Diwali Bus Fare Hike: दिवाली पर घर जाना हुआ महंगा, नोएडा से पूर्वांचल के लिए बस किराया दोगुने से ज्यादा
दिवाली और छठ पर घर लौटने वाले यात्रियों को निजी बसों में महंगा सफर करना पड़ सकता है।
Diwali Bus Fare Hike: रोशनी के महापर्व दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और उसके उपरांत आने वाले लोकपर्व छठ पूजा के अवसर पर अपने पैतृक गृह जनपदों को लौटने वाले कामगारों और प्रवासियों की जेब पर निजी ट्रेवल्स ऑपरेटरों ने भारी डाका डालना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के औद्योगिक केंद्र नोएडा और ग्रेटर नोएडा से पूर्वांचल व बिहार की ओर जाने वाली लंबी दूरी की निजी बसों में टिकटों के दाम सामान्य दिनों की तुलना में दो गुने से भी अधिक वसूल किए जा रहे हैं। ट्रेनों में महीनों पहले से सीटें आरक्षित हो जाने और ‘नो रूम’ की स्थिति बनने के बाद बसें ही घर पहुंचने का एकमात्र सहारा बची हैं। इसी मजबूरी का अनुचित लाभ उठाते हुए डग्गामार और निजी बस संचालकों ने खुलेआम मनमाना किराया वसूलना शुरू कर दिया है, जिससे निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों का दिवाली बजट पूरी तरह चरमरा गया है।
नोएडा डिपो से पूर्वांचल के दूरस्थ जनपदों—जैसे वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़, गाजीपुर, बलिया, देवरिया और मऊ—के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की नियमित सीधी सेवाओं का समुचित विस्तार न होने के कारण यात्रियों की शत-प्रतिशत निर्भरता निजी और टूरिस्ट परमिट वाली बसों पर हो गई है।
Diwali Bus Fare Hike: ट्रेनों में लंबी वेटिंग का फायदा उठा रहे निजी ऑपरेटर
दिवाली और छठ जैसे महापर्वों पर दिल्ली-एनसीआर में कार्यरत लाखों फैक्ट्री कर्मचारी, निजी कंपनियों के पेशेवर, निर्माण मजदूर और छात्र-छात्राएं अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए घर जाते हैं। पूर्वांचल और बिहार रूट की सभी नियमित ट्रेनों में कन्फर्म टिकट मिलना लगभग असंभव हो चुका है और विशेष ट्रेनों में भी भारी मारामारी देखी जा रही है।
ऐसी विकट स्थिति में जब यात्री आनंद विहार, कश्मीरी गेट या नोएडा के बॉटेनिकल गार्डन, परी चौक और सेक्टर-37 स्थित बस अड्डों पर पहुंच रहे हैं, तो निजी बस एजेंट और ऑनलाइन टिकटिंग एग्रीगेटर्स सामान्य दिनों में 800 से 1,200 रुपये तक मिलने वाली स्लीपर और सेमी-स्लीपर सीटों के लिए 2,500 से 3,500 रुपये तक की मांग कर रहे हैं। यदि किसी परिवार में चार सदस्य हैं, तो केवल एक तरफ के सफर का किराया ही 10,000 रुपये के पार पहुंच रहा है, जो कई कामगारों के पूरे महीने के वेतन का एक बड़ा हिस्सा है।
नोएडा डिपो से सीधी रोडवेज बसों की किल्लत बनी मजबूरी
नोएडा से पूर्वांचल की ओर जाने वाले यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि नोएडा डिपो मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मेरठ, अलीगढ़, आगरा, बरेली) और दिल्ली-उत्तराखंड रूटों पर केंद्रित है। पूर्वांचल के जनपदों के लिए सीधी सरकारी साधारण या जनरथ बसें पर्याप्त संख्या में नहीं चलाई जाती हैं।
यात्रियों को या तो आनंद विहार बस टर्मिनल जाना पड़ता है या फिर नोएडा के प्रमुख चौराहों (जैसे जीरो पॉइंट और परी चौक) से गुजरने वाली निजी बसों की दया पर निर्भर रहना पड़ता है। स्थानीय यात्रियों का कहना है कि यदि यूपी रोडवेज नोएडा के विभिन्न सेक्टरों और ग्रेटर नोएडा से सीधे पूर्वांचल के लिए विशेष ‘दिवाली-छठ स्पेशल’ बसों का बड़ा बेड़ा उतारती, तो निजी ऑपरेटरों की इस खुली मनमानी और ब्लैकमेलिंग पर स्वतः लगाम लग जाती।
