Vibhuvan Sankashti Chaturthi 2026: अधिक मास में गणेश पूजा का दुर्लभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, व्रत नियम, आवश्यक सामग्री और गणपति कृपा पाने के विशेष उपाय
अधिक मास में गणेश व्रत का शुभ अवसर, जानें पूजा और पारण का सही तरीका
Vibhuvan Sankashti Chaturthi 2026: अधिक मास को बेहद पवित्र माना जाता है और इसमें पड़ने वाला कोई भी व्रत या त्योहार सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना अधिक फलदायी होता है। विभुवन संकष्टी चतुर्थी भी इसी कारण से धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर भक्त पूरे दिन श्रद्धापूर्वक उपवास रखते हैं और रात में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने व्रत का पारण करते हैं।
तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग की गणना के अनुसार, ज्येष्ठ मास (अधिक मास) के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 3 जून 2026 को पड़ रही है। इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु सूर्योदय के समय से ही अपना उपवास शुरू कर देते हैं, जो रात को चंद्रोदय होने तक जारी रहता है। जब तक आकाश में चंद्रमा के दर्शन नहीं हो जाते, तब तक यह उपवास पूर्ण नहीं माना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, गणेश पूजा के लिए शाम का समय यानी प्रदोष काल सबसे उत्तम माना गया है। देश के विभिन्न शहरों और भौगोलिक स्थितियों के अनुसार चंद्रोदय का समय अलग-अलग हो सकता है, इसलिए श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग के हिसाब से ही अर्घ्य का समय तय करना चाहिए। इस विशेष तिथि पर गणपति बाप्पा की आराधना करने से न केवल व्यक्तिगत जीवन की परेशानियां दूर होती हैं, बल्कि पारिवारिक सुख और व्यावसायिक बाधाओं का भी नाश होता है।
पर्व का धार्मिक महत्व
विभुवन संकष्टी चतुर्थी का अपना एक विशिष्ट महत्व है क्योंकि इसका सीधा संबंध अधिक मास से है। हिंदू शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इस दौरान किए गए किसी भी धार्मिक कार्य, दान या उपवास का पुण्य फल हजार गुना बढ़ जाता है। भगवान गणेश चूंकि अग्रपूज्य हैं, इसलिए अधिक मास में उनकी आराधना करने से जीवन के सारे रुके हुए कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न हो जाते हैं।
इस व्रत को रखने से जातक को संतान सुख, आर्थिक मजबूती और उत्तम स्वास्थ्य का वरदान मिलता है। पौराणिक कथाओं में इस बात का स्पष्ट वर्णन मिलता है कि जब भी देवताओं या मनुष्यों पर कोई भारी विपत्ति आई, तब गणेश जी ने अपने भक्तों की रक्षा की। महिलाएं मुख्य रूप से अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए इस व्रत को रखती हैं, वहीं पुरुष अपने कार्यक्षेत्र और व्यापार में उन्नति की कामना से यह उपवास करते हैं।
जरूरी पूजा सामग्री
भगवान गणेश की पूजा को पूर्ण रूप से विधि-विधान के साथ संपन्न करने के लिए सभी जरूरी सामग्रियों का इंतजाम पहले से ही कर लेना चाहिए। पूजन के लिए एक सुंदर चौकी या आसन, भगवान गणेश की नई प्रतिमा या तस्वीर, पवित्र गंगाजल, चंदन, रोली और कुमकुम की आवश्यकता होती है। इसके अलावा अक्षत यानी साबुत चावल, सुगंधित धूप, अगरबत्ती, शुद्ध देसी घी का दीपक, जनेऊ, साबुत सुपारी, पान के पत्ते और ताजे फल जैसे केला और नारियल भी पूजा में शामिल किए जाने चाहिए।
गणपति बाप्पा की पूजा में लाल या पीले रंग के फूल, विशेषकर गेंदे के फूल का प्रयोग करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सबसे महत्वपूर्ण सामग्री दूर्वा घास है, जिसकी 21 गांठें भगवान को अर्पित की जाती हैं। भोग लगाने के लिए मोदक या तिल के लड्डू का होना आवश्यक है क्योंकि यह गणेश जी का सबसे प्रिय प्रसाद है। पूजा स्थल पर एक तांबे या पीतल का कलश और पंचामृत बनाने के लिए कच्चा दूध, दही, शहद और शक्कर भी पहले से तैयार रखना चाहिए।
