Mohanlal Organic Farm: आधे एकड़ में बसाई जैविक खेती की हरी-भरी दुनिया, लॉकडाउन में ऑर्गेनिक फार्मिंग बना जुनून; फैंस को दे रहे प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा

सुपरस्टार ने आधे एकड़ में तैयार किया खूबसूरत जैविक बगीचा

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Mohanlal Organic Farm:  मलयालम सिनेमा के महानायक मोहनलाल का नाम सुनते ही जहन में उनके दमदार किरदार, जबरदस्त संवाद और करोड़ों दर्शकों की तालियों की गूंज याद आती है। 45 से अधिक वर्षों के शानदार फिल्मी सफर में उन्होंने ऐसे अनगिनत किरदार जिए जो दर्शकों के दिल में हमेशा के लिए घर कर गए। दृश्यम, मणिचित्रत्ताजु और लूसिफर जैसी फिल्मों से वे न केवल केरल बल्कि पूरे देश के सिनेप्रेमियों के चहेते बन चुके हैं।

लेकिन कैमरे की चकाचौंध से दूर मोहनलाल की एक और दुनिया है जो मिट्टी की सोंधी खुशबू से महकती है। जी हां, यह महानायक खेतों में भी उतना ही सहज और जुनूनी है जितना पर्दे पर। उन्होंने अपने घर के पास आधे एकड़ जमीन पर एक खूबसूरत ऑर्गेनिक फार्म तैयार किया है, जो उनकी जिंदगी का एक बेहद खास हिस्सा बन चुका है।

कोरोना लॉकडाउन ने दिया नया मोड़ — खेती बनी पैशन

मोहनलाल को ऑर्गेनिक फार्मिंग का शौक पहले से था, लेकिन फिल्मी व्यस्तता के कारण इसे पर्याप्त समय नहीं मिल पाता था। वर्ष 2020 में जब कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया की रफ्तार थाम दी और फिल्मों-टीवी शोज की शूटिंग पूरी तरह ठप हो गई, तब मोहनलाल को अपने इस जुनून को पूरी तरह जीने का मौका मिला। लॉकडाउन के उन महीनों में जब बड़े-बड़े सितारे घरों में बंद थे, मोहनलाल अपने फार्म की मिट्टी में हाथ डाले बीज बो रहे थे, पौधों की देखभाल कर रहे थे और अपने ऑर्गेनिक गार्डन को एक नया स्वरूप दे रहे थे।

उन्होंने इस दौरान सोशल मीडिया पर अपने फार्म की तस्वीरें और वीडियो साझा कीं, जो देखते ही देखते वायरल हो गईं। लाखों फॉलोअर्स ने उनकी इस हरी-भरी दुनिया को देखकर न केवल तारीफ की, बल्कि खुद भी घर पर बागवानी शुरू करने की प्रेरणा ली। इस तरह एक सुपरस्टार का निजी शौक अचानक लाखों लोगों के लिए जैविक जीवनशैली की ओर एक प्रेरक कदम बन गया।

आधे एकड़ में बसी हरी-भरी दुनिया

मोहनलाल का ऑर्गेनिक फार्म उनके घर के पास स्थित है और इसका क्षेत्रफल करीब आधा एकड़ है। भले ही यह बड़े कमर्शियल फार्म की तुलना में छोटा लगे, लेकिन इसमें जो विविधता और हरियाली है वह इसे एक असली ‘ग्रीन हेवन’ बनाती है। इस फार्म की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • विविधता: इस फार्म में तरह-तरह की सब्जियां, फल, जड़ी-बूटियां और पौधे उगाए जाते हैं।

  • पूर्णतः प्राकृतिक: यहाँ सब कुछ बिना किसी रासायनिक खाद या कीटनाशक के, शुद्ध देसी और प्राकृतिक तरीके से उगाया जाता है।

  • भौगोलिक अनुकूलता: केरल की उपजाऊ लाल मिट्टी और पर्याप्त वर्षा इस फार्म को और भी समृद्ध बनाती है।

मोहनलाल खुद इस फार्म में समय बिताते हैं और जब भी शूटिंग की व्यस्तता से थोड़ा वक्त मिलता है, वे अपने इस हरे-भरे आश्रय में लौट आते हैं। यह फार्म उनके लिए शहर की आपाधापी से दूर एक शांत और सुकून भरी जगह है।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं मोहनलाल

मोहनलाल को समझने के लिए सिर्फ उनकी फिल्मों को देखना काफी नहीं है। वे एक ऐसे कलाकार हैं जिनकी रुचियां बेहद विविध और गहरी हैं। थिएटर से लेकर संगीत तक, व्यापार से लेकर जादू (मैजिक) तक — मोहनलाल हर क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान रखते हैं। ऑर्गेनिक फार्मिंग भी उनकी इसी बहुआयामी शख्सियत का एक अहम हिस्सा है।

उनका यह पक्ष बताता है कि वे केवल मनोरंजन की दुनिया तक सीमित नहीं हैं। पर्यावरण के प्रति उनकी संवेदनशीलता और जैविक खेती के प्रति उनका समर्पण यह दर्शाता है कि वे अपनी जड़ों से जुड़े हुए एक जिम्मेदार नागरिक भी हैं। केरल जैसे राज्य में जहां कृषि संस्कृति बेहद गहरी है, मोहनलाल का यह रुझान उन्हें आम मलयाली दिल के और करीब ले जाता है।

आज के दौर की जरूरत और मोहनलाल का संदेश

आज जब रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन रहे हैं और स्वास्थ्य के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ रही है, तब जैविक खेती का महत्व कई गुना बढ़ गया है। ऑर्गेनिक फार्मिंग में रासायनिक उर्वरकों की जगह प्राकृतिक खाद, कम्पोस्ट और जैव-नियंत्रण विधियों का उपयोग होता है। इससे न केवल खाद्य पदार्थ अधिक पोषणयुक्त और सुरक्षित होते हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी दीर्घकाल तक बनी रहती है।

जब मोहनलाल जैसा लोकप्रिय सुपरस्टार जैविक खेती को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाता है, तो इसका संदेश करोड़ों लोगों तक पहुंचता है। उनके फैंस और अनुयायी प्रेरित होते हैं कि अगर उनका पसंदीदा स्टार मिट्टी से जुड़ा है, तो वे भी अपने घरों में छोटी सी शुरुआत कर सकते हैं।

निष्कर्ष: कैमरे से परे एक सरल जीवन

मोहनलाल की फिल्मी यात्रा जितनी शानदार है, उनका व्यक्तिगत जीवन उतना ही सरल और संतुलित है। चकाचौंध भरी फिल्मी दुनिया में रहते हुए भी उन्होंने अपनी जमीनी पहचान कभी नहीं खोई। उनका फार्म इसी का प्रतीक है — एक ऐसी जगह जहां कोई स्क्रिप्ट नहीं होती, कोई निर्देशक नहीं होता, बस मिट्टी होती है, बीज होते हैं और एक किसान होता है जो अपने हाथों से जिंदगी उगाता है।

जब भी मोहनलाल के फार्म की तस्वीरें सामने आती हैं, तो उनके चेहरे पर जो संतोष और खुशी दिखती है, वह किसी भी बड़े पुरस्कार या बॉक्स ऑफिस सफलता से कम नहीं लगती। मोहनलाल की यह हरी-भरी दुनिया उनके करोड़ों प्रशंसकों को यही सीख देती है कि सफलता और सरलता साथ-साथ चल सकती हैं।

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