गौतमबुद्ध नगर परिवहन विभाग की सख्त एडवाइजरी: परमिट रद्द करने की चेतावनी
त्योहारी सीजन में यात्रियों की बढ़ती संख्या और किराये में मनमानी वृद्धि की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए गौतमबुद्ध नगर परिवहन विभाग (RTO) ने सख्त रुख अख्तियार किया है। विभाग ने जनपद में संचालित समस्त निजी बसों, ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाहनों, टैक्सियों और ऑटो-टेंपो संचालकों के लिए आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
परिवहन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि त्योहारों का अनुचित लाभ उठाकर यात्रियों से सरकार द्वारा अधिसूचित या उचित किराये से अधिक राशि वसूलना मोटर वाहन अधिनियम का गंभीर उल्लंघन है। संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) के अनुसार, ओवररेटिंग की शिकायतें प्रमाणित होने पर संबंधित वाहन स्वामियों के विरुद्ध भारी अर्थदंड लगाने के साथ-साथ वाहन का परमिट निलंबित अथवा पूर्णतः निरस्त करने और बस को सीज (जब्त) करने की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
ओवरलोडिंग, डग्गामारी और सुरक्षा मानकों पर विशेष प्रवर्तन दल तैनात
परिवहन विभाग की ओर से जारी आदेशों में सड़क सुरक्षा और यात्रियों की जीवन रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। त्योहारी भीड़ के दबाव में अक्सर देखा जाता है कि निजी बस चालक अतिरिक्त मुनाफे के लालच में निर्धारित सीटिंग क्षमता से अधिक यात्रियों को भर लेते हैं, यहां तक कि बसों की छतों, गलियारों और पिछले पायदानों पर भी यात्रियों को बैठा दिया जाता है।
विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी वाहन को क्षमता से अधिक यात्री ढोने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके लिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और पेरीफेरल एक्सप्रेसवे के प्रमुख टोल प्लाजा और एंट्री प्वाइंट्स पर विशेष प्रवर्तन दस्तों (RTO Enforcement Teams) और यातायात पुलिस की संयुक्त टीमें तैनात की जा रही हैं। यह टीमें विशेष रूप से स्पीड गवर्नर, ब्रेथ एनालाइजर (शराब पीकर ड्राइविंग की जांच), फिटनेस प्रमाण पत्र और टैक्स दस्तावेजों की औचक जांच करेंगी। शराब पीकर अनियंत्रित गति से बस चलाने वाले चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की संस्तुति की जाएगी।
Diwali Bus Fare Hike: महज कागजी आदेशों से नहीं, 24 घंटे जमीनी निगरानी से मिलेगी आम जन को राहत
यात्री संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि केवल औपचारिक परामर्श या चेतावनी पत्र जारी कर देने से निजी सिंडिकेट की लूट बंद नहीं होने वाली है। जब तक प्रमुख बोर्डिंग पॉइंट्स जैसे बॉटेनिकल गार्डन, सेक्टर-62, परी चौक और यमुना एक्सप्रेसवे जीरो पॉइंट पर परिवहन विभाग और पुलिस के स्थायी जांच शिविर स्थापित नहीं किए जाते और मौके पर टिकटों की रसीदों का मिलान नहीं किया जाता, तब तक आम मुसाफिरों को राहत मिलना कठिन है।
इसके साथ ही, परिवहन विभाग को एक सक्रिय 24×7 हेल्पलाइन नंबर और क्यूआर कोड आधारित शिकायत तंत्र तुरंत सार्वजनिक करना चाहिए, जिससे पीड़ित यात्री बस के भीतर से ही अधिक किराया वसूली की रसीद या टिकट की फोटो भेजकर तत्काल पुलिसिया मदद पा सकें। घर जाकर परिवार संग दीपोत्सव मनाने की चाह रखने वाले मेहनतकश प्रवासियों के लिए सुगम, सुरक्षित और किफायती परिवहन सुनिश्चित करना शासन-प्रशासन की प्राथमिक नैतिक जिम्मेदारी है।
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