घर पर पूजन की सरल विधि
विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद अपने घर के मंदिर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ-सुथरा करें। एक साफ चौकी पर लाल या पीला सूती कपड़ा बिछाएं और उस पर अत्यंत आदर के साथ भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें।
पूजन की मुख्य शुरुआत भगवान गणेश को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराकर की जाती है। स्नान के बाद उन्हें सुंदर वस्त्र या कलावा अर्पित करें और माथे पर चंदन व रोली का तिलक लगाएं। इसके बाद अटूट अक्षत, फूल और माला चढ़ाएं। भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए 21 दूर्वा घास की गांठें “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का उच्चारण करते हुए अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक और धूप जलाकर मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। पूजा के अंत में गणेश जी की कपूर से आरती करें और रात को चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें दूध और जल मिलाकर अर्घ्य दें।
व्रत के नियम और पारण
संकष्टी चतुर्थी का यह विशेष व्रत पूरी तरह से सात्विक और नियमों से बंधा होता है। व्रत रखने वाले जातक को सूर्योदय से लेकर रात में चंद्रमा के दिखने तक अन्न का त्याग करना होता है। इस उपवास के दौरान केवल फलाहार या सात्विक चीजों का ही सेवन किया जाना चाहिए, जिसमें नमक का प्रयोग वर्जित माना गया है। यदि आवश्यक हो तो केवल सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
दिन के समय भूख या प्यास लगने पर कुट्टू के आटे का हलवा, ताजे फल, दूध या साबूदाने की खिचड़ी का सेवन किया जा सकता है। रात के समय जब चंद्रमा पूर्ण रूप से उदित हो जाए, तब सबसे पहले उन्हें जल अर्पित करें। इसके बाद भगवान गणेश को लगाए गए भोग के प्रसाद को खाकर ही व्रत का पारण करना चाहिए। व्रत के दौरान मन को पूरी तरह शांत रखना चाहिए और किसी भी प्रकार के क्रोध, झूठ या नकारात्मक विचारों से दूर रहना अनिवार्य है।
Vibhuvan Sankashti Chaturthi 2026: रखी जाने वाली सावधानियां
विभुवन संकष्टी चतुर्थी की पूजा के दौरान शुद्धता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। पूजा में उपयोग की जाने वाली सभी सामग्रियां पूरी तरह से साफ और सात्विक होनी चाहिए। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को दिन के समय बार-बार पानी पीने से बचना चाहिए, हालांकि शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आवश्यकतानुसार तरल पदार्थों का सेवन किया जा सकता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान इस व्रत को करने और मूर्तियों को छूने से बचना चाहिए। पूजा के समय सारा ध्यान मंत्रों के शुद्ध उच्चारण और भगवान की भक्ति पर केंद्रित होना चाहिए। इस पावन दिन पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करना भी बेहद फलदायी माना जाता है। किसी जरूरतमंद को भोजन कराना या मंदिर में अन्न का दान करने से भगवान गणेश अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
निष्कर्ष और अंतिम समीक्षा
विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 का यह दुर्लभ अवसर सभी विघ्नों को हरने वाला है। 3 जून को पूरे विधि-विधान और सच्ची श्रद्धा के साथ किया गया यह व्रत भक्तों को हर मानसिक और शारीरिक कष्ट से मुक्ति दिलाने की क्षमता रखता है। आधुनिक और भागदौड़ भरी जिंदगी में ऐसे आध्यात्मिक पर्व न केवल मानसिक शांति प्रदान करते हैं, बल्कि हमारे परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करते हैं। अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर गणपति बाप्पा की आराधना करें और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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