Sleep Disorder Symptoms: क्या सोते समय बार-बार खुलती है आपकी नींद? यह हो सकता है स्लीप एपनिया, दिमाग को पहुंचा रहा है गंभीर नुकसान

Sleep Disorder Symptoms: क्या सोते समय बार-बार खुलती है आपकी नींद? यह हो सकता है स्लीप एपनिया, दिमाग को पहुंचा रहा है गंभीर नुकसान

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Sleep Disorder Symptoms: रात को सुकून भरी नींद हर किसी की जरूरत होती है, लेकिन अगर आपकी नींद बार-बार खुलती है और सुबह उठने पर भी आपको थकान महसूस होती है, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। यह महज एक सामान्य परेशानी नहीं, बल्कि ‘स्लीप एपनिया’ जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है। डॉक्टर बताते हैं कि सोते समय सांस में आने वाली रुकावट आपके दिमाग को ऑक्सीजन से वंचित कर सकती है, जो लंबे समय में आपकी सोचने-समझने की क्षमता और याददाश्त को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।

स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें सोते समय ऊपरी श्वसन मार्ग में बार-बार रुकावट आती है। एक स्वस्थ व्यक्ति रात भर गहरी नींद में रहता है, लेकिन स्लीप एपनिया से पीड़ित व्यक्ति को रात में दर्जनों या सैकड़ों बार सांस लेने में मुश्किल होती है। हालांकि उसे इसका पता नहीं चलता, लेकिन उसका मस्तिष्क हर बार उस सांस के रुकने पर जाग जाता है। यह प्रक्रिया शरीर और दिमाग को उस आराम से वंचित कर देती है, जिसकी उसे दिन भर के कामों के लिए जरूरत होती है।

Sleep Disorder Symptoms: दिमाग के लिए क्यों खतरनाक है ऑक्सीजन की कमी

नानावती मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी विभाग के निदेशक हैं, का कहना है कि स्लीप एपनिया का सबसे बुरा असर हमारे दिमाग पर पड़ता है। जब सांस रुकती है, तो शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बार-बार गिरता है। इसे चिकित्सा की भाषा में ‘इंटरमिटेंट हाइपोक्सिया’ कहा जाता है। दिमाग एक ऐसा अंग है जिसे हर पल निरंतर ऑक्सीजन की आपूर्ति चाहिए होती है।

जब बार-बार ऑक्सीजन का स्तर गिरता है, तो दिमाग की कोशिकाओं पर दबाव पड़ता है। खास तौर पर दिमाग के वे हिस्से जो हमारी याददाश्त, ध्यान और निर्णय लेने की क्षमता के लिए जिम्मेदार होते हैं, वे धीरे-धीरे कमजोर होने लगते हैं। शोध बताते हैं कि जिन लोगों का स्लीप एपनिया का इलाज नहीं होता, उनके मस्तिष्क के महत्वपूर्ण हिस्सों की संरचना में बदलाव आने लगता है। नतीजा यह होता है कि व्यक्ति को ध्यान लगाने में दिक्कत होती है और वह मानसिक रूप से सुस्त महसूस करने लगता है।

गहरी नींद की कमी से कैसे बिगड़ता है मानसिक स्वास्थ्य

नींद केवल एक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह हमारे दिमाग की ‘रिपेयरिंग’ का समय है। रात में हम जब गहरी नींद और रैपिड आई मूवमेंट (REM) वाले चरणों में होते हैं, तो हमारा दिमाग दिन भर की यादों को पक्का करता है और भावनाओं को व्यवस्थित करता है। स्लीप एपनिया की वजह से व्यक्ति कभी भी गहरी नींद में नहीं पहुंच पाता।

हर सांस की रुकावट के साथ दिमाग को एक हल्का सा झटका लगता है और व्यक्ति नींद से बाहर आ जाता है। इसे ‘अराउजल’ कहते हैं। भले ही आपको याद न रहे कि आप रात में जागे थे, लेकिन आपका दिमाग उस दौरान आराम नहीं कर पाता। जब यह सिलसिला रोज रात को चलता है, तो दिन में चिड़चिड़ापन, मूड में बदलाव और काम में मन न लगने जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। आपकी प्रोडक्टिविटी यानी काम करने की क्षमता भी इससे बुरी तरह प्रभावित होती है।

क्या बढ़ सकता है स्ट्रोक और डिमेंशिया का खतरा?

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का असर केवल नींद तक सीमित नहीं है, यह दिल और रक्त वाहिकाओं की बीमारी का भी बड़ा कारण बनता है। बार-बार ऑक्सीजन का स्तर कम होने और फिर बढ़ने के कारण शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है। यह स्थिति आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों को जन्म दे सकती है।

डॉक्टरों के अनुसार, इसका सीधा असर दिमाग की रक्त वाहिकाओं पर भी पड़ता है। जब दिमाग को पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं मिल पाता, तो स्ट्रोक और वैस्कुलर डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा, हालिया शोध में संकेत मिले हैं कि अगर स्लीप एपनिया का समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह अल्जाइमर जैसी भूलने वाली बीमारियों के खतरे को भी बढ़ा सकता है। दिमाग का जो कचरा या मेटाबोलिक वेस्ट रात में बाहर निकलना चाहिए, वह नींद में बाधा के कारण ठीक से साफ नहीं हो पाता।

Sleep Disorder Symptoms: पहचानें लक्षण और तुरंत लें सलाह

स्लीप एपनिया के कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें आप घर पर भी समझ सकते हैं। जैसे जोर-जोर से खर्राटे आना, सोते हुए अचानक सांस का रुक जाना या हांफते हुए जागना, सुबह उठने पर सिर में दर्द रहना, दिन भर बहुत ज्यादा नींद आना और अचानक से चिड़चिड़े हो जाना। यदि आपको या आपके परिवार में किसी को ये लक्षण दिखते हैं, तो पल्मोनोलॉजिस्ट या स्लीप स्पेशलिस्ट से संपर्क करना बहुत जरूरी है।

अच्छी खबर यह है कि स्लीप एपनिया का इलाज पूरी तरह संभव है। आज के समय में सीपीएपी (CPAP) जैसी आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं, जो सोते समय ऑक्सीजन की सप्लाई को बनाए रखती हैं। इसके अलावा, वजन पर नियंत्रण और जीवनशैली में बदलाव लाकर भी इस समस्या से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।

Sleep Disorder Symptoms: जीवनशैली में सुधार है सबसे बड़ा बचाव

यह समझना बहुत जरूरी है कि नींद से समझौता करना आपकी सेहत के लिए कितना महंगा पड़ सकता है। स्लीप एपनिया कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे केवल ‘खर्राटों की समस्या’ समझकर नजरअंदाज कर दिया जाए। यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जो आपके सोचने-समझने की क्षमता और उम्र को कम कर सकती है।

अपने सोने के पैटर्न पर ध्यान दें। यदि आपको लगता है कि आपकी नींद की क्वालिटी खराब है, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। समय पर उठाया गया एक कदम आपके दिमाग और शरीर दोनों को लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य दे सकता है। याद रखें, एक अच्छी रात की नींद ही एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन की असली नींव है।

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