National Film Awards 2026: राष्ट्रपति मुर्मू ने फिल्मी सितारों से कहा- स्टार वही जो रोशनी फैलाए, हानिकारक चीजों का विज्ञापन न करें
National Film Awards 2026: राष्ट्रपति मुर्मू ने फिल्मी सितारों से कहा- स्टार वही जो रोशनी फैलाए, हानिकारक चीजों का विज्ञापन न करें
National Film Awards 2026: गुजरात के केवड़िया में पहली बार आयोजित 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फिल्मी सितारों से साफ अपील की कि वे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक चीजों का विज्ञापन न करें। उन्होंने कहा कि सितारे वे होते हैं जो रोशनी देते हैं और उसे फैलाते हैं। स्टार वही है जो रोशनी फैलाए। साल 2024 की फिल्मों के लिए दिए गए इन पुरस्कारों का मंच दिल्ली की जगह सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा के सामने बने विशेष गुंबद में सजा। राष्ट्रपति ने 40 से अधिक श्रेणियों में विजेताओं को सम्मानित किया। इसी मौके पर उन्होंने क्षेत्रीय जूरी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। कन्नड़ सिनेमा के दिग्गज अनंत नाग को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिला। फिल्म आर्टिकल 370 को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का सम्मान मिला और यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुना गया। संजय मिश्रा को भक्षक के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का अवॉर्ड दिया गया। यह समारोह भारतीय सिनेमा के सम्मान के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी लेकर आया।
गुजरात में पहली बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड का मंच
नेशनल फिल्म अवॉर्ड लंबे समय से दिल्ली में होते रहे हैं। इस बार परंपरा बदली। समारोह गुजरात के नarmada जिले के एकता नगर में हुआ। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के सामने विशेष गुंबद बनाया गया। माहौल राजकीय गरिमा और सांस्कृतिक उत्साह दोनों से भरा रहा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फीचर फिल्म, नॉन-फीचर फिल्म, भाषाई सिनेमा, बायोपिक और डॉक्यूमेंट्री जैसी श्रेणियों में पुरस्कार दिए। विजेताओं की घोषणा पहले हो चुकी थी। मंगलवार को उन्हें राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिला। यह आयोजन भारतीय सिनेमा को राजधानी से बाहर ले जाने का पहला बड़ा प्रयास बना।
दर्शकों और फिल्म जगत के लोगों ने इस बदलाव को सकारात्मक माना। गुजरात में समारोह आयोजित होने से स्थानीय कलाकारों और दर्शकों को भी नजदीक से देखने का मौका मिला। पूरा कार्यक्रम गरिमापूर्ण रहा और देशभर में प्रसारित हुआ।
राष्ट्रपति का संबोधन और महिलाओं की भागीदारी
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने पुरस्कार पाने वाली महिलाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज कई महिलाओं को उनकी फिल्मों के लिए सम्मान मिला। इसलिए जूरी में भी ज्यादा महिलाओं को जगह मिलनी चाहिए।
राष्ट्रपति का स्पष्ट मत था कि हर क्षेत्रीय जूरी में महिलाओं को शामिल किया जाए। किसी भी क्षेत्र में महिलाओं की सोच और राय शामिल करने से ऐसी दृष्टि बनती है जो पूरी मानवता को समझ सके। यह बात सिनेमा जगत में लंबे समय से चली आ रही चर्चा से जुड़ती है।
नेशनल अवॉर्ड की जूरी में विविधता बढ़ाने की मांग पहले भी उठती रही है। राष्ट्रपति के इस वक्तव्य से उस मांग को संवैधानिक सर्वोच्च स्तर से समर्थन मिला। सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, समाज की छवि भी गढ़ता है। इसलिए निर्णायक मंडली में अलग-अलग अनुभव होना जरूरी माना जाता है।
फिल्मी सितारों से स्वास्थ्य संबंधी अपील
राष्ट्रपति ने फिल्मी सितारों की सामाजिक जिम्मेदारी पर अलग से बात की। उन्होंने कहा कि सितारे करोड़ों लोगों और बच्चों पर गहरा प्रभाव डालते हैं। इसलिए स्टार वही है जो रोशनी देता है। स्टार वही है जो रोशनी फैलाए।
इसी क्रम में उन्होंने स्वास्थ्य के लिए हानिकारक चीजों का प्रचार न करने की सलाह दी। सिनेमा और विज्ञापन का असर बच्चों व युवाओं पर ज्यादा पड़ता है। राष्ट्रपति का संदेश इसी असर को ध्यान में रखकर आया।
फिल्मी हस्तियां ब्रांड अम्ब्रेडर बनती हैं। कई उत्पाद स्वास्थ्य की दृष्टि से विवादित रहे हैं। राष्ट्रपति ने किसी ब्रांड का नाम लिए बिना सामान्य सिद्धांत रखा। सितारों से अपेक्षा की गई कि वे अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल समाज के हित में करें। यह अपील समारोह के औपचारिक स्वर से अलग, सीधे और साफ थी।
