Pharma News: स्टेराइल दवाओं की गुणवत्ता सुधारने की पहल, सरकार ने प्रस्तावित किए नए मानक
Pharma News: स्टेराइल दवाओं की गुणवत्ता सुधारने की पहल, सरकार ने प्रस्तावित किए नए मानक
Pharma News: स्टेराइल दवा निर्माण के महत्वपूर्ण क्षेत्रों के मानकों को WHO के अनुरूप करने का प्रस्ताव है। स्टेराइल दवाओं के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण स्वच्छ क्षेत्रों की निगरानी को और मजबूत करने की तैयारी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 के शेड्यूल एम में संशोधन प्रस्तावित किया है। इसका उद्देश्य Grade A क्षेत्रों में माइक्रोबियल संदूषण की सीमाओं को विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप करना है।
प्रस्ताव का संबंध दवा बनाने वाली इकाइयों की गुणवत्ता व्यवस्था से है। इसे किसी खास दवा को वापस लेने, बाजार की सभी दवाओं में खराबी मिलने या मरीजों को अपनी दवा तुरंत बंद करने की चेतावनी नहीं माना जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्ट में ऐसे किसी व्यापक निष्कर्ष की बात नहीं है। यह निर्माण मानकों में सुधार से जुड़ी नियामकीय प्रक्रिया है।
स्टेराइल दवा निर्माण में Grade A का महत्व
स्टेराइल उत्पादों के निर्माण में कुछ ऐसे स्थान होते हैं जहां खुला उत्पाद, कंटेनर या पहले से स्टेरिलाइज किए गए हिस्से संभाले जाते हैं। इन्हीं अत्यंत संवेदनशील जगहों को Grade A क्षेत्र कहा जाता है। वहां सूक्ष्मजीवों का नियंत्रण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि निर्माण के दौरान संदूषण होने पर अंतिम उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
प्रस्तावित बदलाव भारत की मौजूदा सीमा और WHO की टेक्निकल रिपोर्ट सीरीज संख्या 1044 के अनुबंध 2 के बीच अंतर दूर करने के लिए है। यह दस्तावेज स्टेराइल फार्मास्यूटिकल उत्पादों के लिए गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज से जुड़ा है। मानकों को एक दिशा में लाने से निरीक्षण और गुणवत्ता मूल्यांकन की अपेक्षाएं अधिक स्पष्ट हो सकती हैं।
सूक्ष्मजीव मिलने पर जांच का प्रावधान
मंत्रालय के बयान के अनुसार Grade A क्षेत्रों में किसी भी माइक्रोबियल वृद्धि का पता लगना जांच शुरू करने का कारण माना जाएगा। इसका महत्व केवल नमूने का एक परिणाम लिख लेने में नहीं है। निर्माण प्रक्रिया में समस्या कहां से आई, सफाई या पर्यावरण नियंत्रण में क्या कमी रही और सुधार कैसे हो, ऐसे सवालों पर ध्यान देना जरूरी होता है।
संदूषण की निगरानी में उपकरण, हवा, सतह, प्रक्रिया और कर्मियों का व्यवहार जैसे पहलू महत्व रखते हैं। यह सामान्य गुणवत्ता नियंत्रण का संदर्भ है, किसी खास कारखाने के खिलाफ नया आरोप नहीं। उपलब्ध सूचना के आधार पर किसी निर्माता को दोषी बताना या किसी उत्पाद को असुरक्षित घोषित करना उचित नहीं होगा।
अभी प्रस्ताव है, अंतिम नियम नहीं
रिपोर्ट में 28 अक्टूबर की राजपत्र अधिसूचना का उल्लेख है। संशोधन पर सुझाव और आपत्तियां मांगे जाने की प्रक्रिया भी बताई गई है। इसलिए प्रस्ताव और अंतिम रूप से लागू प्रावधान में अंतर रखना जरूरी है। आगे संबंधित आधिकारिक दस्तावेज तय करेगा कि अंतिम शर्तें क्या होंगी और उनका अनुपालन किस तरह किया जाएगा।
मरीजों के लिए व्यावहारिक बात यही है कि चिकित्सक की सलाह से चल रही दवा केवल इस खबर के कारण बंद न करें। किसी उत्पाद की गुणवत्ता, पैकिंग या इस्तेमाल को लेकर संदेह हो तो डॉक्टर, फार्मासिस्ट या संबंधित नियामकीय माध्यम से जानकारी लें। ताजा पहल का केंद्र निर्माण स्तर पर रोकथाम और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के साथ तालमेल है।