Emergency Alert: आधी रात को आए इमरजेंसी अलर्ट से हड़कंप, सरकार ने सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम पर लगाई रोक

Emergency Alert: सरकार ने इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम पर लगाई रोक

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Emergency Alert: देश भर में आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के मकसद से शुरू की गई नई तकनीक पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। भारत सरकार ने अपने सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम (सीबीएस) को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। यह फैसला 12 जून को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की ओर से जारी एक आदेश के बाद लिया गया। यह सेवा पिछले महीने ही आपदाओं की पूर्व चेतावनी देने के लिए लाई गई थी, ताकि आपातकालीन स्थिति में लोगों को तुरंत सचेत किया जा सके। लेकिन, हालिया घटनाओं के बाद इस पूरे सिस्टम की तकनीकी और प्रक्रियागत समीक्षा करने का निर्णय लिया गया है।

Emergency Alert: क्या आधी रात को आए अलर्ट ने बिगाड़ा खेल?

इस निलंबन के पीछे की सबसे बड़ी वजह एक चूक मानी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 12 जून की रात हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में आपदा प्रबंधन इकाइयों की तरफ से अचानक कुछ परीक्षण अलर्ट भेजे गए थे। यह अलर्ट सामान्य संदेशों से बिल्कुल अलग होते हैं। इनकी आवाज बहुत तेज होती है और फोन साइलेंट होने पर भी यह लगातार बजते रहते हैं। खबर है कि इसी तरह का एक तेज आवाज वाला अलर्ट गलती से प्रधानमंत्री के संपर्क नंबर पर भी पहुंच गया।

सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम की खासियत ही यह है कि यह यूजर का ध्यान तुरंत अपनी ओर खींचता है, लेकिन आधी रात के समय जब इस तरह के अलर्ट अचानक फोन पर घनघनाने लगे, तो आम जनता में भी हड़कंप मच गया। रिपोर्ट के अनुसार, इसी तकनीकी खामी और टाइमिंग की समस्या के बाद एनडीएमए ने तुरंत प्रभाव से इस सेवा को रोकने का फैसला किया ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न पैदा हो।

क्या है सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम और यह क्यों जरूरी है?

मई 2026 में भारत सरकार ने आपदाओं से निपटने के लिए सेल ब्रॉडकास्टिंग तकनीक को अपनाना शुरू किया था। यह तकनीक सामान्य एसएमएस से बहुत अलग और एडवांस है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे काम करने के लिए इंटरनेट की जरूरत नहीं होती और नेटवर्क जाम होने की स्थिति में भी यह संदेश पहुंचाने में सक्षम है। यह एक साथ लाखों लोगों को उनके मोबाइल पर पॉप अप नोटिफिकेशन के जरिए अलर्ट भेज सकता है। भूकंप, बाढ़, चक्रवात या किसी बड़े सुरक्षा खतरे के समय यह सिस्टम सरकार को जनता तक चंद सेकेंड्स में पहुंचने की शक्ति देता है।

Emergency Alert: कैसे काम करता है यह सिस्टम और आप तक कैसे पहुंचता है?

इस सिस्टम का मकसद जनता को सतर्क करना है, न कि उन्हें परेशान करना। यह चेतावनी सीधे मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देती है और कई स्मार्टफोन्स में इसे पढ़कर सुनाने की सुविधा भी होती है। सामान्य तौर पर, यह फीचर एंड्रॉइड फोन की सेटिंग्स में ‘वायरलेस इमरजेंसी अलर्ट’ के तहत मिलता है। वहां उपयोगकर्ता अपनी पसंद के हिसाब से टेस्ट अलर्ट्स को ऑन या ऑफ कर सकते हैं। हालांकि, हर फोन में यह विकल्प अलग-अलग जगह हो सकता है। यह तकनीक दुनिया के कई विकसित देशों में आपदा प्रबंधन का एक अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जानमाल की हानि को कम करना है।

Emergency Alert: अब आगे क्या होगा?

फिलहाल एनडीएमए इसे एक एहतियाती कदम बता रहा है। प्राधिकरण का कहना है कि संबंधित एजेंसियों और तकनीकी टीम के साथ इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है। यह जांच की जा रही है कि आखिर यह सिस्टम अपनी सीमा से बाहर कैसे काम कर रहा था और किन परिस्थितियों में गलत समय पर संदेश भेजे गए। प्राधिकरण ने साफ किया है कि जब तक तकनीकी खामियों को पूरी तरह दूर नहीं कर लिया जाता और सुरक्षा मानकों में बदलाव नहीं किए जाते, तब तक यह सेवा बंद रहेगी।

सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि आपदा चेतावनी सिस्टम जनता के लिए मददगार साबित हो, न कि परेशानी का कारण। समीक्षा पूरी होने और जरूरी बदलावों को लागू करने के बाद ही इसे दोबारा शुरू करने पर कोई फैसला लिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक अस्थायी रुकावट है ताकि व्यवस्था को और बेहतर और सटीक बनाया जा सके। जब तक यह सिस्टम दोबारा बहाल नहीं होता, तब तक आपदाओं की सूचना के लिए पारंपरिक माध्यमों का ही उपयोग किया जाएगा।

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