Jamui Crime News: नाबालिगों से बदसलूकी मामले में SIT गठित, 3 आरोपी गिरफ्तार

कोचिंग से लौट रहे दो नाबालिगों से बदसलूकी, वायरल वीडियो के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई

0

Jamui Crime News: बिहार के जमुई जिले में कोचिंग से लौट रहे नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ सुनसान पहाड़ी इलाके में दुर्व्यवहार, छेड़छाड़ और उसका वीडियो बनाकर प्रसारित करने के अत्यंत संवेदनशील मामले में पुलिस प्रशासन ने बेहद सख्त और व्यापक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्य वारदात में लिप्त तीन नाबालिग आरोपियों को त्वरित छापेमारी के उपरांत गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि घटना की त्वरित जांच के लिए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।

इस पूरे प्रकरण में सबसे अभूतपूर्व विधिक कदम सोशल मीडिया पर नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वालों के विरुद्ध उठाया गया है। जमुई साइबर थाने में लगभग 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल धारकों के खिलाफ पॉक्सो कानून और आईटी अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी जारी करते हुए आम जनता और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं से इस आपत्तिजनक वीडियो को किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा, री-पोस्ट अथवा प्रसारित न करने की अपील की है।

Jamui Crime News: पहाड़ी रास्ते पर घेरकर की गई थी बदसलूकी

पुलिस से प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना शनिवार शाम को उस समय घटित हुई जब कक्षा 10 में अध्ययनरत एक नाबालिग छात्रा अपने सहपाठी छात्र के साथ कोचिंग संस्थान से स्कूटर द्वारा अपने गंतव्य की ओर लौट रही थी। जमुई-लखीसराय मुख्य मार्ग से लगभग तीन किलोमीटर भीतर एक शांत पहाड़ी इलाके के निकट शाम करीब 6:25 से 6:30 बजे के बीच कुछ स्थानीय असामाजिक युवकों ने उनका रास्ता अवरुद्ध कर दिया।

शुरुआती जांच के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि इन युवकों ने दोनों छात्र-छात्राओं को रोककर उनसे अभद्र प्रश्न पूछे, मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। जब भयभीत होकर दोनों किशोरों ने अपने स्कूटर से वहां से निकलने का प्रयास किया, तो आरोपितों ने उनका पीछा किया और उन्हें जबरन रोककर छेड़छाड़ की। इसी दौरान कुछ आरोपितों ने अपने मोबाइल फोन से इस संपूर्ण घटना का वीडियो बना लिया, जिसे बाद में गैरकानूनी रूप से इंटरनेट के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड कर दिया गया।

वायरल वीडियो पर पुलिस का त्वरित संज्ञान: तीन नाबालिग आरोपी निरुद्ध, बाकियों की तलाश

सोशल मीडिया पर इस आपत्तिजनक वीडियो के सामने आते ही जिला पुलिस और राज्य पुलिस मुख्यालय हरकत में आ गए। एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) के.एस. अनुपम ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचने और तकनीकी साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए। पीड़ितों और उनके परिजनों से संपर्क स्थापित कर घटना की विस्तृत जानकारी ली गई और संदिग्धों के हुलिए के आधार पर धरपकड़ शुरू की गई।

पुलिस ने अब तक इस मामले में संलिप्त तीन नाबालिग आरोपियों को हिरासत में ले लिया है, जिनमें से दो की आयु 17 से 18 वर्ष के मध्य बताई गई है। चूंकि पकड़े गए आरोपी किशोर न्याय व्यवस्था के दायरे में आते हैं, इसलिए कानूनी बाध्यताओं के चलते उनकी पहचान गोपनीय रखी गई है। एडीजी के अनुसार, वारदात में प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से जुड़े सात से आठ संदिग्धों की पहचान कर ली गई है। शेष फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें संभावित ठिकानों पर निरंतर दबिश दे रही हैं और उनके पूर्व आपराधिक इतिहास की भी गहन पड़ताल की जा रही है।

एसडीपीओ की अगुवाई में एसआईटी का गठन: पेट्रोलिंग व्यवस्था की भी होगी आंतरिक जांच

घटना के सभी तकनीकी और कानूनी पहलुओं की समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए जमुई के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) की निगरानी में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। यह टीम घटनास्थल के फॉरेंसिक विश्लेषण, पीड़ितों के न्यायिक बयानों, मोबाइल टॉवर डंप डेटा और जब्त किए गए डिजिटल वीडियो की फ्रेम-दर-फ्रेम तकनीकी पड़ताल कर रही है।

एसआईटी जांच के दायरे में स्थानीय कानून-व्यवस्था और गश्त प्रणाली को भी शामिल किया गया है। मुख्य सड़क से दूर स्थित पहाड़ी व सुनसान इलाकों में शाम के समय पुलिस गश्ती वैन अथवा बीट पुलिसकर्मियों की उपस्थिति की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की जा रही है। इसका उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि घटना के समय संबंधित क्षेत्र में सुरक्षात्मक चूक कहां हुई, ताकि भविष्य में इस प्रकार के संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्रों में नियमित पेट्रोलिंग और निगरानी व्यवस्था को अभेद्य बनाया जा सके।

