UP Rajya Sabha Election: यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर 16 अक्टूबर को वोटिंग, जानें BJP-सपा का पूरा सियासी गणित

UP Rajya Sabha Election: यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर 16 अक्टूबर को वोटिंग, जानें BJP-सपा का पूरा सियासी गणित

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UP Rajya Sabha Election: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा की 10 सीटों का चुनाव सियासी गलियारों में हलचल मचाने वाला साबित हो रहा है। भारत निर्वाचन आयोग ने 22 सितंबर 2026 को यूपी की इन 10 सीटों के साथ-साथ उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए भी द्विवार्षिक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में खाली हुई एक सीट पर उपचुनाव भी इसी दौरान कराया जाएगा। तीनों राज्यों में मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा, और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू हो जाएगी। यह चुनाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यूपी की इन 10 सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त हो रहा है। विधानसभा की मौजूदा दलगत संख्या को देखें तो भाजपा और उसके सहयोगी दलों की स्थिति इस चुनाव में मजबूत नजर आ रही है, जबकि समाजवादी पार्टी के लिए अपने मौजूदा जनाधार को सीटों में तब्दील करना बड़ी चुनौती होगी।

UP Rajya Sabha Election: 29 सितंबर को अधिसूचना, 6 अक्टूबर तक नामांकन की प्रक्रिया

निर्वाचन आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार राज्यसभा चुनाव के लिए अधिसूचना 29 सितंबर 2026 को जारी की जाएगी। इच्छुक उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर तय की गई है। इसके अगले ही दिन यानी 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर तक उम्मीदवारों के पास अपना नाम वापस लेने का विकल्प रहेगा। इन सभी प्रक्रियाओं के बाद 16 अक्टूबर को मतदान संपन्न होगा और पूरी चुनावी प्रक्रिया 19 अक्टूबर 2026 तक समाप्त कर ली जाएगी। गौरतलब है कि राज्यसभा सदस्यों का चुनाव विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली के जरिए किया जाता है।

किन 10 सदस्यों का कार्यकाल हो रहा खत्म

यूपी से राज्यसभा जाने वाले जिन 10 सदस्यों का कार्यकाल नवंबर 2026 में पूरा हो रहा है, उनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बृजलाल, बीएल वर्मा, राम गोपाल यादव, नीरज शेखर, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, रामजी लाल सुमन, सीमा द्विवेदी और डॉ. दिनेश शर्मा शामिल हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इन पुराने चेहरों में से कौन दोबारा राज्यसभा पहुंचता है और किन नए नामों को दलों की तरफ से मौका दिया जाता है। यह पूरा फैसला नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और राजनीतिक दलों की रणनीति साफ होने के बाद ही तय हो सकेगा। निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं, जिसके अनुसार मतपत्र पर वरीयता अंकित करने के लिए केवल निर्वाचन अधिकारी की ओर से दिए गए निर्धारित बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही इस्तेमाल किया जाएगा।

यूपी विधानसभा में एनडीए की मजबूत स्थिति

उत्तर प्रदेश विधानसभा की मौजूदा दलगत स्थिति को समझना राज्यसभा चुनाव के गणित को समझने के लिए बेहद जरूरी है। विधानसभा के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भाजपा के पास फिलहाल 256 विधायक हैं। इसके अलावा उसके सहयोगी दलों में अपना दल सोनेलाल के 13, राष्ट्रीय लोकदल के 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक शामिल हैं। इन सभी दलों को जोड़ने पर एनडीए खेमे की कुल संख्या 289 विधायकों तक पहुंच जाती है। वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के पास 101 विधायक हैं। बता दें कि विधानसभा में इस समय छह सीटें रिक्त हैं और कुल 397 सदस्य दर्ज हैं।

किस दल को चाहिए कितना कोटा

राज्यसभा की 10 सीटों के लिए यूपी विधानसभा के 397 निर्वाचित विधायकों के वोट पड़ने की स्थिति में एक उम्मीदवार को जीत का कोटा पूरा करने के लिए 37 वोट की जरूरत होगी। मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा के 256 विधायक अकेले छह कोटा आसानी से पार कर लेते हैं, जिसके बाद उसके पास 34 वोट अतिरिक्त बचते हैं। जब भाजपा के सहयोगी दलों को इसमें जोड़ा जाता है, तो एनडीए के पास कुल 289 विधायक हो जाते हैं, यानी सात कोटा पूरे करने के लिए पर्याप्त संख्या बन जाती है और इसके बावजूद 30 वोट शेष रहते हैं। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के 101 विधायक दो कोटा पूरा करने में सक्षम हैं, जबकि उसके पास 27 वोट अतिरिक्त बचते हैं।

