Lung Cancer Treatment: दो दवाओं के कॉम्बिनेशन से मौत का खतरा 58% कम

563 मरीजों पर हुए Phase 3 ट्रायल में दवाओं के कॉम्बिनेशन से बेहतर सर्वाइवल के नतीजे सामने आए

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Lung Cancer Treatment: ऑन्कोलॉजी और कैंसर अनुसंधान के क्षेत्र में चिकित्सा वैज्ञानिकों को एक युगांतरकारी सफलता हाथ लगी है। फेफड़ों के सबसे घातक और तेजी से फैलने वाले प्रकार यानी एक्सटेंसिव-स्टेज स्मॉल सेल लंग कैंसर (ES-SCLC) से जूझ रहे मरीजों के लिए दो अत्याधुनिक दवाओं का संयोजन जीवन रक्षक साबित हुआ है। एक ताजा वैश्विक क्लिनिकल ट्रायल में यह बात सामने आई है कि अमेरिकी बायोफार्मा कंपनी एमजेन (Amgen) की टार्गेटेड थेरेपी दवा ‘इमडेल्ट्रा’ (Imdelltra / टार्लाटामाब) और एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) की इम्यूनोथेरेपी दवा ‘इमफिन्जी’ (Imfinzi / डुरवालुमाब) को एक साथ देने पर मरीजों में मृत्यु के जोखिम में रिकॉर्ड 58 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है। यह उपलब्धि उन गंभीर मरीजों के लिए उम्मीद की एक नई किरण बनकर सामने आई है, जिन पर शुरुआती कीमोथेरेपी का असर सीमित होने लगा था।

Lung Cancer Treatment: 563 मरीजों पर हुआ वैश्विक अध्ययन, जीवित रहने की अवधि में 8.4 माह का इजाफा

इस बहु-केंद्रित अंतरराष्ट्रीय क्लिनिकल ट्रायल में कुल 563 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया था जो व्यापक स्तर के स्मॉल सेल लंग कैंसर से पीड़ित थे और जिनका कैंसर शुरुआती कीमोथेरेपी के बाद नियंत्रित था। अध्ययन के दौरान मरीजों को दो अलग-अलग समूहों में विभाजित कर तुलनात्मक अध्ययन किया गया। पहले समूह को केवल मानक इम्यूनोथेरेपी दवा इमफिन्जी दी गई, जबकि दूसरे समूह को इमफिन्जी के साथ नियमित अंतराल पर इमडेल्ट्रा का संयुक्त डोज दिया गया।

ट्रायल के अंतिम निष्कर्षों में पाया गया कि दोनों दवाओं का कॉम्बिनेशन लेने वाले मरीजों की औसत समग्र जीवन प्रत्याशा (Overall Survival) 21.1 महीने तक पहुंच गई, जबकि केवल इमफिन्जी लेने वाले समूह में यह आंकड़ा महज 12.7 महीने रहा। इस प्रकार कॉम्बिनेशन थेरेपी से मरीजों की औसत आयु में लगभग 8.4 महीने की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। इसके अलावा एक वर्ष के फॉलोअप के बाद कॉम्बिनेशन समूह के करीब 80 प्रतिशत मरीज जीवित पाए गए, जबकि पारंपरिक समूह में यह जीवन दर केवल 53 प्रतिशत ही दर्ज की गई।

क्या है स्मॉल सेल लंग कैंसर और क्यों माना जाता है इसे सबसे खतरनाक

फेफड़ों का कैंसर मूलतः दो श्रेणियों में विभाजित होता है, जिनमें नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर और स्मॉल सेल लंग कैंसर शामिल हैं। स्मॉल सेल लंग कैंसर कुल मामलों का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा होता है, लेकिन यह अपनी अत्यधिक आक्रामक प्रकृति और असाधारण रूप से तेजी से विभाजित होने की क्षमता के लिए कुख्यात है। जब यह बीमारी अपने व्यापक चरण (Extensive Stage) में पहुंचती है, तो कैंसर कोशिकाएं दोनों फेफड़ों के साथ-साथ शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों जैसे मस्तिष्क, यकृत (लिवर) और हड्डियों तक अपनी जड़ें जमा लेती हैं।

इस कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह रही है कि अधिकांश मरीज प्राथमिक प्लैटिनम-आधारित कीमोथेरेपी पर शुरुआत में सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन कुछ ही महीनों के भीतर कैंसर कोशिकाएं दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (रेजिस्टेंस) विकसित कर लेती हैं और बीमारी दोबारा दोगुनी गति से लौट आती है। ऐसे में लंबे समय तक कैंसर को निष्क्रिय रखने वाली प्रभावी मेंटेनेंस थेरेपी की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

