ पाया गया कि जिन लोगों का जन्म के समय वजन सामान्य से कम था, उनमें स्ट्रोक का कुल जोखिम 21 प्रतिशत अधिक था। यह खतरा इस्केमिक और हैमरेजिक दोनों तरह के स्ट्रोक में समान रूप से देखा गया। पुरुषों और महिलाओं की तुलना करें तो कम वजन के साथ पैदा हुए पुरुषों में यह खतरा 23 प्रतिशत, जबकि महिलाओं में 18 प्रतिशत तक अधिक पाया गया।
वजन और गर्भावस्था की अवधि का रहस्य
सबसे चौंकाने वाली बात जो इस रिसर्च में सामने आई, वह यह है कि स्ट्रोक का यह जोखिम व्यक्ति के वर्तमान बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई या गर्भावस्था की अवधि पर निर्भर नहीं करता है। यानी, व्यक्ति आज चाहे कितना भी फिट क्यों न हो या वह गर्भावस्था के कितने भी सप्ताह बाद पैदा हुआ हो, कम वजन के साथ जन्म लेना अपने आप में स्ट्रोक के खतरे को स्थायी रूप से बढ़ा देता है। यह निष्कर्ष उन लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो सोचते हैं कि जवानी में सही खान-पान से बचपन की कमियों को पूरी तरह भुलाया जा सकता है।
Health Study: क्या हो आगे की राह?
यह अध्ययन हमें याद दिलाता है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता जन्म से पहले ही शुरू हो जानी चाहिए। स्वस्थ मातृत्व और भ्रूण का उचित विकास न केवल बच्चे के बचपन के लिए बल्कि उसके पूरे जीवन के लिए आवश्यक है। मेडिकल जगत के विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे लोगों को वयस्क होने पर अपने हृदय और रक्त वाहिकाओं की सेहत पर अधिक ध्यान देना चाहिए। अगर किसी को पता है कि जन्म के समय उसका वजन कम था, तो उसे उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और अन्य स्ट्रोक संबंधी कारकों की समय-समय पर जांच करानी चाहिए।
विज्ञान की यह नई जानकारी हमें बताती है कि स्वास्थ्य के प्रति हमारी सतर्कता का दायरा कितना विस्तृत होना चाहिए। जन्म के समय कम वजन को केवल एक छोटी बात मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे एक ऐसी मेडिकल हिस्ट्री माना जाना चाहिए जो भविष्य में किसी बड़े खतरे के प्रति हमें सावधान कर सके। स्वस्थ भविष्य के लिए यह जरूरी है कि हम बचपन से जुड़ी अपनी शारीरिक स्थितियों को समझें और समय रहते बेहतर जीवनशैली को अपनाएं।
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