EV New Category India: EV और प्लग-इन हाइब्रिड के लिए नई श्रेणी पर विचार, 15 kWh बैटरी वाला प्रस्ताव चर्चा में
EV New Category India: EV और प्लग-इन हाइब्रिड के लिए नई श्रेणी पर विचार, 15 kWh बैटरी वाला प्रस्ताव चर्चा में
EV New Category India: नई EV श्रेणी का प्रस्ताव स्वच्छ परिवहन और ईंधन दक्षता की नीतियों से जुड़ा है। स्वच्छ परिवहन की नीतियों में अलग अलग विद्युतीकृत तकनीकों को किस तरह जगह दी जाए, इस पर नई चर्चा सामने आई है। सरकार यात्री कारों के लिए एडवांस्ड इलेक्ट्रिफाइड व्हीकल की नई श्रेणी पर विचार कर रही है। प्रस्ताव में कम से कम 15 किलोवाट घंटा, यानी kWh बैटरी वाले वाहनों को शामिल करने की बात है।
रिपोर्ट के मुताबिक संभावित श्रेणी में पूरी तरह इलेक्ट्रिक कारों के साथ रेंज एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहन और प्लग-इन हाइब्रिड भी आ सकते हैं। इसका उद्देश्य मोटर वाहन नियमों में परिभाषाओं को CAFE-III ईंधन दक्षता व्यवस्था के साथ बेहतर ढंग से जोड़ना बताया गया है। फिलहाल यह विचाराधीन प्रस्ताव है। इसे लागू हो चुका अंतिम नियम, नई सब्सिडी या तत्काल कर छूट की घोषणा के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।
नई EV श्रेणी में किन तकनीकों को जगह
पूरी तरह बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक कार बाहरी चार्जिंग से ऊर्जा लेती है। प्लग-इन हाइब्रिड में बैटरी के साथ आंतरिक दहन इंजन भी होता है और उसकी बैटरी बाहरी बिजली से चार्ज की जा सकती है। रेंज एक्सटेंडेड व्यवस्था में बिजली से चलने वाले वाहन की दूरी बढ़ाने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा साधन का उपयोग किया जाता है। हर मॉडल की तकनीकी बनावट अलग हो सकती है।
यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सभी हाइब्रिड वाहन एक जैसे नहीं होते। सामान्य हाइब्रिड और बाहर से चार्ज होने वाले प्लग-इन हाइब्रिड को एक ही श्रेणी समझना सही नहीं है। प्रस्ताव का अंतिम दायरा उसकी आधिकारिक परिभाषा से तय होगा। केवल नाम में हाइब्रिड लिखे होने से किसी कार का संभावित नई श्रेणी में आना निश्चित नहीं हो जाता।
15 kWh का आंकड़ा क्या बताता है
बैटरी क्षमता ऊर्जा संग्रह की मात्रा बताती है, वाहन की निश्चित सड़क दूरी नहीं। वास्तविक रेंज वाहन के वजन, गति, मौसम, यातायात और उपयोग के तरीके से बदलती है। इसलिए प्रस्ताव में बताए गए 15 kWh को किसी तय किलोमीटर की गारंटी में बदलना उचित नहीं होगा। यह फिलहाल संभावित नियामकीय सीमा से जुड़ा आंकड़ा है।
ईंधन दक्षता नियमों में वाहन निर्माताओं के पूरे बेड़े का प्रदर्शन महत्व रखता है। अलग तकनीकों की परिभाषा स्पष्ट होने से कंपनियों की उत्पाद योजना और अनुपालन रणनीति प्रभावित हो सकती है। फिर भी उपलब्ध रिपोर्ट से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि किसी खास निर्माता या मॉडल को निश्चित लाभ मिल चुका है।
कार खरीदने वालों के लिए क्या संदेश
खरीदारों को प्रस्ताव और अंतिम अधिसूचना का अंतर समझना चाहिए। नई चर्चा के आधार पर वाहन की कीमत कम होने या सरकारी प्रोत्साहन मिलने का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। निर्णय लेते समय वास्तविक चार्जिंग सुविधा, रोज की दूरी, वारंटी और कुल उपयोग लागत देखना जरूरी है। आगे आधिकारिक नियम सामने आने पर ही स्पष्ट होगा कि नई श्रेणी किन वाहनों को शामिल करती है और बाजार पर उसका क्या असर पड़ता है।
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