Post Office Scheme: पोस्ट ऑफिस की इस शानदार स्कीम में निवेश कर हर महीने पाएं पक्की कमाई, जीरो रिस्क के साथ मिल रहा है तगड़ा फायदा
Post Office Scheme: पोस्ट ऑफिस की इस शानदार स्कीम में निवेश कर हर महीने पाएं पक्की कमाई, जीरो रिस्क के साथ मिल रहा है तगड़ा फायदा
Post Office Scheme: बचत की दुनिया में हर निवेशक की यह तलाश होती है कि उसकी मेहनत की गाढ़ी कमाई ऐसी जगह सुरक्षित रहे जहां किसी भी प्रकार का बाजार का जोखिम न हो। शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर यदि कोई निश्चित आमदनी की गारंटी चाहता है, तो भारतीय डाक विभाग की छोटी बचत योजनाएं आज भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई हैं। इसी कड़ी में पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम यानी एमआईएस एक ऐसा विकल्प है जो निवेशकों को एकमुश्त निवेश के बाद हर महीने नियमित आय सुनिश्चित करती है। इस सरकारी योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें निवेश किया गया एक-एक रुपया पूरी तरह सुरक्षित रहता है, क्योंकि इसकी सुरक्षा की सीधी गारंटी देश की सरकार देती है।
Post Office Scheme: शून्य जोखिम और आकर्षक ब्याज दरों का मेल
आम तौर पर लोग निवेश के लिए म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार का रुख करते हैं, जहां मुनाफा तो बड़ा हो सकता है लेकिन जोखिम भी उसी अनुपात में बना रहता है। इसके विपरीत, पोस्ट ऑफिस की इस वन टाइम इन्वेस्टमेंट योजना में रिस्क का प्रतिशत बिल्कुल शून्य है। सेवानिवृत्त यानी रिटायर्ड कर्मचारियों, बुजुर्गों और उन तमाम लोगों के बीच यह योजना खासी लोकप्रिय है जो बिना किसी मानसिक तनाव के हर महीने एक निश्चित राशि अपने खाते में चाहते हैं।
वर्तमान समय में इस योजना के तहत सरकार की ओर से सात दशमलव चार प्रतिशत की दर से ब्याज का लाभ दिया जा रहा है। इस ब्याज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका भुगतान हर महीने नियमित रूप से किया जाता है। योजना का लाभ उठाने के लिए किसी भी नजदीकी डाकघर में जाकर अपने जरूरी दस्तावेजों के साथ आसानी से खाता खुलवाया जा सकता है। शुरुआती निवेश की बात करें तो मात्र एक हजार रुपये की छोटी सी रकम से भी इस खाते की शुरुआत की जा सकती है।
सिंगल और ज्वाइंट खाते की सीमा और निवेश का गणित
निवेशकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस योजना के तहत सिंगल और संयुक्त यानी ज्वाइंट दोनों तरह के खाते खोलने का प्रावधान किया गया है। यदि कोई अकेला व्यक्ति अपने नाम से सिंगल खाता खुलवाता है, तो वह इसमें अधिकतम नौ लाख रुपये तक की राशि एकमुश्त जमा कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, यदि दो या तीन लोग मिलकर ज्वाइंट खाता खुलवाते हैं, तो इस निवेश की सीमा को बढ़ाकर अधिकतम पंद्रह लाख रुपये तक कर दिया गया है। एक बार यह तय सीमा जमा हो जाने के बाद डाकघर की तरफ से ब्याज का पैसा निवेशक के खाते में आना शुरू हो जाता है।
इस पूरी योजना की समय सीमा यानी मैच्योरिटी पीरियड पांच साल का तय किया गया है। चलिए इसे एक उदाहरण से समझते हैं कि यह गणित कैसे काम करता है। मान लीजिए कि आपने ज्वाइंट खाते के माध्यम से अधिकतम पंद्रह लाख रुपये का एकमुश्त निवेश कर दिया है। अब मौजूदा सात दशमलव चार प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर के हिसाब से यदि गणना की जाए, तो आपको हर महीने नौ हजार दो सौ पचास रुपये की राशि सीधे तौर पर मिलती रहेगी। इस तरह पूरे पांच साल की अवधि के दौरान केवल ब्याज के रूप में आपको पांच लाख पचपन हजार रुपये की अतिरिक्त कमाई हासिल होगी, जो मूलधन से बिल्कुल अलग होगी।
Post Office Scheme: समय से पहले खाता बंद करने पर लगने वाले नियम और शुल्क
योजना का पूरा और वास्तविक लाभ तभी मिल पाता है जब आप इसे इसके निर्धारित पांच साल के मैच्योरिटी पीरियड तक पूरी ईमानदारी से चालू रखते हैं। यदि किसी अनिवार्य कारणवश निवेशक को बीच में ही अपना खाता बंद कराने की नौबत आती है, तो इसके कुछ निश्चित और कड़े नियम तय किए गए हैं जिनका पालन करना जरूरी होता है। यदि खाता खुलने के एक साल से लेकर तीन साल की समयावधि के भीतर उसे बंद कराया जाता है, तो मूलधन में से दो प्रतिशत की कटौती कर ली जाती है।
इसी प्रकार, यदि खाता तीन साल से पांच साल के बीच की अवधि में बंद किया जाता है, तो नियमों के तहत मूलधन राशि से एक प्रतिशत काटा जाता है। हालांकि, यदि किसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में खाताधारक की मृत्यु हो जाती है, तो मैच्योरिटी अवधि से पहले भी खाते को पूरी तरह बंद किया जा सकता है और सारा जमा पैसा कानूनी रूप से नॉमिनी को सौंप दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में ब्याज की रकम को निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना आधार पर प्राप्त करने का विकल्प चुन सकते हैं, जो इसे आम नागरिकों के लिए बेहद लचीला और उपयोगी बनाता है।
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