दिवाली से पहले पीएम किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त? प्रयागराज में 5.86 लाख किसानों को 117 करोड़ की उम्मीद
PM Kisan 24th Installment 2026: दिवाली से पहले पीएम किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त? प्रयागराज में 5.86 लाख किसानों को 117 करोड़ की उम्मीद
PM Kisan 24th Installment 2026: प्रयागराज के किसानों के लिए त्योहारी सीजन की बड़ी उम्मीद पीएम किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त से जुड़ गई है। कृषि विभाग ने लाभार्थियों को सूचीबद्ध कर लिया है और किस्त जारी करने की तैयारी लगभग पूरी बताई जा रही है। अब इंतजार केंद्र सरकार की हरी झंडी का है। जिले में करीब आठ लाख किसान हैं। इनमें से अब लगभग 5.86 लाख किसान सम्मान निधि के लिए सूची में हैं। जून में आई 23वीं किस्त का लाभ 5.82 लाख किसानों को मिला था। इस बार करीब चार हजार लाभार्थी और जुड़े हैं। राशि के रूप में करीब 117 करोड़ रुपये पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। सूत्रों के अनुसार अधिकतर किस्तें किसी विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से जारी होती रही हैं। इसलिए इस बार भी भव्य आयोजन की संभावना व्यक्त की जा रही है। उपनिदेशक कृषि पवन कुमार विश्वकर्मा ने साफ कहा है कि किस्त जारी होने की तिथि अभी घोषित नहीं हुई है। दशहरा और दीपावली के आसपास रिलीज की अटकलें इसी तैयारी से निकली हैं।
24वीं किस्त की तैयारी कहां तक पहुंची
प्रयागराज कृषि विभाग का दावा है कि कागजी और तकनीकी तैयारी पूरी हो चुकी है। लाभार्थी सूची बन चुकी है। बैंक खातों से जुड़ा काम विभाग के स्तर पर आगे बढ़ा लिया गया है।
किस्त तभी खाते में जाती है जब केंद्र से स्वीकृति और भुगतान का आदेश आता है। इसलिए जिला स्तर की तैयारी जरूरी है, लेकिन अंतिम बटन दिल्ली में दबता है। स्थानीय अधिकारी इसी अंतर को दोहरा रहे हैं।
जून की 23वीं किस्त के बाद यह अगला चक्र है। किसानों का सामान्य सवाल यही है कि पैसा त्योहार से पहले आएगा या बाद में। विभाग फिलहाल तारीख की पुष्टि नहीं कर रहा।
लाभार्थियों की संख्या क्यों बढ़ी
जिले में कुल किसान आबादी करीब आठ लाख बताई गई है। योजना में सभी शामिल नहीं होते। भूमि रिकॉर्ड, आधार-खाता लिंक और पात्रता की शर्तें पूरी करने वाले ही सूची में रहते हैं।
23वीं किस्त में 5.82 लाख किसान थे। 24वीं किस्त के लिए संख्या बढ़कर करीब 5.86 लाख हो गई है। यानी लगभग चार हजार नए नाम जुड़े हैं। हर किस्त पर कुछ किसान बढ़ने की बात अधिकारियों ने कही है।
नए नाम आने के कई कारण हो सकते हैं। लंबित ई-केवाईसी पूरी होना, खाता सही होना या पहले छूटे पात्र किसानों का जुड़ना। विभाग ने इन चार हजार के अलग-अलग कारण सार्वजनिक रूप से नहीं खोले हैं। केवल कुल बढ़ोतरी बताई गई है।
117 करोड़ रुपये का गणित
सूचीबद्ध 5.86 लाख किसानों को करीब 117 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद जताई गई है। यह आंकड़ा जिला स्तर की अनुमानित राशि है। राष्ट्रीय भुगतान का अलग आंकड़ा इस जानकारी में नहीं दिया गया।
सम्मान निधि की एक किस्त दो हजार रुपये की होती है, यह योजना का आम ढांचा है। स्थानीय उम्मीद 117 करोड़ के आसपास इसलिए बनती है क्योंकि लाभार्थियों की बड़ी संख्या एक साथ भुगतान में शामिल होती है। exact प्रति किसान गणना अधिकारियों ने अलग से नहीं बताई, केवल कुल अनुमान दिया गया है।
किसानों के लिए यह राशि बीज, खाद या घर के त्योहारी खर्च में काम आती है। एक किस्त से पूरा सीजन नहीं चलता, लेकिन नकद सहायता समय पर आए तो राहत जरूर मिलती है।
दशहरा और दीपावली से क्यों जुड़ी चर्चा