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार अनंत नाग को
इस समारोह की सबसे बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धि कन्नड़ अभिनेता अनंत नाग के नाम रही। उन्हें भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दिया गया। वे अपनी पत्नी गायत्री के साथ मंच पर मौजूद रहे।
अनंत नाग पांच दशकों से अधिक समय से फिल्मों में काम कर रहे हैं। उनका सफर रंगमंच और सिनेमा दोनों से जुड़ा है। राष्ट्रपति ने उन्हें यह सम्मान भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए प्रदान किया। पुरस्कार मिलने के बाद का माहौल भावुक रहा।
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार हर वर्ष किसी एक व्यक्तित्व को आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है। इस बार चयन कन्नड़ सिनेमा के इस अनुभवी कलाकार पर गया। क्षेत्रीय सिनेमा को राष्ट्रीय मंच पर मिली यह पहचान कई कलाकारों के लिए प्रेरणा बनी।
आर्टिकल 370 और अन्य प्रमुख विजेता
फिल्म आर्टिकल 370 को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला। यामी गौतम को इसी फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुना गया। फिल्ममेकर आदित्य धर से जुड़ी यह प्रस्तुति समारोह की चर्चा का केंद्र रही।
संजय मिश्रा को फिल्म भक्षक के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार दिया गया। अन्य श्रेणियों में भी देशभर की भाषाओं की फिल्में सम्मानित हुईं। नेशनल अवॉर्ड का स्वभाव हमेशा बहुभाषी रहा है और इस बार भी वही विविधता दिखी।
यामी गौतम के लिए यह बड़ा व्यक्तिगत मुकाम था। आर्टिकल 370 व्यावसायिक सफलता के साथ अब आधिकारिक सम्मान भी पा चुकी है। सहायक भूमिका में संजय मिश्रा का चयन उनके लगातार मजबूत प्रदर्शन की पुष्टि करता है।
सितारों के प्रभाव और सामाजिक संदेश का संबंध
राष्ट्रपति ने सितारों की तुलना रोशनी से की। सिनेमाघरों और स्क्रीन पर दिखने वाले चेहरे घर-घर पहुंचते हैं। बच्चे उनकी बात दोहराते हैं। युवा उनकी जीवनशैली अपनाने की कोशिश करते हैं। इसी वजह से विज्ञापन का चुनाव संवेदनशील विषय बन जाता है।
स्वास्थ्य से जुड़े उत्पाद लंबे समय से बहस में रहे हैं। कुछ विज्ञापनों पर पहले भी सवाल उठे हैं। राष्ट्रपति का वक्तव्य इस बहस को नई ऊंचाई देता है। वे किसी एक उद्योग पर आरोप नहीं लगा रही थीं। वे जिम्मेदारी का सिद्धांत रख रही थीं।
फिल्म जगत में कई कलाकार सामाजिक अभियानों से जुड़े रहे हैं। कुछ ने स्वास्थ्य जागरूकता के विज्ञापन किए हैं। राष्ट्रपति का संदेश उसी दिशा को और मजबूत करता है। स्टार की परिभाषा अब केवल बॉक्स ऑफिस से नहीं, बल्कि समाज पर पड़ने वाले असर से भी जुड़ गई।
क्षेत्रीय जूरी और महिलाओं की भूमिका
राष्ट्रपति ने जूरी संरचना पर जोर दिया। नेशनल फिल्म अवॉर्ड में फीचर और नॉन-फीचर के लिए अलग पैनल होते हैं। क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्में भी अलग मूल्यांकन से गुजरती हैं। इन पैनलों में महिलाओं की संख्या बढ़ाने की बात व्यावहारिक भी है और प्रतीकात्मक भी।
इस वर्ष कई महिला कलाकारों और तकनीशियनों को सम्मान मिला। राष्ट्रपति ने इसी तथ्य को आधार बनाकर आगे का सुझाव दिया। निर्णय प्रक्रिया में विविध आवाजें शामिल हों तो मूल्यांकन अधिक संतुलित माना जाता है।
सिनेमा में महिलाओं की कहानियां बढ़ी हैं। कैमरे के पीछे भी उनकी उपस्थिति धीरे-धीरे बढ़ रही है। जूरी में समान भागीदारी उसी बदलाव का अगला कदम हो सकती है। राष्ट्रपति के वक्तव्य से यह विषय अब नीतिगत चर्चा का हिस्सा बन सकता है।
समारोह का माहौल और सिनेमा जगत की प्रतिक्रिया
केवड़िया का मंच राजकीय समारोह जितना गंभीर था, उतना ही सिनेमाई भी। कलाकार परिवार के साथ पहुंचे। अनंत नाग अपनी पत्नी के साथ मंच पर आए। विजेता अपनी फिल्मों और टीम का शुक्रिया अदा करते रहे।
आर्टिकल 370 के सम्मान के बाद फिल्म से जुड़े लोग भावुक दिखे। यामी गौतम के प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली। संजय मिश्रा जैसे अनुभवी कलाकार का सम्मान दर्शकों को भी अच्छा लगा क्योंकि वे लंबे समय से अलग-अलग भूमिकाओं में स्थिर काम कर रहे हैं।
पहली बार दिल्ली के बाहर हुए इस आयोजन ने नेशनल अवॉर्ड को नए भूगोल से जोड़ा। गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के सामने समारोह होना अपने आप में प्रतीक था। एकता और विविधता दोनों संदेश एक साथ आए।
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