Tamilnadu Election 2026: क्या ‘द्रविड़ किलों’ में सेंध लगा पाएगी बीजेपी? अन्नामलाई का चुनावी मैदान से बाहर होना और AIADMK संग गठबंधन की नई बिसात, जानें जमीनी हकीकत

AIADMK गठबंधन के साथ चुनावी मैदान में बीजेपी, अन्नामलाई की गैरमौजूदगी और त्रिकोणीय मुकाबले ने बढ़ाई सियासी हलचल

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Tamilnadu Election 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 अब सिर्फ कुछ दिनों की दूरी पर है। 23 अप्रैल को मतदान होने वाला है और गिनती 4 मई को होगी। द्रविड़ राजनीति की परंपरा में फंसे इस राज्य में भाजपा एक बार फिर एआईएडीएमके के साथ गठबंधन कर 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। 2021 में मात्र 4 सीटें जीतने वाली भाजपा ने 2024 लोकसभा चुनाव में वोट शेयर बढ़ाया लेकिन सीट जीत नहीं सकी। अब सवाल यह है कि क्या अन्नामलाई जैसे चेहरे की अनुपस्थिति और सीट बंटवारे की नाराजगी के बावजूद भाजपा नई जमीन बना पाएगी या चुनौती बरकरार रहेगी।

क्षेत्रीय गौरव और राष्ट्रीय राजनीति के बीच फंसा तमिलनाडु

Tamilnadu Election 2026
Tamilnadu Election 2026

तमिलनाडु की राजनीति दशकों से डीएमके और एआईएडीएमके के इर्द-गिर्द घूमती रही है, जहाँ भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियों को हमेशा कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अकेले लड़ते हुए दक्षिण तमिलनाडु में कन्याकुमारी और रामनाथपुरम जैसे जिलों में 30-35% वोट हासिल कर सबको चौंका दिया था। इस प्रदर्शन ने पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा है। हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने डीएमके को सत्ता से बाहर करने के उद्देश्य से एआईएडीएमके के साथ हाथ मिलाया है, जिससे राज्य के समीकरण बदल गए हैं।

अन्नामलाई का चुनाव न लड़ना और गठबंधन की मजबूरियां

तमिलनाडु भाजपा के सबसे बड़े चेहरे के. अन्नामलाई इस बार चुनावी मैदान में उम्मीदवार के तौर पर नजर नहीं आएंगे। एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के साथ बेहतर तालमेल बिठाने के लिए पार्टी ने नैनार नागेंद्रन को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया। हालांकि अन्नामलाई ने स्पष्ट किया है कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे बल्कि एनडीए को 210 सीटें दिलाने के लिए पूरे राज्य में प्रचार करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अन्नामलाई को साइडलाइन करने से जहाँ गठबंधन को मजबूती मिली है, वहीं पार्टी के कुछ समर्थकों में मोमेंटम कमजोर होने की चिंता भी है।

नैनार नागेंद्रन और तमिलिसई सौंदरराजन की अग्निपरीक्षा

इस बार भाजपा 27 चुनिंदा सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रही है। प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन सातुर सीट से मैदान में हैं, जबकि पूर्व गवर्नर डॉ. तमिलिसई सौंदरराजन चेन्नई की मइलापुर सीट से शहरी मध्यम वर्ग की उम्मीदों का नेतृत्व कर रही हैं। कोयंबटूर नॉर्थ और कन्याकुमारी जिले की सीटों पर भी भाजपा को खास उम्मीदें हैं। पार्टी का मुख्य फोकस उन क्षेत्रों पर है जहाँ 2024 में उसका वोट प्रतिशत बढ़ा था।

डीएमके, एआईएडीएमके और विजय की ‘टीवीके’ की एंट्री

तमिलनाडु का यह चुनाव केवल दो बड़े दलों के बीच नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की डीएमके अपनी सत्ता बचाना चाहती है, जबकि एआईएडीएमके वापसी की कोशिश में है। इन सबके बीच अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) एक ‘तीसरे मोर्चे’ के रूप में युवा वोटरों को अपनी ओर खींच रही है। कुछ ओपिनियन पोल में कड़े मुकाबले के संकेत दिए गए हैं, जिससे चुनावी परिणाम और भी अनिश्चित हो गए हैं।

बिहार मॉडल और क्षेत्रीय गठबंधन की अहमियत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु में भाजपा की चुनौती बरकरार है, लेकिन गठबंधन की रणनीति ‘बिहार मॉडल’ जैसी दिखती है। यदि एनडीए अच्छा प्रदर्शन करता है, तो भाजपा को पहली बार राज्य सरकार में कैबिनेट का हिस्सा बनने का मौका मिल सकता है। हालांकि, भाषा और द्रविड़ संस्कृति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर पार्टी को अभी भी सावधानी बरतने की जरूरत है।

Tamilnadu Election 2026: 4 मई को होगा भविष्य का फैसला

23 अप्रैल को मतदान के बाद 4 मई को आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति का वर्चस्व बना रहता है या भाजपा अपनी ‘नई जमीन’ को सीटों में बदलने में सफल होती है। अन्नामलाई की आक्रामक छवि और एआईएडीएमके का संगठनात्मक ढांचा क्या मिलकर डीएमके को सत्ता से बेदखल कर पाएंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।

डिस्क्लेमर: यह विश्लेषण उपलब्ध सूचनाओं और रिपोर्ट्स पर आधारित है। चुनावी परिणाम पूरी तरह से मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करते हैं।

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