Protein Rich Diet: आपकी थाली में प्रोटीन की भारी कमी, क्या दाल-रोटी से पूरा हो पाएगा शरीर का डेली टारगेट?

Protein Rich Diet: आपकी थाली में प्रोटीन की भारी कमी, क्या दाल-रोटी से पूरा हो पाएगा शरीर का डेली टारगेट?

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Protein Rich Diet: भारतीय रसोई में जब हम भोजन की थाली सजाते हैं, तो वह रंग-बिरंगी और बेहद स्वादिष्ट दिखती है। दाल, रोटी, चावल, सब्जी और रायता- यह हमारा पारंपरिक भोजन है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि स्वाद से भरपूर यह थाली पोषण के मामले में कहां खड़ी है? भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के आंकड़ों के मुताबिक, एक स्वस्थ वयस्क को रोजाना लगभग 60 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। सच्चाई यह है कि हमारी अधिकांश आबादी इस आंकड़े से काफी पीछे है। हमारी ट्रेडिशनल थाली में कार्बोहाइड्रेट की भरमार है, लेकिन शरीर को मजबूत बनाने वाला प्रोटीन कहीं खोया हुआ है।

सवाल यह नहीं है कि हम खा क्या रहे हैं, बल्कि यह है कि जो हम खा रहे हैं, क्या वह शरीर की जरूरतों को पूरा कर रहा है? आज का खानपान हमें पेट भरने का अहसास तो देता है, लेकिन मांसपेशियों की मजबूती और आंतरिक अंगों के बेहतर कामकाज के लिए जरूरी प्रोटीन की आपूर्ति करने में अक्सर फेल हो जाता है। आइए जानते हैं कि हमारी थाली में प्रोटीन की कमी क्यों है और हम इसे कैसे सुधार सकते हैं।

Protein Rich Diet: कार्बोहाइड्रेट का बोलबाला, प्रोटीन का अकाल

हमारी थाली के बनावट पर नजर डालें, तो पाएंगे कि 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ कार्बोहाइड्रेट्स का होता है। सुबह के नाश्ते में पोहा या ब्रेड, दोपहर के खाने में बड़ी मात्रा में चावल या चार-पांच रोटियां, और रात को भी लगभग यही कहानी। कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा तो देते हैं, लेकिन शरीर के निर्माण और मरम्मत का काम प्रोटीन ही करता है।

समस्या तब और गहरी हो जाती है जब हम यह मान लेते हैं कि दाल-चावल खा लिया, तो प्रोटीन मिल गया। दालों में बेशक प्रोटीन होता है, लेकिन वह पूरा नहीं है। एक कटोरी दाल में करीब 20 प्रतिशत प्रोटीन होता है, और उसके साथ मिलने वाला कार्बोहाइड्रेट कहीं अधिक होता है। अगर कोई सिर्फ दाल पीकर 60 ग्राम प्रोटीन का अपना दैनिक लक्ष्य पूरा करना चाहे, तो उसे दिनभर में 7 से 8 कटोरी दाल पीनी होगी, जो न केवल व्यावहारिक है, बल्कि पाचन के लिए भी भारी है।

शाकाहारी भोजन और प्रोटीन की गुणवत्ता

भारत की एक बहुत बड़ी आबादी शाकाहारी है। मांस, मछली और अंडे में जो ‘कम्पलीट प्रोटीन’ (जिसमें शरीर के लिए जरूरी सभी अमीनो एसिड होते हैं) मिलता है, वह शाकाहारी स्रोतों में कम होता है। अनाज और बीन्स (दालें) को जब अलग-अलग खाया जाता है, तो शरीर उनका पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पाता।

हमारे पारंपरिक पकाने के तरीके भी प्रोटीन की गुणवत्ता को कम कर देते हैं। सब्जियों और दालों को बहुत ज्यादा आंच पर देर तक उबालने या भूनने से उनके कई पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। नतीजा यह होता है कि हम खाते तो बहुत कुछ हैं, लेकिन शरीर को उस अनुपात में प्रोटीन नहीं मिल पाता जिसकी उसे सख्त जरूरत होती है।

नाश्ते और स्नैक्स में छिपी है बड़ी चुनौती

हम मुख्य भोजन (लंच और डिनर) में थोड़ा-बहुत प्रोटीन का ध्यान रख भी लेते हैं, लेकिन शाम के नाश्ते के वक्त हमारा अनुशासन पूरी तरह टूट जाता है। समोसा, कचौरी, बिस्कुट, नमकीन या चाय के साथ लिए जाने वाले ये स्नैक्स सिर्फ मैदा, रिफाइंड तेल और चीनी का खजाना हैं। इनमें प्रोटीन का नामो-निशान नहीं होता। अगर हम इसी समय मुट्ठी भर भुने चने, मूंगफली, मखाने या अंकुरित अनाज लें, तो हम अपने प्रोटीन टारगेट के बहुत करीब पहुंच सकते हैं।

Protein Rich Diet: थाली में कैसे लाएं प्रोटीन का पावर?

अपनी डाइट में बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं है, बस छोटे और स्मार्ट चुनाव करने की जरूरत है। 60 ग्राम प्रोटीन का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नहीं है, अगर हम अपनी थाली को थोड़ा संतुलित कर लें:

  • पनीर और टोफू का समावेश: अपने लंच या डिनर में 50 से 100 ग्राम पनीर या टोफू जरूर रखें। पनीर प्रोटीन के साथ-साथ कैल्शियम का भी बेहतरीन स्रोत है।

  • सोयाबीन का सही इस्तेमाल: सोया चंक्स को ‘प्रोटीन का पावरहाउस’ कहा जाता है। इसे सब्जी, पुलाव या सलाद में शामिल करें। यह शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का सबसे सस्ता और दमदार जरिया है।

  • दही और छाछ का महत्व: खाने के साथ एक कटोरी गाढ़ा दही या एक गिलास छाछ शामिल करें। यह न केवल प्रोटीन बढ़ाता है, बल्कि पाचन में भी मदद करता है।

  • सत्तू का शरबत: गर्मियों के मौसम में सत्तू से बेहतर कुछ नहीं है। यह पेट को ठंडा रखता है और प्रोटीन से भरपूर होता है।

  • अंडे और लीन मीट: यदि आप मांसाहारी हैं, तो उबले हुए अंडे और ग्रिल्ड चिकन को डाइट का हिस्सा बनाएं। यह शरीर को उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन तुरंत प्रदान करते हैं।

Protein Rich Diet: सतर्कता ही है बेहतर सेहत का रास्ता

याद रखें, प्रोटीन की कमी का असर रातों-रात नहीं दिखता। यह धीरे-धीरे शरीर में कमजोरी, थकान, बालों का झड़ना, त्वचा की चमक कम होना और मांसपेशियों के घटने के रूप में सामने आता है। जो लोग फिजिकल वर्कआउट करते हैं, उन्हें इसकी कमी सबसे पहले महसूस होती है।

अपने भोजन को एक रूटीन की तरह न लें, बल्कि इसे शरीर की जरूरत के हिसाब से ढालें। भारतीय थाली में पोषण को जोड़ना आसान है, बस जरूरत है तो थोड़े से बदलाव की। अपनी थाली से कार्बोहाइड्रेट का एक हिस्सा कम करें और उसकी जगह प्रोटीन के किसी स्रोत को जगह दें। आपकी सेहत और आपका शरीर, दोनों ही आपको इसके लिए शुक्रिया अदा करेंगे। स्वस्थ रहने के लिए स्वाद के साथ-साथ पोषण का संतुलन ही सबसे बेहतर तरीका है।

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