School Chalo Abhiyan Phase 2: यूपी में 1 जुलाई से होगी ‘स्कूल चलो अभियान’ फेज-2 की शुरुआत, सीएम योगी ने की अपील- ‘कोई भी बच्चा पीछे न छूटे’, शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम

योगी सरकार का बड़ा कदम, ड्रॉपआउट बच्चों को मुख्यधारा में लाने की अपील, कोई बच्चा पीछे न छूटे

0

School Chalo Abhiyan Phase 2: उत्तर प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी और पूरी तरह साक्षर राज्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार 1 जुलाई से एक बहुत ही बड़ा, व्यापक और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। प्रदेश के बुनियादी शिक्षा ढांचे में क्रांतिकारी सुधार लाने के उद्देश्य से सरकार आगामी 1 जुलाई से पूरे राज्य में ‘स्कूल चलो अभियान’ (School Chalo Abhiyan) के दूसरे चरण (फेज-2) का आधिकारिक शंखनाद करने जा रही है। इस महा-अभियान की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी नागरिकों, अभिभावकों, प्रबुद्ध समाज और सरकारी व निजी शिक्षकों से एक बेहद भावुक और कड़क अपील की है कि नए शैक्षणिक सत्र में ‘कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से पीछे न छूटे’। इस विशेष अभियान के तहत ग्रामीण और शहरी मलिन बस्तियों में रहने वाले उन गरीब बच्चों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित (फोकस) किया जाएगा, जो पारिवारिक या आर्थिक तंगियों के चलते अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ चुके हैं (ड्रॉपआउट बच्चे), ताकि उन्हें दोबारा प्राथमिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

उत्तर प्रदेश सरकार की यह महत्वाकांक्षी नीति न केवल राज्य के सुदूर ग्रामीण अंचलों में साक्षरता के ग्राफ को रिकॉर्ड स्तर पर ऊपर ले जाएगी, बल्कि यह राज्य को देश का एक बहुत बड़ा ‘एजुकेशन हब’ बनाने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होने वाली है। बेसिक शिक्षा विभाग ने इस विशाल जमीनी अभियान को पूरी तरह सफल बनाने के लिए सभी 75 जिलों के जिलाधिकारियों (DM) और बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को कड़े प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। आइए आज के इस विशेष प्रशासनिक और सामाजिक समाचार बुलेटिन के माध्यम से बहुत ही विस्तार से समझने का प्रयास करते हैं कि स्कूल चलो अभियान फेज-2 की मुख्य रूपरेखा क्या है, गांव-गांव जाकर ड्रॉपआउट बच्चों को चिन्हित करने की क्या रणनीति बनाई गई है, और स्कूलों की जिम्मेदारी इसमें कितनी कड़ाई से तय की गई है।

अभियान की विस्तृत रूपरेखा, रणनीतियां और गांव-गांव व्यापक सर्वे की योजना

1 जुलाई से शुरू होने वाले ‘स्कूल चलो अभियान’ के दूसरे चरण को इस प्रकार से डिजाइन किया गया है कि इसके भीतर केवल नए बच्चों का दाखिला (एडमिशन) ही नहीं किया जाएगा, बल्कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ‘जीरो ड्रॉपआउट रेट’ (यानी कोई भी बच्चा स्कूल न छोड़े) के कड़े लक्ष्य को हासिल करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाएगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर सरकारी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों की एक बहुत बड़ी संयुक्त टीम (टास्क फोर्स) बनाई गई है, जो घर-घर जाकर (डोर-टू-डोर) एक व्यापक और कड़क डिजिटल सर्वे करेगी। इस सर्वे के माध्यम से 6 से 14 वर्ष की आयु वर्ग के उन सभी बच्चों की एक सटीक सूची तैयार की जाएगी, जिनका या तो कभी स्कूल में नामंकन नहीं हुआ या जिन्होंने किन्हीं कारणों से प्राथमिक कक्षाओं के बाद पढ़ाई बंद कर दी।

