Pune Cyber Security Lab: पुणे में खुली वाहनों की साइबर जांच लैब, अब कनेक्टेड कार और EV चार्जिंग होगी सेफ
Pune Cyber Security Lab: पुणे में खुली वाहनों की साइबर जांच लैब, अब कनेक्टेड कार और EV चार्जिंग होगी सेफ
Pune Cyber Security Lab: CIRT साइबर सुरक्षा लैब में वाहनों की डिजिटल प्रणालियों और चार्जिंग इंटरफेस की जांच होगी। आधुनिक वाहन केवल इंजन और ब्रेक की मशीन नहीं रहे। उनके भीतर सॉफ्टवेयर, नेटवर्क और बाहरी कनेक्टिविटी की भूमिका बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा भी वाहन सुरक्षा का हिस्सा बन रही है। इसी दिशा में केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान, यानी CIRT ने पुणे के भोसरी परिसर में ऑटोमोटिव साइबर सिक्योरिटी पेनेट्रेशन टेस्टिंग लैब शुरू की है। यह सुविधा संस्थान के सुरक्षित मोबिलिटी कार्यक्रम का हिस्सा है।
नई लैब वाहन निर्माताओं और कंपोनेंट सप्लायरों के लिए डिजिटल कमजोरियों का आकलन तथा परीक्षण सेवाएं देगी। इसमें इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट, टेलीमैटिक्स, इन्फोटेनमेंट और वाहन के अंदर काम करने वाले नेटवर्क शामिल हैं। उद्देश्य संभावित कमजोरियों को सड़क पर उपयोग से पहले पहचानने और सुधारने में सहायता करना है।
CIRT साइबर सुरक्षा लैब में चार्जिंग की जांच
CIRT के ऑटोमोटिव साइबर सिक्योरिटी डिवीजन की जांच में ओवर द एयर सॉफ्टवेयर अपडेट, वाहन से वाहन और वाहन से दूसरे बुनियादी ढांचे के संचार का मूल्यांकन भी शामिल है। इलेक्ट्रिक वाहन के चार्जिंग इंटरफेस भी दायरे में बताए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि सुरक्षा का सवाल केवल कार के भीतर लगे एक उपकरण तक सीमित नहीं है।
कनेक्टेड सेवाओं में कई प्रणालियां मिलकर काम करती हैं। एक सुरक्षित वाहन के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट का विश्वसनीय होना और अलग हिस्सों की पहुंच नियंत्रित होना महत्वपूर्ण है। हालांकि किसी नई परीक्षण सुविधा का शुरू होना यह घोषणा नहीं है कि बाजार के सभी मौजूदा वाहन असुरक्षित हैं। हर मॉडल और प्रणाली का आकलन उसके अपने प्रमाण के आधार पर होता है।
मानकों से तालमेल पर जोर
रिपोर्ट के अनुसार संस्थान की गतिविधियां AIS-189 और AIS-190 के साथ UN नियम R155 और R156 तथा संबंधित अंतरराष्ट्रीय मानकों से जुड़ी हैं। साइबर सिक्योरिटी मैनेजमेंट और सॉफ्टवेयर अपडेट मैनेजमेंट प्रणालियों का ऑडिट भी सेवाओं में शामिल है। सलाह और प्रमाणन का काम स्वतंत्र टीमों द्वारा किए जाने की बात कही गई है।
CIRT के अधिकारी फारुख मखदूम ने साइबर सुरक्षा को वाहन सुरक्षा की शर्त बताया। निदेशक डॉ देवेंद्र सिंह ने कहा कि संस्थान का अगला चरण कनेक्टेड, इलेक्ट्रिक और स्वचालित वाहनों के लिए परीक्षण, प्रमाणन और मानव क्षमता पर केंद्रित होगा। यह दिशा तकनीकी जांच के साथ प्रशिक्षित पेशेवरों की जरूरत को भी रेखांकित करती है।
डायमंड जुबली कार्यक्रम में क्या होगा
संस्थान सितंबर 2026 में अपने 60वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। सुरक्षित मोबिलिटी पर आधारित कार्यक्रम सितंबर 2027 तक चलेगा। इसमें वेबिनार, कार्यशालाएं, सार्वजनिक परिवहन सुरक्षा, EV परीक्षण और AI आधारित ऑटोमेटेड ड्राइविंग जांच जैसे विषय शामिल होंगे। मूविंग इंडिया सेफली नाम से सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान की भी योजना है।
उपभोक्ता के लिए ताजा पहल का अर्थ सुरक्षा जांच की घरेलू क्षमता बढ़ना है। फिर भी वाहन खरीदते समय केवल कनेक्टेड फीचर की संख्या नहीं, निर्माता की आधिकारिक सुरक्षा और अपडेट जानकारी भी देखनी चाहिए। नई लैब किसी विशेष कार को प्रमाणपत्र मिलने का प्रमाण नहीं है।
Read More Here