Somvar Puja Vidhi: सोमवार को कैसे करें भगवान शिव की पूजा, जानें सामग्री, मंत्र और व्रत के नियम
सोमवार को शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और पंचामृत अर्पित करें, जानें पूजा की पूरी विधि और व्रत के नियम
Somvar Puja Vidhi: सनातन हिंदू परंपरा में सोमवार का दिन देवाधिदेव महादेव भगवान शिव की उपासना के लिए सर्वोपरि और अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। शास्त्रों में वर्णित मान्यताओं के अनुसार, सोमवार का कारक ग्रह चंद्रमा है, जिसे भगवान शिव ने अपने मस्तक पर धारण कर रखा है। इसलिए सोमवार के दिन की जाने वाली शिव पूजा न केवल कुंडली में चंद्र दोष को शांत करती है, बल्कि जातक को असीम मानसिक शांति, एकाग्रता, निरोगी काया और आत्मिक संबल भी प्रदान करती है। चाहे अविवाहित कन्याओं द्वारा उत्तम वर की प्राप्ति के लिए किया जाने वाला ‘सोलह सोमवार व्रत’ हो या जीवन के समस्त संकटों के निवारण के लिए रखा जाने वाला सामान्य सोमवार उपवास, सही विधि और निष्कपट भाव से की गई भोलेनाथ की अर्चना शीघ्र फलदायी मानी जाती है।
Somvar Puja Vidhi: सोमवार पूजा का पौराणिक एवं आध्यात्मिक महत्व
भगवान शिव को आशुतोष कहा गया है, जिसका अर्थ है जो बहुत जल्दी और बहुत थोड़े प्रयास से ही प्रसन्न हो जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या और सोमवार व्रत का अनुष्ठान किया था। इसी प्रकार चंद्र देव ने जब दक्ष प्रजापति के श्राप से क्षय रोग का कष्ट झेला, तब उन्होंने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर सोमवार के दिन ही महादेव की अनन्य उपासना कर अमरत्व और पुनर्जीवन का आशीर्वाद प्राप्त किया था। यही कारण है कि सोमवार के दिन भगवान शिव का पूजन और अभिषेक करने से जीवन के असाध्य रोग, दरिद्रता, भय और मानसिक संताप पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं।
सोमवार पूजन के लिए आवश्यक सामग्री और तैयारी
भोलेनाथ के पूजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सादगी है। भगवान शिव को किसी बहुमूल्य आभूषण या छप्पन भोग की आवश्यकता नहीं होती, वे केवल भाव के भूखे हैं। पूजन की तैयारी के लिए तांबे या पीतल के लोटे में स्वच्छ गंगाजल मिश्रित जल, गाय का कच्चा दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद और शक्कर (पंचामृत सामग्री) एकत्रित कर लें। इसके अलावा महादेव के अत्यंत प्रिय तीन पत्तियों वाले अखंडित बेलपत्र, धतूरा, भांग की पत्तियां, शमी पत्र, सफेद मदार या कनेर के फूल, सफेद चंदन, भस्म, अक्षत (बिना टूटे हुए चावल), धूप, गाय के घी का दीपक, मौली, जनेऊ और मौसमी फल जैसे सेब, केला व ऋतुफल थाली में सजाकर रख लें।
प्रात:काल से सायंकाल तक की संपूर्ण पूजन विधि
सोमवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त हों और हल्के रंग के, विशेष रूप से श्वेत, पीले या हल्के नारंगी स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके उपरांत अपने घर के पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें और हाथ में थोड़ा सा जल, अक्षत व पुष्प लेकर भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए व्रत अथवा विधिवत पूजन का संकल्प लें।
शिवलिंग की पूजा करते समय सबसे पहले तांबे के पात्र से ‘ॐ नमः शिवाय’ का उच्चारण करते हुए शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद शिवलिंग पर पंचामृत यानी कच्चे दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराएं। पंचामृत के बाद पुन: शुद्ध गंगाजल से शिवलिंग को स्वच्छ करें। इसके उपरांत भगवान को सफेद चंदन या भस्म का त्रिपुंड लगाएं और अक्षत अर्पित करें। फिर तीन दल वाले चिकने हिस्से की तरफ से बेलपत्र पर ‘ॐ’ या राम नाम लिखकर शिवलिंग पर उल्टा समर्पित करें। धतूरा, भांग और सफेद पुष्प अर्पित करने के बाद जनेऊ और कलावा चढ़ाएं।