BSP के पास इस बार कोई विधायक नहीं

राज्यसभा चुनाव सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली से आयोजित होता है, इसलिए अंतिम सीटों का फैसला उम्मीदवारों की संख्या, पहली वरीयता के वोट, दूसरी वरीयता के वोट और दलों के आपसी समर्थन के आधार पर तय होगा। बहुजन समाज पार्टी के लिए स्थिति इस बार अलग है, क्योंकि मौजूदा विधानसभा में उसके पास एक भी विधायक नहीं है। ऐसे में पार्टी अपने दम पर राज्यसभा सीट जीतने के लिए जरूरी कोटा नहीं जुटा सकती। इस स्थिति में BSP की भूमिका पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगी कि उसे किस स्तर का राजनीतिक समर्थन मिलता है और वह किस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान का फैसला लेती है।

उत्तराखंड में भी एक सीट के लिए होगा चुनाव

उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड में भी राज्यसभा की एक सीट के लिए द्विवार्षिक चुनाव कराया जाएगा। इस सीट से मौजूदा सदस्य नरेश बंसल का कार्यकाल नवंबर 2026 में पूरा हो रहा है। नरेश बंसल नवंबर 2020 से उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व राज्यसभा में करते आ रहे हैं। इस सीट पर भी मतदान की तारीख यूपी की तरह ही 16 अक्टूबर तय की गई है, और मतगणना उसी दिन शाम 5 बजे से शुरू होगी। इस तरह उत्तर भारत के दो बड़े राज्यों में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां एक साथ तेज होने वाली हैं।

पश्चिम बंगाल में खाली सीट पर होगा उपचुनाव

पश्चिम बंगाल का मामला यूपी और उत्तराखंड से थोड़ा अलग है, क्योंकि यहां किसी सीट का सामान्य द्विवार्षिक चुनाव नहीं हो रहा, बल्कि एक आकस्मिक रिक्ति की वजह से उपचुनाव कराया जा रहा है। निर्वाचन आयोग के मुताबिक यह सीट रुक्मिणी मल्लिक के 16 जुलाई 2026 को इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी। आयोग ने इस सीट के लिए भी मतदान की तारीख 16 अक्टूबर 2026 ही तय की है। नामांकन, जांच और नाम वापसी से जुड़ी पूरी प्रक्रिया यूपी और उत्तराखंड की तरह ही अपनाई जाएगी, और मतगणना भी उसी दिन शाम 5 बजे से शुरू होगी।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले क्यों अहम है यह मुकाबला

यह राज्यसभा चुनाव सिर्फ संख्या के गणित तक सीमित नहीं है, बल्कि 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सभी प्रमुख दलों के लिए अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का भी एक मंच बन गया है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों के लिए यह चुनाव अपनी संख्यात्मक बढ़त को राज्यसभा में भी बरकरार रखने का मौका है, जबकि समाजवादी पार्टी के सामने चुनौती यह होगी कि वह अपने मौजूदा विधायकों की संख्या के अनुरूप ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल कर सके। वहीं बसपा जैसे दल के लिए यह चुनाव इस बात का संकेत भी है कि विधानसभा में जनाधार के बिना राज्यसभा की सीटें हासिल करना कितना मुश्किल हो गया है।

कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का यह चुनाव आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासत की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है। 16 अक्टूबर को होने वाली वोटिंग और उसी दिन शाम को आने वाले नतीजों पर सभी दलों की नजरें टिकी रहेंगी। मौजूदा विधानसभा गणित के हिसाब से भाजपा और एनडीए गठबंधन की स्थिति स्पष्ट रूप से मजबूत नजर आ रही है, जबकि सपा को अपनी सीमित संख्या के भीतर ही सर्वश्रेष्ठ नतीजे हासिल करने होंगे। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि किन नेताओं को इस बार राज्यसभा भेजा जाता है और किन पुराने चेहरों की विदाई होती है।

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