Delhi SIR: 125 साल के बुजुर्ग सहित 33 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस, जानें क्या है पूरा मामला
125 वर्षीय श्याम मुखीजा से लेकर कई VVIP नामों तक, वोटर डिटेल में विसंगतियों पर नोटिस
Delhi SIR: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान एक अभूतपूर्व प्रशासनिक और चुनावी कवायद सामने आई है। निर्वाचन आयोग द्वारा 97 लाख से अधिक मतदाताओं की ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित किए जाने के बाद 33.13 लाख से अधिक मतदाताओं को उनके विवरण में विसंगतियों (Discrepancies) के चलते नोटिस जारी किए गए हैं। इस नोटिस सूची में पुरानी दिल्ली के सदर बाजार विधानसभा क्षेत्र के 125 वर्षीय मतदाता श्याम मुखीजा (जिन्हें कई रिकॉर्ड्स में श्याम मुखिया भी दर्ज किया गया है) का नाम शामिल होने के बाद यह मामला देशव्यापी विमर्श का विषय बन गया है।
यह चुनावी समीक्षा इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि नोटिस पाने वालों में केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और स्वयं चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू जैसे शीर्ष संवैधानिक पदों पर आसीन व पूर्व पदों पर रहे विशिष्ट व्यक्ति (VVIPs) भी शामिल हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी होने का अर्थ किसी भी सूरत में मतदाता सूची से नाम का कटना नहीं है, बल्कि यह त्रुटिरहित और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करने के लिए दावों और आपत्तियों के तहत दी गई एक विधिक प्रक्रिया है।
Delhi SIR: 125 वर्षीय श्याम मुखीजा का मामला
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक की गई नोटिस सूची में पुरानी दिल्ली के सदर बाजार क्षेत्र के निवासी 125 वर्षीय श्याम मुखीजा सबसे अधिक उम्र वाले मतदाता के रूप में दर्ज हैं। निर्वाचन रिकॉर्ड के अनुसार उनके मामले में ‘सेल्फ नेम मिसमैच’ यानी वर्तमान प्रपत्र में दर्ज नाम और पूर्ववर्ती रिकॉर्ड में उपलब्ध नाम के अक्षरों व वर्तनी में अंतर पाया गया है।
विदित हो कि निर्वाचन आयोग ने पूर्व में भी दिल्ली के चुनावी तंत्र को 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के मतदाताओं का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए थे। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 तक दिल्ली में लगभग 150 ऐसे मतदाता चिन्हित थे जिन्होंने उम्र का शतक पार कर लिया था। मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 80, 90 और 100 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के दस्तावेजों की प्राथमिकता के आधार पर पड़ताल की जा रही है ताकि वास्तविक मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित की जा सके और मृत अथवा स्थानांतरित नामों को सूची से हटाया जा सके।
2002 के एसआईआर से मैपिंग बनी मुख्य वजह: 42% नोटिस डेटा मेल न खाने पर जारी
दिल्ली में इतने बड़े पैमाने पर नोटिस जारी होने का मुख्य तकनीकी कारण वर्ष 2002 में संपन्न हुए पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के डेटाबेस से वर्तमान विवरण का मिलान न हो पाना है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, कुल 33.13 लाख नोटिसों में से लगभग 13.8 लाख नोटिस (करीब 42 प्रतिशत) ‘नॉट मैप्ड टू लास्ट एसआईआर’ श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि वर्ष 2002 की आधारभूत मतदाता सूची में संबंधित व्यक्ति या उसके परिवार का कोई पूर्ववर्ती संदर्भ डिजिटल रूप से नहीं मिल पाया है।
इसके अतिरिक्त शेष लगभग 19.3 लाख मामले तार्किक विसंगतियों (Logical Discrepancies) से जुड़े हैं। इनमें मतदाता के अपने नाम में वर्तनी का अंतर (लगभग 17 प्रतिशत) और पिता या माता के नाम में विसंगति (लगभग 24 प्रतिशत) प्रमुख कारण बनकर उभरे हैं। चुनाव आयोग के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ECINET’ द्वारा 30 जून से 17 अगस्त के मध्य घर-घर जाकर भरे गए एन्यूमरेटर फॉर्म्स का जब 2002 के रिकॉर्ड से डिजिटल मिलान किया गया, तो सॉफ्टवेयर ने स्वतः ही इन भिन्नताओं को चिन्हित कर नोटिस जारी करने की अनुशंसा की।