धूप और गाय के शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित कर भगवान शिव की कर्पूर आरती करें। अंत में फल और मिष्ठान्न का नैवेद्य लगाएं और पूजा में अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा याचना करें। जो जातक व्रत रखते हैं, वे सायंकाल प्रदोष काल में पुन: हाथ-मुंह धोकर धूप-दीप जलाएं, शिव चालीसा का पाठ करें और संध्या आरती के उपरांत ही सात्विक फलाहार या एक समय बिना नमक का भोजन ग्रहण करें।
शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और किन चीजों से करें पूर्ण परहेज
शिव पूजन में अर्पण की जाने वाली वस्तुओं के शास्त्रीय नियम बेहद स्पष्ट हैं। शिवलिंग पर शीतल जल, कच्चा दूध, भस्म, त्रिपुंड चंदन, बेलपत्र, धतूरा और शमी के पत्ते चढ़ाना परम कल्याणकारी माना गया है। वहीं शास्त्रों में कुछ ऐसी वस्तुएं भी बताई गई हैं जिनका शिव पूजन में प्रयोग पूरी तरह वर्जित है। शिवलिंग पर कभी भी सिंदूर, रोली या हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए क्योंकि ये स्त्री तत्व और सौंदर्य प्रसाधन से जुड़े हैं, जबकि शिव वैरागी और संहारकर्ता देव हैं। इसके अलावा भगवान शिव को कभी भी तुलसी दल, केतकी का फूल या शंख से जल अर्पित नहीं करना चाहिए, क्योंकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ये वस्तुएं महादेव के श्राप से बंधी हुई हैं।
सोमवार व्रत के कड़े नियम और जीवनशैली संबंधी सावधानियां
सोमवार का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने मन, कर्म और वाणी की शुचिता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। व्रत के दिन घर में पूर्णतः सात्विक माहौल रखें और प्याज, लहसुन, तामसिक भोजन अथवा मदिरा से कोसों दूर रहें। पूरे दिन किसी भी प्रकार के क्रोध, कलह, अपशब्द, ईर्ष्या और निंदा से बचें। यदि आपने निर्जला या फलाहारी व्रत का संकल्प लिया है, तो शाम की आरती के बाद कुट्टू के आटे की पूड़ी, साबूदाना, मखाना या मौसमी फल खा सकते हैं। व्रत के भोजन में सामान्य सफेद नमक की जगह केवल सेंधा नमक का ही सीमित उपयोग करें। वृद्ध, गर्भवती महिलाएं या अस्वस्थ व्यक्ति अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार केवल पूजा-अर्चना कर सामान्य फलाहार का पालन कर सकते हैं।
Somvar Puja Vidhi: भगवान शिव के अचूक मंत्र और आध्यात्मिक फल
महादेव की पूजा के दौरान मंत्रों का मानसिक अथवा स्पष्ट उच्चारण मन के विकारों को हर लेता है। पूजा के समय शिव पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का कम से कम 108 बार रुद्राक्ष की माला से जाप करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यदि जीवन में अकाल मृत्यु का भय, गंभीर बीमारी या अज्ञात चिंता बनी हुई है, तो महामृत्युंजय मंत्र—’ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥’—का श्रद्धापूर्वक पाठ करें। विद्यार्थियों और ज्ञान की कामना करने वाले साधकों के लिए शिव पंचाक्षर स्तोत्र और शिव तांडव स्तोत्र का वाचन आत्मबल में कई गुना वृद्धि करता है। मन की शांति और एकाग्रता के साथ किए गए इस पूजन से साधक पर भगवान आशुतोष की अहैतुकी कृपा सदैव बनी रहती है।
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