भारत की पहली डिजिटल जनगणना 2027 का दिल्ली में आगाज: अब मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे खुद दर्ज करें अपनी जानकारी, ‘स्व-गणना’ तकनीक से पारदर्शी और सटीक होगा जनसंख्या का महा-सर्वेक्षण
दिल्ली में शुरू हुई देश की पहली पेपरलेस जनगणना; जानें 'स्व-गणना' आईडी और ऑनलाइन प्रोसेस
Digital Census India 2027: भारत के लोकतांत्रिक और प्रशासनिक इतिहास में आज का दिन एक अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। देश की सबसे बड़ी और जटिल सांख्यिकीय प्रक्रिया, ‘जनगणना 2027’, आज से देश की राजधानी दिल्ली में आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। इस बार की जनगणना न केवल अपनी व्यापकता के कारण विशिष्ट है, बल्कि यह पूरी तरह से ‘डिजिटल’ स्वरूप में आयोजित की जा रही है। इस आधुनिक प्रक्रिया की सबसे क्रांतिकारी विशेषता ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) है, जिसके अंतर्गत पहली बार भारत के नागरिकों को यह अधिकार और सुविधा दी गई है कि वे बिना किसी गणनाकर्ता की प्रतीक्षा किए, स्वयं अपने घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जानकारी सरकारी डेटाबेस में दर्ज कर सकते हैं। यह कदम न केवल डेटा संग्रह की सटीकता को बढ़ाएगा, बल्कि समय की भी भारी बचत करेगा, जिससे देश के भविष्य के विकास की रूपरेखा अधिक स्पष्ट और वास्तविक आंकड़ों पर आधारित होगी।
डिजिटल जनगणना 2027: स्व-गणना की प्रक्रिया और इसके ऐतिहासिक आयाम
आजादी के बाद भारत की यह आठवीं जनगणना है, जो वर्ष 2011 के लंबे अंतराल के बाद आयोजित की जा रही है। गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस डिजिटल क्रांति का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या के साथ-साथ देश की आर्थिक स्थिति, सामाजिक ढांचे और बुनियादी सुविधाओं के वितरण का एक सटीक चित्र प्राप्त करना है। पहली बार पूरी प्रक्रिया कागजों के बजाय मोबाइल एप्लिकेशनों पर आधारित होगी। नागरिकों के लिए स्व-गणना की खिड़की 15 मई तक खुली रहेगी, जिसके दौरान लोग 16 अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं में अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इस प्रक्रिया की पारदर्शिता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि स्वयं नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी का बाद में सरकारी कर्मचारियों द्वारा केवल सत्यापन किया जाएगा, जिससे डेटा में मानवीय त्रुटि की संभावना न्यूनतम हो जाएगी।
स्व-गणना करने के लिए नागरिकों को एक बहुत ही सरल और व्यवस्थित प्रक्रिया का पालन करना होगा। सबसे पहले, आपको अपने स्मार्टफोन पर ‘सीएमएमएस’ (CMMS) मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करना होगा या आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in पर लॉग-इन करना होगा। अपने मोबाइल नंबर के माध्यम से ओटीपी आधारित पंजीकरण पूरा करने के बाद, आपको अपने स्थान की भौगोलिक जानकारी जैसे जिला, पिन कोड और गांव या कस्बे का चयन करना होगा। सिस्टम में उपलब्ध डिजिटल मानचित्र के माध्यम से आप अपने निवास स्थान को सटीक रूप से चिन्हित कर सकते हैं। फॉर्म भरते समय आपसे 33 महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाएंगे, जो आपके घर की बनावट से लेकर आपके पास मौजूद आधुनिक सुख-सुविधाओं तक से संबंधित होंगे। फॉर्म सफलतापूर्वक जमा होने के बाद आपको एक विशिष्ट ‘स्व-गणना आईडी’ (SE ID) प्राप्त होगी, जिसे आपको सुरक्षित रखना होगा ताकि जब 16 मई से गणनाकर्ता आपके घर आएं, तो आप उन्हें यह आईडी दिखाकर अपना सत्यापन कार्य तुरंत पूरा करवा सकें।
Digital Census India 2027: डेटा की गोपनीयता और जनगणना में पूछे जाने वाले नए प्रश्न
इस जनगणना की एक अन्य प्रमुख विशेषता इसकी कठोर गोपनीयता नीति है। सरकार ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि नागरिकों द्वारा साझा की गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड होगी। यह डेटा इतना सुरक्षित है कि इसे सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भी सार्वजनिक नहीं किया जा सकता और न ही इसे किसी अन्य एजेंसी के साथ साझा किया जाएगा। इसका उपयोग केवल सामूहिक जनसांख्यिकीय विश्लेषण और कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण के लिए किया जाएगा। प्रश्नों के स्वरूप में भी इस बार काफी बदलाव किए गए हैं ताकि आधुनिक भारत की तस्वीर साफ हो सके। उदाहरण के तौर पर, अब यह भी पूछा जा रहा है कि आपके घर की दीवारों और छत में किस सामग्री का उपयोग हुआ है, पीने के पानी का मुख्य स्रोत क्या है, और घर में शौचालय व रसोई की अलग व्यवस्था है या नहीं। इसके अलावा, डिजिटल पहुंच को मापने के लिए इंटरनेट, स्मार्टफोन, और वाहनों के स्वामित्व से जुड़े प्रश्न भी शामिल किए गए हैं।
जनगणना 2027 दो सुव्यवस्थित चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में मुख्य रूप से मकानों की सूची तैयार करना और आवास संबंधी गणना करना शामिल है, जिसमें आपके रहन-सहन और आर्थिक स्तर का आकलन किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में विस्तृत जनसांख्यिकीय जानकारी जैसे आयु, साक्षरता, धर्म और प्रवासन से संबंधित आंकड़े जुटाए जाएंगे। यह पूरी डिजिटल गवर्नेंस का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ राज्य सरकारों की मशीनरी को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे इस नई तकनीक के साथ तालमेल बिठा सकें। गृहमंत्री की निगरानी में संचालित इस प्रक्रिया के लिए देश के सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि डेटा की गुणवत्ता और सुरक्षा में किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।
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