वीवीआईपी हस्तियों के नाम भी सूची में: नई दिल्ली क्षेत्र में सबसे ज्यादा मामले
नोटिस पाने वालों की सूची किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र सहित अन्य प्रमुख हलकों में राजनीति, नौकरशाही और न्यायपालिका के कई शीर्ष नामों के फॉर्म्स में भी विसंगतियां पाई गई हैं। 98 वर्षीय पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, उनकी सुपुत्री प्रतिभा आडवाणी और पुत्रवधू के नाम 2002 की एसआईआर से मैप न होने के कारण नोटिस श्रेणी में दर्ज हुए। इसी प्रकार पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया और पुत्र मीर सिसोदिया के विवरण में भी नाम व पैरेंट-नेम के मिसमैच चिन्हित किए गए।
इसके अतिरिक्त पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिजनों, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू तथा सर्वोच्च न्यायालय के कई पूर्व न्यायाधीशों के नाम भी इस तकनीकी सत्यापन प्रक्रिया के दायरे में आए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने साफ किया है कि कानून के समक्ष सभी नागरिक एक समान हैं और डिजिटल प्रणाली बिना किसी पद या कद के भेदभाव के केवल डेटा की विसंगतियों के आधार पर कार्य करती है।
नोटिस मिलने का अर्थ नाम कटना नहीं: बूथ लेवल अधिकारी घर-घर पहुंचा रहे पत्र
निर्वाचन आयोग ने नागरिकों के मध्य किसी भी प्रकार के भ्रम या भय को दूर करते हुए दोहराया है कि नोटिस जारी होना किसी भी मतदाता की नागरिकता पर प्रश्नचिह्न नहीं है और न ही इसका अर्थ यह है कि उनका नाम मतदाता सूची से विलोपित (डिलीट) कर दिया गया है। सभी 33.13 लाख नागरिक वर्तमान में प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल हैं।
बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं को भौतिक नोटिस हस्तगत करा रहे हैं। इन नोटिसों पर एक क्यूआर कोड भी अंकित है, जिसके माध्यम से मतदाता घर बैठे अपने स्मार्टफोन से भी संबंधित दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं। इसके साथ ही मतदाता अपने संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के कार्यालय में उपस्थित होकर भी अपनी आपत्ति, दस्तावेज या स्पष्टीकरण प्रस्तुत कर सकते हैं।
समय-सीमा और आगे की प्रक्रिया: 30 सितंबर तक अवसर, 4 नवंबर को अंतिम प्रकाशन
दावों और आपत्तियों की इस विधिक प्रक्रिया के लिए आयोग ने स्पष्ट समय-सारणी निर्धारित की है। नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और समर्थनकारी दस्तावेज जमा करने के लिए 30 सितंबर 2026 तक का समय दिया गया है। जो पात्र नागरिक ड्राफ्ट सूची से पूरी तरह छूट गए हैं, वे भी फॉर्म-6 भरकर 30 सितंबर तक नाम जुड़वाने का आवेदन कर सकते हैं।
प्राप्त सभी आपत्तियों और दस्तावेजों की प्रशासनिक सुनवाई व सत्यापन का कार्य 29 अक्टूबर तक पूरा किया जाएगा। सभी विसंगतियों के निवारण और प्रविष्टियों के प्रमाणीकरण के उपरांत दिल्ली की अंतिम व अद्यतन मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को आधिकारिक रूप से प्रकाशित की जाएगी।
Delhi SIR: निष्कर्ष
दिल्ली में चल रहा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनावी लोकतंत्र की शुचिता को तकनीक के माध्यम से सुदृढ़ करने का एक विशाल प्रशासनिक उपक्रम है। 125 वर्षीय श्याम मुखीजा से लेकर देश के शीर्ष नीति-निर्माताओं तक 33 लाख मतदाताओं को मिले नोटिस इस बात को प्रमाणित करते हैं कि आयोग 24 वर्ष पुराने रिकॉर्ड्स को आधुनिक डिजिटल मानकों पर कसने के लिए प्रतिबद्ध है। मतदाताओं के लिए यह अनिवार्य है कि वे किसी अफवाह पर ध्यान दिए बिना 30 सितंबर की अंतिम तिथि से पूर्व अपने वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर अपने लोकतांत्रिक मताधिकार को पूर्णतः सुरक्षित और सत्यापित बनाएं।
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