Stress and Sleep: क्या तनाव और नींद की कमी से पड़ सकते हैं मिर्गी के दौरे? जानें इसके कारण और बचाव के उपाय
मिर्गी के मरीजों में नींद की कमी, मानसिक तनाव और दवाओं की अनियमितता दौरे को ट्रिगर कर सकती है।
Stress and Sleep: आधुनिक जीवनशैली में मानसिक तनाव, काम के अनिश्चित घंटे और नींद की कमी एक आम स्वास्थ्य समस्या का रूप ले चुके हैं। पढ़ाई का अत्यधिक दबाव, देर रात तक स्क्रीन पर समय बिताना, अनियमित खानपान और बिगड़े हुए स्लीप साइकिल के कारण लोगों को अक्सर थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी का सामना करना पड़ता है। आम तौर पर लोग इन समस्याओं को अस्थायी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, किंतु न्यूरोलॉजिकल विकारों से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए यह लापरवाही बेहद गंभीर सिद्ध हो सकती है। विशेष रूप से मिर्गी (Epilepsy) से पीड़ित मरीजों के लिए लगातार तनाव में रहना और अनिद्रा का शिकार होना मिर्गी के अचानक दौरे (Seizures) पड़ने के सबसे बड़े ट्रिगर्स में से एक माना गया है।
न्यूरोलॉजिस्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि तनाव या नींद की कमी स्वयं किसी स्वस्थ व्यक्ति में मिर्गी का रोग उत्पन्न नहीं करते। हालांकि, जिन व्यक्तियों को पहले से मिर्गी की समस्या है, उनमें यह दोनों स्थितियां मस्तिष्क की संवेदनशील तंत्रिका कोशिकाओं को उत्तेजित कर दौरे की संभावना को कई गुना बढ़ा देती हैं।
Stress and Sleep: क्या है मिर्गी और मस्तिष्क में यह कैसे प्रभाव डालती है?
मिर्गी मस्तिष्क से संबंधित एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो दिमाग की सामान्य विद्युत गतिविधियों में अचानक आने वाले असामान्य असंतुलन के कारण उत्पन्न होती है। हमारा मस्तिष्क अरबों न्यूरॉन्स से मिलकर बना है, जो विद्युत और रासायनिक संकेतों के माध्यम से परस्पर संवाद करते हैं। जब अचानक न्यूरॉन्स से अत्यधिक और अनियंत्रित विद्युत डिस्चार्ज होने लगता है, तो व्यक्ति को दौरा पड़ता है।
दौरे की प्रकृति हर मरीज में भिन्न हो सकती है। कुछ मरीजों में पूरे शरीर में तेज झटके, हाथ-पैर का अकड़ना और मुंह से झाग आने जैसी स्थिति बनती है, जिसे सामान्य भाषा में ‘फिट्स’ कहा जाता है। वहीं कुछ मरीजों में केवल कुछ सेकंड के लिए चेतना खो जाना, शून्यता में देखना या भ्रम की स्थिति महसूस होना जैसे लक्षण दिखते हैं। चिकित्सकों के अनुसार हर दौरा मिर्गी का परिचायक नहीं होता, क्योंकि तेज बुखार, सिर की गंभीर चोट या रक्त में सोडियम की कमी से भी दौरे पड़ सकते हैं। इसलिए पहली बार दौरा पड़ने पर न्यूरोलॉजिस्ट से मस्तिष्क का ईईजी (EEG) और एमआरआई (MRI) कराना अनिवार्य होता है।
नींद की कमी मस्तिष्क की विद्युत प्रणाली को कैसे करती है अस्थिर?
