Last Man in Tower OTT: घर छोड़ने से इनकार करने वाले मास्टरजी की कहानी, मनोज बाजपेयी की फिल्म ZEE5 पर
Last Man in Tower OTT: घर छोड़ने से इनकार करने वाले मास्टरजी की कहानी, मनोज बाजपेयी की फिल्म ZEE5 पर
Last Man in Tower OTT रिलीज में घर और पुनर्विकास के बीच संघर्ष की कहानी है। शहर के पुराने घर के बदले बेहतर भविष्य का प्रस्ताव मिले तो क्या हर कोई तुरंत सहमत होगा? इसी सवाल को केंद्र में रखने वाली फिल्म लास्ट मैन इन टावर का हिंदी ZEE5 प्रीमियर 6 नवंबर को निर्धारित है। 5 नवंबर को जारी जानकारी के अनुसार फिल्म में मनोज बाजपेयी, बोमन ईरानी और दिव्या दत्ता प्रमुख भूमिकाओं में हैं। कहानी मुंबई की एक पुरानी हाउसिंग सोसायटी और उसके पुनर्विकास प्रस्ताव के आसपास घूमती है।
मनोज बाजपेयी योगेश मिश्रा की भूमिका निभाते हैं। वह भौतिकी के रिटायर्ड शिक्षक हैं और सोसायटी में ऐसे अकेले निवासी बन जाते हैं जो आकर्षक प्रस्ताव के बावजूद अपना फ्लैट खाली नहीं करना चाहते। बाकी लोगों के लिए नया सौदा बेहतर जीवन का अवसर है, जबकि योगेश के लिए घर यादों और अपनापन से जुड़ा स्थान है।
Last Man in Tower OTT: साहित्य से पर्दे तक
फिल्म अरविंद अडिगा के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। इसका निर्देशन बेन रेखी ने किया है और निर्माण राणा दग्गुबाती की स्पिरिट मीडिया ने किया है। जारी बयान में पटकथा के लिए सूनी तारापोरवाला का उल्लेख है। साहित्यिक रूपांतरण के रूप में इसकी दिलचस्पी केवल घटनाओं में नहीं, उन मानवीय उलझनों में भी है जिन्हें एक साझा इमारत सामने लाती है।
यहां कथानक की जानकारी निर्माताओं द्वारा जारी सामग्री के आधार पर है। इसे स्वतंत्र समीक्षा, दर्शकों का फैसला या प्रदर्शन की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। किसी कलाकार की भूमिका के बारे में जानकारी और उस भूमिका को कितनी अच्छी तरह निभाया गया है, दोनों अलग बातें हैं।
एक ही प्रस्ताव, अलग अलग जरूरतें
दिव्या दत्ता का किरदार संगीता पुरी है। अपने विशेष जरूरतों वाले बेटे के लिए बेहतर जिंदगी की आशा उनकी प्राथमिकताओं को प्रभावित करती है। बोमन ईरानी डेवलपर धर्मेन शाह बने हैं, जो पुनर्विकास को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इन अलग जरूरतों के बीच योगेश का इनकार व्यक्तिगत जिद भर नहीं रहता, बल्कि पूरी सोसायटी के भविष्य से जुड़ा संघर्ष बन जाता है।
कहानी का आधार यह सवाल उठाता है कि आर्थिक लाभ और भावनात्मक जुड़ाव की तुलना कैसे हो सकती है। जिन पड़ोसियों के बीच पहले अपनापन था, उनके हित अलग होने पर रिश्तों में दूरी पैदा हो सकती है। फिल्म इस टकराव को किस तरह प्रस्तुत करती है, इसका मूल्यांकन उसे देखने के बाद ही किया जा सकता है।
मनोज बाजपेयी ने क्या कहा
जारी बयान में अभिनेता ने बताया कि योगेश की जटिलता ने उन्हें आकर्षित किया। किरदार अपने विश्वास पर अड़ा है, लेकिन कहानी दर्शक को यह सोचने देती है कि उसका निर्णय सही है या गलत। निर्देशक ने भी समुदाय और परिवार से जुड़े विषयों को फिल्म का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।
दर्शक हिंदी ZEE5 पर शीर्षक की उपलब्धता, भाषा, सदस्यता और उम्र संबंधी जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं। यह कहानी शहरी पुनर्विकास पर एक काल्पनिक नाट्य प्रस्तुति है, किसी वास्तविक सोसायटी के विवाद की रिपोर्ट या संपत्ति संबंधी कानूनी सलाह नहीं। इसका मुख्य आकर्षण घर की कीमत से आगे उसके अर्थ को समझने वाला मानवीय टकराव है।