कैसे काम करती हैं इमडेल्ट्रा और इमफिन्जी की दोहरी मारक प्रणाली

यह नया संयोजन कैंसर कोशिकाओं को शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से छिपाने वाले तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त कर देता है। इमडेल्ट्रा एक आधुनिक ‘बाइस्पेसिफिक टी-सेल एंगेजर’ (BiTE) एंटीबॉडी है। यह दवा एक तरफ कैंसर कोशिकाओं की सतह पर मौजूद डेल्टा-लाइक लिगैंड 3 (DLL3) प्रोटीन को जकड़ लेती है और दूसरी तरफ शरीर की रक्षक टी-कोशिकाओं के CD3 रिसेप्टर से जुड़ जाती है। इस प्रकार यह दवा मरीज की अपनी इम्यून कोशिकाओं को कैंसर सेल्स के बिल्कुल करीब लाकर उन्हें नष्ट करने का आदेश देती है।

वहीं दूसरी तरफ, इमफिन्जी एक स्थापित चेकपॉइंट इनहिबिटर दवा है जो PD-L1 मार्ग को अवरुद्ध करती है। कैंसर कोशिकाएं सामान्यतः PD-L1 का इस्तेमाल करके प्रतिरक्षा प्रणाली की निगरानी से बच निकलती हैं, जिसे इमफिन्जी निष्क्रिय कर देती है। जब ये दोनों दवाएं एक साथ दी जाती हैं, तो मरीज की प्रतिरक्षा प्रणाली कैंसर कोशिकाओं को न केवल आसानी से पहचान लेती है बल्कि उन पर दोतरफा रणनीतिक हमला कर उन्हें पूरी तरह बेअसर कर देती है।

संभावित साइड इफेक्ट्स और निगरानी की सख्त आवश्यकता

हालांकि यह संयोजन जीवन प्रत्याशा बढ़ाने में क्रांतिकारी साबित हुआ है, लेकिन इसके दुष्प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ट्रायल के आंकड़ों के अनुसार, कॉम्बिनेशन समूह के 20.9 प्रतिशत मरीजों में गंभीर स्तर के दुष्प्रभाव देखे गए, जबकि एकल दवा वाले समूह में यह दर 10.8 प्रतिशत थी। इमडेल्ट्रा के उपयोग से जुड़ी सबसे प्रमुख जटिलता ‘साइटोकाइन रिलीज सिंड्रोम’ (CRS) के रूप में सामने आई है।

साइटोकाइन रिलीज सिंड्रोम एक तीव्र प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया है, जिसमें शरीर में अत्यधिक मात्रा में इन्फ्लेमेटरी प्रोटीन रिलीज होते हैं, जिसके चलते मरीज को तेज बुखार, रक्तचाप में अचानक भारी गिरावट, शरीर में कंपकंपी और सांस लेने में गंभीर तकलीफ का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा न्यूरोटॉक्सिसिटी और फेफड़ों में सूजन (न्यूमोनाइटिस) के जोखिम भी देखे गए हैं। यही वजह है कि ऑन्कोलॉजिस्ट इस थेरेपी को केवल अत्याधुनिक आईसीयू सुविधाओं वाले तृतीयक कैंसर अस्पतालों में और विशेषज्ञ डॉक्टरों की चौबीसों घंटे निगरानी में ही देने की अनुशंसा करते हैं।

Lung Cancer Treatment: भारत में उपलब्धता, नियामक स्थिति और मरीजों के लिए जरूरी सलाह

चिकित्सा जगत में इस थेरेपी को स्मॉल सेल लंग कैंसर के इतिहास की सबसे बड़ी प्रगति में गिना जा रहा है। वर्तमान में अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (US FDA) ने इमडेल्ट्रा को पूर्व-उपचारित मामलों में सशर्त मंजूरी प्रदान की है, जबकि प्रथम पंक्ति की कीमोथेरेपी के बाद मेंटेनेंस के रूप में इसके व्यापक उपयोग की प्रक्रिया अभी समीक्षाधीन है।

भारतीय संदर्भ में इस कॉम्बिनेशन की नियमित व्यावसायिक उपलब्धता और भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) से अनुमोदन की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। भारत में वर्तमान में इमफिन्जी उपलब्ध है, परंतु इमडेल्ट्रा को विशेष अनुकंपा आधार (Compassionate Use) या आयात नियमों के तहत ही मंगाया जा सकता है। कैंसर विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि मरीजों या उनके परिजनों को किसी भी नई स्टडी या खबर के आधार पर अपना मौजूदा उपचार बिल्कुल नहीं बदलना चाहिए। किसी भी नई दवा या क्लिनिकल ट्रायल में शामिल होने का निर्णय केवल अपने संबंधित वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट की व्यक्तिगत जांच, बायोमार्कर टेस्टिंग और शारीरिक स्थिति के सटीक मूल्यांकन के बाद ही लिया जाना चाहिए।

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