गहरी और गुणवत्तापूर्ण नींद मस्तिष्क के पुनर्निर्माण और उसकी रासायनिक संतुलन प्रणाली को स्थिर बनाए रखने के लिए बुनियादी आवश्यकता है। जब कोई व्यक्ति सोता है, तो मस्तिष्क की तरंगों में एक व्यवस्थित चक्रीय बदलाव होता है। लगातार कम सोने या स्लीप एपनिया जैसी समस्याओं के कारण जब नींद का यह चक्र बार-बार बाधित होता है, तो मस्तिष्क के न्यूरॉन्स की संवेदनशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।
मिर्गी के मामलों में नींद का अभाव मस्तिष्क के ‘सीजर थ्रेशोल्ड’ (Seizure Threshold) को घटा देता है। इसका अर्थ यह है कि मस्तिष्क असामान्य विद्युत उत्तेजना को रोकने की अपनी स्वाभाविक क्षमता खोने लगता है। लंबे समय तक जागने, रात की शिफ्ट में लगातार काम करने या नींद का समय बार-बार बदलने से मिर्गी के मरीजों में सुबह उठते ही दौरे पड़ने का जोखिम सबसे अधिक पाया गया है।
मानसिक तनाव और दौरे के बीच का न्यूरो-केमिकल संबंध
लंबे समय तक मानसिक दबाव और चिंता में रहने से शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे तनाव हार्मोन का स्तर अनियंत्रित रूप से बढ़ जाता है। ये हार्मोन सीधे तौर पर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं और हृदय गति तथा रक्तचाप को बढ़ाते हैं। इसके अतिरिक्त अत्यधिक तनाव व्यक्ति की भूख और नींद को सीधे तौर पर बिगाड़ देता है, जिससे मरीज दवाएं लेना भूल सकता है या उसकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है।
एपिलेप्सी फाउंडेशन के शोध के अनुसार तनाव से उपजी शारीरिक थकावट मस्तिष्क में उत्तेजक न्यूरोट्रांसमीटर को सक्रिय कर देती है। हालांकि तनाव का प्रभाव हर मरीज में एक समान नहीं होता। कुछ मरीजों में तनाव तुरंत सीजर ट्रिगर कर सकता है, जबकि कुछ व्यक्तियों में इसका प्रभाव अप्रत्यक्ष रूप से नींद की कमी के जरिए सामने आता है।
मिर्गी के मरीजों के लिए जरूरी सावधानियां और जीवनशैली प्रबंधन
मिर्गी से पीड़ित व्यक्तियों के लिए एक नियमित, अनुशासित और शांत जीवनशैली का पालन करना प्राथमिक उपचार जितना ही महत्वपूर्ण है। मरीजों को प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की निर्बाध नींद लेने का सख्त नियम बनाना चाहिए। इसके लिए सोने और जागने का समय प्रतिदिन एक समान रखें और सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन से पूरी तरह दूरी बना लें।
मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण नियम न्यूरोलॉजिस्ट द्वारा निर्धारित एंटी-एपिलेप्टिक दवाओं (AEDs) का नियमित और समय पर सेवन करना है। कई मामलों में दौरे लौटने का मुख्य कारण दवा का एक भी डोज छूट जाना या मनमाने ढंग से दवा की मात्रा कम कर देना होता है। तनाव को नियंत्रित करने के लिए प्रतिदिन हल्का व्यायाम, ध्यान, गहरी सांस लेने के प्राणायाम और सकारात्मक पारिवारिक संवाद का सहारा लेना अत्यंत लाभकारी साबित होता है।
Stress and Sleep: दौरा पड़ने पर आसपास के लोगों को क्या प्राथमिक उपचार (First Aid) देना चाहिए?
यदि आपके सामने किसी व्यक्ति को मिर्गी का दौरा पड़ जाए, तो घबराने या अंधविश्वास का सहारा लेने के बजाय धैर्यपूर्वक तुरंत सही फर्स्ट एड देना चाहिए। सबसे पहले मरीज के आसपास मौजूद नुकीली, कांच की या कठोर वस्तुओं को हटा दें ताकि झटके के दौरान उसे चोट न पहुंचे। मरीज के सिर के नीचे कोई मुलायम कपड़ा या तकिया रख दें और गर्दन के आसपास के तंग कपड़ों, टाई या बेल्ट को ढीला कर दें।
मरीज को धीरे से एक करवट लिटाएं (रिकवरी पोजीशन), जिससे मुंह की लार या उल्टी श्वासनली में न फंसे और सांस सुचारू रूप से चलती रहे। दौरे के समय मरीज को जबरन पकड़कर उसके झटके रोकने की कोशिश कदापि न करें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उसके मुंह में उंगली, चम्मच, कपड़ा, पानी या कोई भी वस्तु डालने की भूल न करें और न ही उसे कोई दुर्गंधयुक्त वस्तु सुंघाएं।
यदि दौरा 5 मिनट से अधिक समय तक लगातार बना रहे, मरीज को एक के बाद एक कई दौरे आएं, दौरे के बाद होश न आए, सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो या मरीज को पानी के भीतर या चोट लगने के कारण दौरा आया हो, तो बिना समय गंवाए तत्काल आपातकालीन एम्बुलेंस बुलाकर उसे नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। सही चिकित्सीय देखभाल और अनुशासित दिनचर्या से मिर्गी को पूरी तरह नियंत्रित कर एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।
Read More Here
Redmi Turbo 6 Max: 10,000mAh से बड़ी बैटरी और 185Hz डिस्प्ले के साथ आ सकता है नया स्मार्टफोन