इस व्यापक सर्वे के दौरान शिक्षकों की टीम बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों के साथ व्यक्तिगत रूप से बैठकें (काउंसलिंग) करेंगी और उन्हें शिक्षा के महत्व से पूरी तरह अवगत कराते हुए जागरूक करेंगी। सरकार ने इस बार यह भी कड़ा नियम बनाया है कि ईंट-भट्टों, निर्माण स्थलों, रेलवे स्टेशनों और बड़े बाजारों के आसपास रहने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चों को भी चिन्हित करके उनके नजदीकी प्राथमिक विद्यालयों में तत्काल प्रभाव से निशुल्क दाखिला दिलाया जाए, ताकि समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े शोषित व वंचित वर्ग के बच्चों को भी उनका संवैधानिक शिक्षा का अधिकार बेहद सहजता के साथ मिल सके।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कड़ा संदेश और पिछले फेज का व्यावहारिक प्रभाव

इस ऐतिहासिक कूटनीतिक और सामाजिक पहल की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक कड़क संदेश जारी करते हुए कहा है कि किसी भी प्रगतिशील और समृद्ध समाज का निर्माण तब तक पूरी तरह असंभव है, जब तक उसके बच्चे अशिक्षित रह जाते हैं; इसलिए शिक्षा का यह प्रकाश हर एक गरीब की झोपड़ी तक समान रूप से पहुंचना चाहिए। सरकार ने इस बात पर सबसे ज्यादा बल दिया है कि जनप्रतिनिधि, जैसे सांसद, विधायक, ग्राम प्रधान और वार्ड पार्षद भी अपने-अपने क्षेत्रों में इस अभियान की कमान संभालें और स्वयं जाकर कम से कम एक सरकारी स्कूल को पूरी तरह ‘गोद’ लें, ताकि वहां की बुनियादी सुविधाओं, जैसे कि शुद्ध पीने का पानी, शौचालय, स्मार्ट क्लास और खेल के मैदानों का कायाकल्प (ऑपरेशन कायाकल्प के तहत) किया जा सके।

यदि इस योजना के पिछले चरण (फेज-1) के व्यावहारिक प्रभावों पर बात करें, तो उत्तर प्रदेश सरकार को उसमें एक बहुत ही अभूतपूर्व और रिकॉर्ड तोड़ सफलता हासिल हुई थी, जिसके तहत पूरे प्रदेश में लाखों नए बच्चों का नामंकन परिषदीय विद्यालयों में दर्ज किया गया था और ड्रॉपआउट रेट में भारी गिरावट देखी गई थी। पहले चरण के कड़क अनुभवों से सीख लेते हुए ही इस बार फेज-2 में तकनीकों का और ज्यादा बड़ा समावेश किया गया है; जिसके तहत ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ के माध्यम से हर एक नामांकित बच्चे की दैनिक उपस्थिति और उनके सीखने के स्तर (लर्निंग आउटकम) की डिजिटल ट्रैकिंग सीधे लखनऊ मुख्यालय से की जाएगी, ताकि कोई भी बच्चा दोबारा स्कूल से बाहर न जा सके।

School Chalo Abhiyan Phase 2: मुफ्त यूनिफॉर्म, किताबें और स्कूलों व अभिभावकों की कड़क जवाबदेही

नए शैक्षणिक सत्र में बच्चों को स्कूलों के प्रति आकर्षित करने और उनके माता-पिता पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को पूरी तरह समाप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बहुत ही बड़ा बजटीय प्रावधान किया है। इस योजना के तहत नामांकित होने वाले हर एक छात्र को सरकार की तरफ से पूरी तरह से निशुल्क कड़क यूनिफॉर्म (दो जोड़ी कपड़े), जूते-मोज़े, स्कूल बैग, कॉपियां और पूरी पाठ्यपुस्तकें सत्र की शुरुआत में ही उपलब्ध करा दी जाएंगी; इसके साथ ही, बच्चों के पोषण को मजबूत करने के लिए ‘मिड-डे मील’ (मध्यान्ह भोजन) के मेनू को भी अधिक पौष्टिक, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक बनाया गया है।