सूत्र कह रहे हैं कि किस्त दशहरा व दीपावली के आसपास निकलेगी। कारण यह बताया जा रहा है कि पहले कई किस्तें किसी न किसी खास मौके पर प्रधानमंत्री द्वारा जारी हुई हैं। त्योहार का समय राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से चर्चित रहता है।
उपनिदेशक कृषि ने हालांकि तिथि नहीं बताई। उनके बयान से साफ है कि अटकल और आदेश में फर्क है। किसान यदि केवल सोशल मीडिया की तारीख देखकर इंतजार करेंगे तो भ्रम बढ़ सकता है।
त्योहार पर पैसा आने से बाजार में नकदी बढ़ती है। ग्रामीण बाजार में कपड़े, बर्तन और कृषि सामग्री की खरीद दिखती है। यही वजह है कि स्थानीय व्यापारी भी इस किस्त का इंतजार करते हैं।
केंद्र की हरी झंडी क्यों जरूरी
पीएम किसान केंद्र प्रायोजित योजना है। राज्य और जिला लाभार्थी सूची बनाते हैं, भुगतान का आदेश केंद्र से आता है। प्रयागराज की तैयारी पूरी होने का मतलब यह नहीं कि कल खाते में पैसा आ जाएगा।
हरी झंडी में लाभार्थी सत्यापन, पोर्टल अपडेट और कोष से राशि जारी करना शामिल रहता है। कोई नाम अटक जाए तो उस किसान की किस्त रुक सकती है, बाकी सूची आगे बढ़ सकती है।
पिछली किस्तों में भी कुछ खाते तकनीकी कारण से पेमेंट नहीं ले पाए। इसलिए किसान अभी अपना खाता, आधार लिंक और पोर्टल स्टेटस जांच सकते हैं। विभाग ने यही तैयारी पूरी बताई है।
जिले के किसानों पर असर
प्रयागराज मिश्रित कृषि वाला जिला है। छोटे जोत वाले किसान नकदी के लिए इस योजना पर अधिक निर्भर रहते हैं। आठ लाख के मुकाबले 5.86 लाख लाभार्थी बड़ा हिस्सा हैं, फिर भी कुछ किसान बाहर हैं।
बाहर रहने वालों में भूमिहीन, अपात्र घोषित या दस्तावेज अधूरे वाले शामिल हो सकते हैं। योजना की शर्तें केंद्र निर्धारित करती हैं। जिला केवल पात्र सूची आगे बढ़ाता है।
चार हजार नए लाभार्थी जुड़ना उन परिवारों के लिए राहत है जो पिछली बार छूट गए थे। उन्हें दो हजार की नियमित मदद मिलनी शुरू होगी, बशर्ते भुगतान में नाम बना रहे।
विशेष आयोजन की संभावना
सूत्रों का कहना है कि किस्त किसी भव्य आयोजन में प्रधानमंत्री जारी कर सकते हैं। यह अनुमान पुरानी प्रथा पर आधारित है, घोषित कार्यक्रम नहीं। तिथि न होने तक आयोजन स्थल या माध्यम तय मानना जल्दबाजी होगी।
यदि वीडियो कॉन्फ्रेंस या सार्वजनिक कार्यक्रम हुआ तो जिले के चयनित किसान जुड़ सकते हैं। ऐसा पहले भी अन्य योजनाओं में होता रहा है। अभी इसका आधिकारिक कार्यक्रम पत्र नहीं आया है।
किसानों को चाहिए खाते में राशि। मंच जितना भव्य हो, असल राहत बैंक संदेश से मिलती है। इसलिए आयोजन की खबर से अधिक पोर्टल की स्थिति मायने रखती है।
किसानों को क्या ध्यान रखना चाहिए
नाम सूची में है या नहीं, यह सबसे पहला प्रश्न है। मोबाइल पर आधार से जुड़ा नंबर सही होना चाहिए। खाता आधार से लिंक न हो तो राशि अटक सकती है।
फर्जी वेबसाइट किस्त जांचने के नाम पर ओटीपी मांगती हैं। सरकारी पोर्टल और बैंक संदेश ही भरोसेमंद माध्यम हैं। कोई कॉल कर के शुल्क मांगे तो बात तुरंत काट देनी चाहिए।
तिथि घोषित होने के बाद भी दो-तीर दिन बैंक प्रोसेस में लग सकते हैं। एक साथ लाखों खातों में भुगतान जाता है। कुछ बैंक देर से दिखाते हैं। तुरंत न आने पर घबराकर बिचौलिए के पास जाना नुकसानदेह होता है।
त्योहारी अर्थव्यवस्था और खेत का खर्च
दशहरा-दीपावली पर ग्रामीण परिवारों का खर्च बढ़ता है। बच्चों के कपड़े, घर की मरम्मत और खेत की अगली फसल की तैयारी एक साथ आते हैं। दो हजार रुपये छोटे लगते हैं, लेकिन नकदी के अभाव में यही राशि काम आती है।
यदि किस्त त्योहार के बाद आई तो खर्च उधार पर हो सकता है। पहले आई तो ब्याज का बोझ घटता है। इसीलिए आसपास जारी होने की खबर किसानों में चर्चा बन गई है।
कृषि विभाग का काम सूची सही रखना है। बाजार का काम वस्तु उपलब्ध कराना है। दोनों तभी मेल खाते हैं जब भुगतान समय पर हो। अभी दूसरा हिस्सा केंद्र के निर्णय पर टिका है।
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