Dharmendra Pradhan Resignation: जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन जारी, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी प्रदर्शन जारी; अन्य मांगों पर छात्र डटे, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी CJP ने अन्य मांगों पर आंदोलन जारी रखने की घोषणा की
Dharmendra Pradhan Resignation: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले चल रहे छात्र आंदोलन में शनिवार का दिन बेहद निर्णायक रहा। नीट-यूजी पेपर लीक विवाद को लेकर पिछले एक महीने से अधिक समय से डटे प्रदर्शनकारियों के दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया। इसके बावजूद सीजेपी ने साफ कर दिया है कि आंदोलन यहीं समाप्त नहीं होगा और बाकी मांगें पूरी होने तक छात्र धरना स्थल पर डटे रहेंगे।
सुरक्षा के लिहाज से पूरी राजधानी में कड़े इंतजाम किए गए हैं और अठारह मेट्रो स्टेशनों को बंद रखा गया है। जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल तैनात है और घेराबंदी सख्त कर दी गई है।
जंतर-मंतर पर कड़ा पहरा, 18 मेट्रो स्टेशन बंद
सुरक्षा स्थिति को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सुबह 7:30 बजे से ही 18 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए। पुलिस ने जंतर-मंतर के आसपास बैरिकेड्स को जंजीरों और वेल्डिंग से मजबूत किया है।
प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) का इस्तेमाल कर आने-जाने वालों पर नजर रखी जा रही है। वहीं, सीजेपी के प्रवक्ताओं का आरोप है कि पुलिस स्वयंसेवकों को भोजन, पानी और दवाइयां अंदर ले जाने से रोक रही है, जिससे वहां आपातकालीन जैसी स्थिति बन गई है।
तीसरे दौर की बातचीत और आगे की रणनीति
शनिवार दोपहर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ सीजेपी प्रतिनिधियों की तीसरे दौर की बैठक तय हुई। सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका के अनुसार, सरकार के साथ मुआवजे और दर्ज मुकदमों को वापस लेने पर सैद्धांतिक सहमति बनी है, लेकिन वे इस पर लिखित आश्वासन चाहते हैं।
संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी सभी शर्तों पर ठोस समाधान नहीं निकाला गया तो वे ‘संसद मार्च पार्ट-2’ की घोषणा करने से पीछे नहीं हटेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और सीजेपी का रुख
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर छात्रों ने खुशी जताई। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे छात्र शक्ति और लोकतंत्र की जीत करार दिया।
अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि यह केवल पहली सफलता है और आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक अन्य दो मांगें पूरी नहीं हो जातीं:
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मुआवजा: नीट पेपर लीक से आहत होकर आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिले।
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कार्रवाई व केस वापसी: 20 जुलाई की घटना में शामिल पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई हो और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) निरस्त की जाएं।
पीड़ित परिवारों की भागीदारी और राजनीतिक समर्थन
आंदोलन को देश भर से समर्थन मिल रहा है। नागपुर में नीट पीड़ित छात्रा के परिजनों ने सीजेपी के प्रदर्शन में भाग लिया और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही।
कांग्रेस पार्टी ने भी देश भर में कैंडल मार्च और सत्याग्रह का ऐलान किया है। राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने छात्रों की मांगों को जायज ठहराते हुए सरकार पर दबाव बनाया। सीजेपी ने रविवार (26 जुलाई) शाम 6 बजे देशभर में कैंडल मार्च निकालने का आह्वान किया है।
Dharmendra Pradhan Resignation: पेपर लीक पर कड़े कानून का मसौदा
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इसमें संगठित अपराध के मामलों में 10 साल तक की कैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान शामिल है। साथ ही, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के कई अधिकारियों पर गाज गिरी है।
तमाम प्रशासनिक और कानूनी सुधारों के (Dharmendra Pradhan Resignation) बावजूद, जंतर-मंतर पर छात्र अपनी संपूर्ण मांगों को लेकर डटे हुए हैं। आगे की स्थिति रविवार के कैंडल मार्च और सरकार के रुख पर निर्भर करेगी।
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