कीटनाशकों से कैंसर का खतरा 150% तक बढ़ा! बाजार की चमकदार सब्जियों में छिपा ‘स्लो पॉइजन’, डॉक्टरों की चेतावनी और बचाव के 5 प्रभावी घरेलू उपाय
बाजार की आकर्षक सब्जियों में छिपे कीटनाशक कैंसर का खतरा बढ़ा रहे हैं। जानें WHO की चेतावनी, सबसे खतरनाक फल-सब्जियां और रसोई में अपनाने योग्य 5 वैज्ञानिक उपाय।
Pesticides Cancer Risk: बाजार में मिलने वाली चमकदार और रंग-बिरंगी सब्जियां जितनी आकर्षक दिखती हैं, उनके पीछे छिपा रसायनों का सच उतना ही डरावना हो सकता है। आज के समय में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग एक वैश्विक समस्या बन चुका है। हालिया शोधों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कीटनाशकों का सीधा संबंध केवल पेट की बीमारियों से नहीं, बल्कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से भी है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां खेती में कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग होता है, वहां रहने वाले लोगों में कैंसर का खतरा 150 प्रतिशत तक बढ़ गया है। यह स्थिति भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए और भी चिंताजनक है, जहां नियामक तंत्र की ढिलाई के कारण अक्सर प्रतिबंधित रसायनों का उपयोग भी खेतों में होता रहता है।
कीटनाशक और कैंसर: वैज्ञानिक शोध और डॉक्टरों की चेतावनी
हाल ही में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन ने स्वास्थ्य जगत में हलचल मचा दी है। शोध के अनुसार, कीटनाशकों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से विशेषकर रक्त कैंसर, ल्यूकेमिया और लिंफोमा के मामले आम आबादी की तुलना में कहीं अधिक देखे गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कैंसर शोध संस्था IARC ने ग्लाइफोसेट जैसे व्यापक रूप से उपयोग होने वाले रसायनों को “संभावित कार्सिनोजेन” की श्रेणी में रखा है। रायपुर के प्रख्यात कैंसर सर्जन डॉ. जयेश शर्मा का कहना है कि कीटनाशक मुख्य रूप से दो समूहों को प्रभावित करते हैं; पहले वे किसान जो सीधे खेतों में छिड़काव करते हैं, और दूसरे वे उपभोक्ता जो भोजन के जरिए इन रसायनों का सेवन करते हैं।
डॉ. शर्मा के अनुसार, किसानों में त्वचा के जरिए रसायनों के अवशोषण से कैंसर का खतरा सबसे अधिक होता है, जबकि आम उपभोक्ताओं के लिए यह एक ‘स्लो पॉइजन’ की तरह काम करता है। शरीर में धीरे-धीरे जमा होने वाले ये रसायन डीएनए संरचना को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे भविष्य में ट्यूमर पनपने की आशंका बढ़ जाती है। भारत में अभी भी कई ऐसे कीटनाशकों का उपयोग हो रहा है जो विकसित देशों में दशकों पहले प्रतिबंधित हो चुके हैं। इन पुराने रसायनों, जिन्हें ऑर्गेनोक्लोरीन कहा जाता है, की सबसे बड़ी समस्या यह है कि ये मिट्टी में लंबे समय तक टिके रहते हैं और धोने के बावजूद पूरी तरह से फल-सब्जियों से अलग नहीं होते।
सबसे अधिक खतरे में कौन: बच्चे, गर्भवती महिलाएं और विशेष खाद्य पदार्थ
कीटनाशकों का सबसे घातक प्रभाव बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है। बच्चों का प्रतिरोधक तंत्र और शरीर के अंग अभी विकसित हो रहे होते हैं, जिससे रसायनों की थोड़ी सी मात्रा भी उनके विकास में बाधा डाल सकती है। बाल रोग विशेषज्ञों का मानना है कि बचपन में कीटनाशकों के संपर्क का संबंध न केवल कैंसर से, बल्कि ऑटिज्म और ध्यान की कमी (ADHD) जैसी मानसिक समस्याओं से भी जुड़ा पाया गया है। गर्भवती महिलाओं के मामले में, ये रसायन प्लेसेंटा को पार कर भ्रूण तक पहुँच सकते हैं, जिससे जन्मजात विकृतियों और जन्म के समय कम वजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