प्रशासनिक मोर्चे पर, स्कूल प्रबंधनों (SMC) और प्रधानाचार्यों की यह कड़क जिम्मेदारी तय की गई है कि वे केवल बच्चों का नाम रजिस्टर में दर्ज करके शांत न बैठें, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि बच्चा हर रोज स्कूल पढ़ने आ रहा है। यदि कोई बच्चा लगातार तीन दिनों तक स्कूल से अनुपस्थित रहता है, तो क्लास टीचर को स्वयं उसके घर जाकर उसके माता-पिता से संपर्क करना होगा और उसकी अनुपस्थिति का वास्तविक कारण जानकर उसे दोबारा स्कूल लाना होगा। अभिभावकों को भी यह कड़ी सलाह दी गई है कि वे सरकार द्वारा दी जा रही इन सभी निशुल्क सुविधाओं का पूरा और सही उपयोग करते हुए अपने बच्चों की नियमित पढ़ाई पर विशेष ध्यान दें, और घर पर भी उन्हें पढ़ने का एक शांत व अच्छा माहौल प्रदान करें, जो उनके बच्चों के सुंदर चरित्र निर्माण में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा।

निष्कर्ष: साक्षर उत्तर प्रदेश का उज्ज्वल भविष्य और समग्र विकास का अंतिम लक्ष्य

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू किया गया यह व्यापक और कड़क ‘स्कूल चलो अभियान फेज-2’ (School Chalo Abhiyan Phase 2) वास्तव में राज्य से अज्ञानता के अंधकार को हमेशा के लिए मिटाने और आने वाली नई पीढ़ी को एक बेहद सुरक्षित, आधुनिक, तकनीकी रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर भविष्य प्रदान करने की दिशा में एक बहुत ही व्यावहारिक, दूरदर्शी और क्रांतिकारी कदम है। जब राज्य का पूरा प्रशासनिक तंत्र, समर्पित शिक्षक समाज, जागरूक प्रबुद्ध वर्ग और उत्तरदायी अभिभावक एक साथ मिलकर एक मजबूत श्रृंखला की तरह काम करते हैं, तो अशिक्षा और अज्ञानता जैसी सदियों पुरानी सामाजिक बीमारियों को बहुत ही आसानी से परास्त किया जा सकता है, जो हमारे गौरवशाली राष्ट्र की असली कूटनीतिक और आंतरिक शक्ति को प्रदर्शित करता है।

अदालतों के कड़े कानूनों और शास्त्रों की दी हुई पावन सीखों की तरह ही इस सरकारी शिक्षा नीति के हर एक बिंदु को पूरी ईमानदारी, निष्ठा और कड़ाई के साथ जमीन पर उतारना हम सभी का परम राष्ट्रीय और नैतिक कर्तव्य है। नियमों का यह कड़ा अनुशासन, बच्चों के प्रति हमारा यह अगाध स्नेह और शिक्षा के प्रति यह सामूहिक मुस्तैदी ही हमारे पूरे उत्तर प्रदेश के कोने-कोने में ज्ञान, समृद्धि, अटूट प्रगति और मधुर खुशियों का एक नया सूर्योदय हमेशा के लिए सुनिश्चित कर देगी; इसलिए जागरूक बनें, अपने आस-पास के हर एक बच्चे को स्कूल भेजें और एक नए व साक्षर भारत के नवनिर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान बेहद सहजता के साथ देते रहें।

Read more here

India cricket loss Ireland: इतिहास का सबसे बुरा दौर? गौतम गंभीर की कुर्सी पर सवाल, क्या खतरे में है मुख्य कोच का पद

Kamar Turle Pahile: खेसारी लाल यादव के ‘कमर तुरले पहिले’ गाने में सोना डे का ग्लैमरस लुक देखकर फैंस हुए दीवाने, रोमांस ने बढ़ाया इंटरनेट का तापमान

US Iran peace talks: थम गए अमेरिका और ईरान के बीच हमले, इस हफ्ते दोहा में होगी उच्च स्तरीय बैठक; क्या बचेगी पीस डील, मध्य पूर्व में बढ़ी उम्मीद

Anupama episode 29 June 2026: क्या अनुपमा का साथ देंगे दिग्विजय? ट्विस्ट भरा एपिसोड, फैंस का बढ़ा उत्साह

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.