बीएनएस और पॉक्सो एक्ट की कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज

पुलिस महानिदेशालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, पीड़िता के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर जमुई थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) से संबद्ध सुसंगत धाराओं—धारा 128, धारा 74 (महिला की लज्जा भंग करना) और धारा 75 (यौन उत्पीड़न)—के साथ-साथ बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO Act, 2012) की धारा 8 और धारा 12 के अंतर्गत गंभीर मामला दर्ज किया गया है।

पॉक्सो कानून के विधिक प्रावधानों के तहत किसी भी नाबालिग के विरुद्ध घटित लैंगिक अपराधों में अत्यंत कठोर दंड का प्रावधान है। जांच अधिकारियों ने मजिस्ट्रेट के समक्ष पीड़िता के विधिक बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी कर ली है और पीड़िता को आवश्यक मानसिक संबल व कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए बाल कल्याण समिति (CWC) और मनोवैज्ञानिक सलाहकारों का सहयोग लिया जा रहा है।

पहचान उजागर करने पर कड़ा प्रहार: फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स प्रोफाइल्स पर साइबर FIR

इस मामले का दूसरा और अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू सोशल मीडिया पर पीड़िता की पहचान को सार्वजनिक किए जाने से जुड़ा है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद कई अनधिकृत पेजों, ग्रुप्स और व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं ने नाबालिग पीड़िता के चेहरे और पहचान को बिना धुंधला किए इंटरनेट पर वायरल कर दिया। जमुई पुलिस की साइबर सेल ने तकनीकी निगरानी के जरिए ऐसे एकाउंट्स को चिन्हित किया।

जमुई के पुलिस अधीक्षक (SP) विश्वजीत दयाल ने पुष्टि की है कि प्रारंभिक तौर पर 13 फेसबुक, 12 इंस्टाग्राम और 7 एक्स (पूर्व में ट्विटर) खातों के विरुद्ध तत्काल टेकडाउन नोटिस जारी कराए गए थे। इसके पश्चात डिजिटल निगरानी का दायरा बढ़ाते हुए लगभग 120 ऐसे सोशल मीडिया प्रोफाइल धारकों की पहचान की गई है जिन्होंने पीड़िता की निजता का हनन करते हुए वीडियो साझा किया था। इन सभी 120 प्रोफाइल्स के संचालकों के विरुद्ध साइबर थाने में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और पॉक्सो एक्ट की धारा 23 के तहत गैर-जमानती प्राथमिकी दर्ज की गई है।

नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना कानूनन संज्ञेय अपराध: पुलिस की दो टूक चेतावनी

पॉक्सो अधिनियम की धारा 23 और उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी यौन अपराध या छेड़छाड़ की शिकार नाबालिग की पहचान प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उजागर करना एक गंभीर संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। इसमें किसी बच्चे का नाम, चेहरा, आवास, विद्यालय अथवा ऐसा कोई भी विवरण सार्वजनिक करना पूर्णतः प्रतिबंधित है जिससे उसकी पहचान स्थापित हो सके। इस कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को कारावास और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है।

जमुई पुलिस अधीक्षक ने आम नागरिकों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन्स से भावुकता या सनसनी फैलाने के बजाय नागरिक दायित्व निभाने की पुरजोर अपील की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी उपयोगकर्ता के पास यह वीडियो किसी माध्यम से पहुंचता है, तो उसे तत्काल डिलीट करें और आगे किसी को अग्रेषित न करें। केवल वीडियो आगे बढ़ाना (फॉरवर्ड करना) भी कानून की दृष्टि में अपराध का हिस्सा माना जाएगा और डिजिटल ट्रेसिंग के माध्यम से ऐसे सभी खातों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Jamui Crime News: निष्कर्ष

जमुई की यह घटना न केवल सार्वजनिक स्थानों और सुनसान रास्तों पर किशोरों व बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर सतर्कता का संदेश देती है, बल्कि यह सोशल मीडिया के अनियंत्रित और असंवेदनशील उपयोग पर भी कानून के कड़े नियंत्रण की अनिवार्यता को रेखांकित करती है। मुख्य वारदात में शामिल तीन नाबालिग आरोपियों की गिरफ्तारी और एसआईटी का गठन जहां जमीनी स्तर पर न्याय की दिशा में त्वरित कदम है, वहीं पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले 120 सोशल मीडिया हैंडल्स पर दर्ज प्राथमिकी यह कड़ा विधिक संदेश देती है कि डिजिटल स्पेस में कानून का उल्लंघन करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

Read More Here

Asian Games 2026: 22 सितंबर को भारत के बड़े मुकाबले, क्रिकेट में गोल्ड की जंग

Tuesday Hanuman Puja: मंगलवार को हनुमान जी की उपासना में सिंदूर-तेल अर्पण की परंपरा, जानें शास्त्रीय पूजा विधि और दान की मान्यताएं

Gold-Silver Price 22 September 2026: वायदा और हाजिर बाजार में आई गिरावट, जानें दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख शहरों के ताजा रेट

Volvo XC60 Festive Offer: Volvo XC60 और XC90 पर फेस्टिव ऑफर, 65% बायबैक से 5 साल की वारंटी तक लाभ

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.