खाद्य पदार्थों की बात करें तो “डर्टी डोज़न” यानी वे फल और सब्जियां जिनमें सबसे अधिक कीटनाशक पाए जाते हैं, उनमें स्ट्रॉबेरी, अंगूर, सेब, पालक और गोभी जैसी पतली छाल वाली चीजें शामिल हैं। इनके विपरीत, मोटी छाल वाले फल जैसे केला, पपीता, संतरा और तरबूज अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि उनकी बाहरी परत रसायनों के प्रवेश को रोकती है। बेमौसमी सब्जियां उगाना प्राकृतिक रूप से कठिन होता है, इसलिए उन्हें कीटों से बचाने के लिए रसायनों का अत्यधिक सहारा लिया जाता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि हमेशा मौसमी और स्थानीय स्तर पर उगाई गई सब्जियां ही खरीदें ताकि रसायनों के संपर्क को कम किया जा सके।
कीटनाशकों से बचाव: रसोई के लिए 5 प्रभावी और वैज्ञानिक तरीके
भले ही हम बाजार में कीटनाशकों के उपयोग को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकते, लेकिन अपनी रसोई में कुछ सावधानियां बरतकर हम इनके जोखिम को 90 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं। वैज्ञानिक शोधों के आधार पर कुछ प्रभावी तरीके निम्नलिखित हैं:
-
बहते पानी में रगड़कर धोना: सब्जियों को केवल पानी में भिगोकर छोड़ने से कीटनाशक नहीं हटते। उन्हें कम से कम 1 मिनट तक बहते पानी के नीचे हाथों से रगड़कर धोना चाहिए ताकि सतह पर जमे रसायन बह जाएं।
-
नमक के पानी का उपयोग: एक बड़े कटोरे में पानी भरकर उसमें दो चम्मच समुद्री नमक मिलाएं। सब्जियों को 5-10 मिनट के लिए इसमें छोड़ दें और फिर सादे पानी से धो लें। यह प्रक्रिया विशेषकर हरी पत्तेदार सब्जियों के लिए उत्तम है।
-
बेकिंग सोडा का चमत्कार: मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय के एक शोध के अनुसार, बेकिंग सोडा (मीठा सोडा) पानी में मिलाकर फल-सब्जियों को धोने से सतह के लगभग सभी कीटनाशक निकल जाते हैं। एक लीटर पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा काफी है।
-
छिलका उतारना (Peeling): सेब, खीरा, गाजर और अमरूद जैसे फलों का छिलका उतारकर खाना सबसे सुरक्षित तरीका है, क्योंकि अधिकांश कीटनाशक बाहरी सतह पर ही जमा होते हैं।
-
उच्च तापमान पर पकाना: अधिकांश कीटनाशक गर्मी के संपर्क में आने पर विघटित हो जाते हैं। सब्जियों को उबालना, भाप देना या अच्छी तरह पकाकर खाना कच्चे सलाद के मुकाबले अधिक सुरक्षित होता है।
निष्कर्ष: जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है
कीटनाशकों और कैंसर के बीच के संबंध को झुठलाया नहीं जा सकता, लेकिन इसका समाधान फल-सब्जियां छोड़ना नहीं है। फल और सब्जियां हमारे स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य हैं। समाधान सजगता में छिपा है। यदि संभव हो तो अपने घर की बालकनी या छत पर ‘किचन गार्डन’ बनाएं और धनिया, पुदीना, मिर्च जैसी बुनियादी चीजें खुद उगाएं। ऑर्गेनिक उत्पादों का चयन करते समय प्रमाणित ब्रांड्स पर ही भरोसा करें। अंततः, सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए खतरनाक रसायनों पर प्रतिबंध कड़ा करना चाहिए और किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। जब तक व्यवस्था में सुधार नहीं होता, तब तक हमारी रसोई में हमारी सावधानी ही हमारे परिवार को कैंसर जैसी बीमारियों से बचा सकती है।
read more here