Rahul Gandhi: राहुल गांधी का प्रयागराज में बड़ा बयान, कहा- देश में एक हजार युवाओं में से सिर्फ 12 को मिलती है परमानेंट नौकरी

Rahul Gandhi: प्रयागराज के छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने बेरोजगारी, पेपर लीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मुद्दों पर सरकार को घेरा।

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Rahul Gandhi: उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश की युवा शक्ति और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब इलाहाबाद विश्वविद्यालय देश का सबसे बेहतरीन शैक्षणिक संस्थान माना जाता था, लेकिन आज के दौर में देश के युवाओं के सामने रोजगार का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में देश के एक हजार युवाओं में से केवल 12 युवाओं को ही स्थाई यानी परमानेंट नौकरी मिल पाती है। राहुल गांधी के इस बयान के बाद देश की राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से रोजगार के मुद्दे पर बहस छिड़ गई है और छात्र वर्ग के बीच इस पर खासी चर्चा हो रही है।

Rahul Gandhi: देश में रोजगार के सारे रास्ते बंद होने का गंभीर आरोप

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि देश का युवा आज भी भारी मात्रा में पढ़ाई पर पैसा खर्च कर रहा है, लेकिन रोजगार के तमाम रास्ते बंद हो चुके हैं। उन्होंने वैश्विक बाजार का जिक्र करते हुए कहा कि आज दुनिया के बाजारों में मेड इन चाइना और मेड इन बांग्लादेश के उत्पाद आसानी से देखने को मिल जाते हैं, लेकिन मेड इन इंडिया की झलक उस तरह से नजर नहीं आती है। उनके अनुसार इस स्थिति के पीछे पूर्व में लागू की गई नोटबंदी और जीएसटी जैसी नीतियां जिम्मेदार हैं, जिनकी वजह से छोटे व्यापारियों और उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इसके अलावा सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में लगातार सामने आने वाले पेपर लीक के मामलों ने देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है, जिससे युवा वर्ग में भारी निराशा का माहौल बना हुआ है।

भारतीय युवाओं की क्षमता दुनिया में सबसे अनूठी

राहुल गांधी ने देश के युवाओं की ताकत की सराहना करते हुए कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी यूथ पावर मौजूद है जो किसी भी देश के मुकाबले कई गुना आगे है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, रूस और चीन जैसे ताकतवर देशों की बात अक्सर की जाती है, लेकिन भारत के ऊर्जावान युवाओं की संभावनाओं के आगे ये सभी देश पीछे छूट जाते हैं। देश के चालीस करोड़ युवा इस राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत और उसका गौरव हैं, जो हर क्षेत्र में नया मुकाम हासिल करने का जज्बा रखते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब वे युवाओं की ताकत की बात करते हैं, तो उनका आशय सिर्फ कार्यक्रम में मौजूद भीड़ से नहीं बल्कि देश के कोने-कोने में रहने वाले हर उस युवा से है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है।

डेटा के बिना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कोई अस्तित्व नहीं

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते दौर पर बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आज हर जगह एआई की चर्चा हो रही है और लोग इसे भविष्य की तकनीक मान रहे हैं, लेकिन इसके मूल में युवाओं का डेटा ही सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश के युवाओं के पास सबसे अधिक डेटा उपलब्ध है और उस डेटा के बिना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कोई भी मतलब नहीं निकाला जा सकता है। आज के समय में इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे तकनीकी और पेशेवर पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के नाम पर युवाओं से भारी-भरकम फीस वसूली जाती है, लेकिन मिलने वाले सर्टिफिकेट्स उस स्तर का रोजगार नहीं दिला पाते जिसकी उम्मीद एक छात्र करता है। उन्होंने समझाया कि आधुनिक तकनीक और एआई पूरी तरह से मानव डेटा के आधार पर ही काम करते हैं, इसलिए युवाओं के योगदान को नकारा नहीं जा सकता है।

Rahul Gandhi: शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं की वर्तमान स्थिति पर चिंता

देश के शिक्षण संस्थानों और भर्ती परीक्षाओं की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को मिलने वाली डिग्रियां अब रोजगार की गारंटी नहीं रह गई हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र सालों-साल मेहनत करते हैं और परीक्षा के समय पेपर लीक होने जैसी घटनाएं उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। इस तरह की व्यवस्था के कारण योग्य युवाओं का भविष्य दांव पर लग जाता है और वे मानसिक तनाव का शिकार होने लगते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा प्रशासनिक और तकनीकी पदों के लिए तैयारी करते हैं, लेकिन सिस्टम की कमियों के कारण उन्हें असफलता का सामना करना पड़ता है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए पारदर्शी नीतियों और मजबूत प्रशासनिक सुधारों की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके।

प्रयागराज की धरती से उठी यह आवाज देश के करोड़ों युवाओं की उन भावनाओं का प्रतिनिधित्व करती है जो वर्तमान में बेरोजगारी और महंगी शिक्षा व्यवस्था से जूझ रहे हैं। रोजगार के घटते अवसरों, पेपर लीक की समस्याओं और एआई युग में डेटा के महत्व जैसे गंभीर विषयों पर हुई यह चर्चा आने वाले समय में नीतिगत बदलावों की मांग को और तेज कर सकती है। देश के विकास की धुरी माने जाने वाले युवाओं के लिए यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने दोनों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। एक तरफ जहां सरकार अपनी डिजिटल और तकनीकी पहलों को आगे बढ़ा रही है, वहीं विपक्ष द्वारा उठाए गए इन सवालों ने आम जनता और युवाओं के बीच एक नई वैचारिक बहस को जन्म दे दिया है।

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