खर्राटे सिर्फ नींद खराब नहीं करते, गंभीर बीमारी का खतरा! डॉक्टर बताते हैं कब हो जाएं सावधान
स्लीप एपनिया और हृदय रोग का खतरा; विशेषज्ञ ने बताए खर्राटों के कारण और बचाव के उपाय।
Sleep disorder: रात में जोर-जोर से खर्राटे लेना कई घरों की आम समस्या है। परिवार के सदस्य इसे मजाक में उड़ा देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार और तेज आवाज में खर्राटे लेना सामान्य नहीं बल्कि गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। MedFirst ENT सेंटर के कंसल्टेंट डॉक्टर राजेश भारद्वाज के अनुसार, अगर खर्राटों के साथ सांस रुक-रुक कर आती है या दिनभर थकान महसूस होती है तो यह स्लीप एपनिया जैसी समस्या का शुरुआती चेतावनी संकेत हो सकता है। लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करने पर हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं।
Sleep disorder: खर्राटे क्यों आते हैं? वैज्ञानिक कारण समझें
खर्राटे तब उत्पन्न होते हैं जब सोते समय गले और ऊपरी वायुमार्ग की मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं। इससे सांस लेने का रास्ता संकरा हो जाता है। हवा का प्रवाह बाधित होने पर वायुमार्ग की दीवारें कंपन करने लगती हैं, जिससे खर्राटों की तेज आवाज निकलती है। नाक का बंद होना, एलर्जी, साइनस की समस्या या नाक की हड्डी में टेढ़ापन भी खर्राटों को बढ़ावा देता है। कई बार गले में टॉन्सिल या एडेनॉइड्स का बढ़ना भी इसका कारण बनता है। सोने की गलत मुद्रा, खासकर पीठ के बल लेटना, समस्या को और बढ़ा देता है क्योंकि जीभ पीछे की ओर सरक जाती है और वायुमार्ग को ब्लॉक कर देती है।
Sleep disorder: मोटापा और खर्राटों का घातक संबंध
आजकल की सबसे बड़ी वजह मोटापा है। गले के आसपास अतिरिक्त चर्बी जमा होने से वायुमार्ग और संकरा हो जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 30 से ऊपर है, उनमें खर्राटों और स्लीप एपनिया का खतरा दोगुना बढ़ जाता है। शराब का सेवन और धूम्रपान भी खर्राटों को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हैं। शराब गले की मांसपेशियों को और ढीला कर देती है जबकि सिगरेट का धुआं वायुमार्ग में सूजन पैदा करता है। गलत खान-पान, रात को देर से खाना और व्यायाम की कमी ने इस समस्या को युवा पीढ़ी तक पहुंचा दिया है।
स्लीप एपनिया: खर्राटों का सबसे खतरनाक साथी
सबसे गंभीर स्थिति ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) की होती है। इसमें नींद के दौरान सांस बार-बार रुक जाती है, कभी-कभी 10 से 30 सेकंड या उससे ज्यादा समय तक। शरीर को ऑक्सीजन नहीं मिल पाता और मस्तिष्क जागने का सिग्नल भेजता है। डॉ. राजेश भारद्वाज कहते हैं कि अगर खर्राटों के साथ घुटन महसूस होना, रात में अचानक जागना या दिनभर बेहद थकान रहना जैसे लक्षण हैं तो तुरंत जांच करवानी चाहिए। अनुपचारित स्लीप एपनिया से हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, डायबिटीज और यहां तक कि डिप्रेशन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
Sleep disorder: किन लक्षणों पर तुरंत हो जाएं सावधान
सिर्फ खर्राटे ही नहीं, कुछ अन्य संकेत भी खतरे की घंटी बजाते हैं। अगर आपको निम्नलिखित में से कोई समस्या है तो डॉक्टर से सलाह लें:
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तेज और लगातार खर्राटे
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नींद में सांस रुकने या घुटन का एहसास
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सुबह सिरदर्द या मुंह सूखना
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दिनभर नींद आने की समस्या या चिड़चिड़ापन
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ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत
विशेष रूप से 40 वर्ष से ऊपर के लोगों, मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों और परिवार में स्लीप एपनिया का इतिहास होने पर सतर्क रहना चाहिए।
Sleep disorder: खर्राटों का निदान और उपचार के विकल्प
निदान के लिए पॉलीसोम्नोग्राफी (स्लीप स्टडी) टेस्ट करवाया जाता है, जिसमें नींद के दौरान सांस, ऑक्सीजन स्तर और हृदय गति पर नजर रखी जाती है। ज्यादातर मामलों में जीवनशैली में बदलाव से खर्राटों पर काबू पाया जा सकता है:
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वजन कम करें: 10% वजन घटाने से खर्राटे 50% तक कम हो सकते हैं।
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सोने की मुद्रा: बगल (करवट) में लेटने की आदत डालें।
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शराब और धूम्रपान छोड़ें: खासकर सोने से 4-5 घंटे पहले।
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मेडिकल उपकरण: CPAP मशीन हवा का दबाव बनाए रखती है। गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह: समय रहते सावधानी बरतें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का एकमत है कि खर्राटों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। डॉक्टर भारद्वाज कहते हैं, “जो लोग इसे मजाक समझते हैं, वे बाद में पछताते हैं। समय रहते जांच करवाएं तो समस्या आसानी से सुलझ जाती है।” महिलाओं को खासतौर पर सतर्क रहना चाहिए क्योंकि उनके लक्षण अक्सर छिपे रह जाते हैं। गर्भावस्था के दौरान बढ़े खर्राटे भी गंभीर हो सकते हैं।
निष्कर्ष: स्वस्थ नींद ही स्वस्थ जीवन की कुंजी
खर्राटे कोई साधारण समस्या नहीं बल्कि शरीर की चेतावनी हैं। अगर आप या आपके परिवार में कोई तेज खर्राटे ले रहा है और दिनभर थकान महसूस कर रहा है तो आज ही डॉक्टर से संपर्क करें। छोटे-छोटे बदलाव और समय पर इलाज से न सिर्फ खर्राटे कम होंगे बल्कि समग्र स्वास्थ्य भी बेहतर होगा। याद रखें, अच्छी नींद ही अच्छे स्वास्थ्य की नींव है। अपनी और अपनों की सेहत का ख्याल रखें और खर्राटों को नजरअंदाज न करें।
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