US Tariffs: अमेरिका ने भारत समेत करीब 60 देशों पर नया टैरिफ लागू किया, फोर्स्ड लेबर नियमों के आधार पर भारत को 10% अतिरिक्त शुल्क
USTR ने फोर्स्ड लेबर नियमों के आधार पर नया टैरिफ लागू किया, भारत 10% शुल्क वाले समूह में शामिल
US Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिका ने भारत सहित करीब 60 देशों पर नया टैरिफ लागू कर दिया है। यह शुल्क उन देशों पर लगाया गया है जिन पर आरोप है कि उन्होंने जबरन मजदूरी यानी फोर्स्ड लेबर (Forced Labor) से बने सामानों के आयात पर प्रभावी रोक नहीं लगाई या उसे सही तरीके से लागू नहीं किया। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने गुरुवार को इस फैसले की घोषणा की। भारत को इस सूची में 10 प्रतिशत के टैरिफ वाले समूह में जगह मिली है। यह नया शुल्क 24 जुलाई 2026 से लागू हो गया है।
यह टैरिफ सेक्शन 301 के तहत लगाया गया है। इससे पहले अमेरिका ने सेक्शन 122 के तहत अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लगाया था जो 24 जुलाई को समाप्त हो गया। अब उसकी जगह यह नया शुल्क ले चुका है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन से फोर्स्ड लेबर को खत्म करने और व्यापारिक साझेदारों को ऐसे नियम लागू करने के लिए प्रेरित करने के मकसद से उठाया गया है।
US Tariffs: अमेरिका ने यह टैरिफ क्यों लगाया
अमेरिका का दावा है कि कई देशों ने फोर्स्ड लेबर से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने वाले कानून नहीं बनाए या उन्हें प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया। USTR ने जांच के बाद पाया कि यह स्थिति अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंचा रही है और मानवाधिकारों का भी उल्लंघन है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर ने कहा कि केवल बातचीत या अपील से वैश्विक सप्लाई चेन से जबरन मजदूरी खत्म नहीं हुई है। अमेरिका लंबे समय से ऐसे सामानों के आयात पर रोक लगाता आ रहा है और वह चाहता है कि उसके व्यापारिक साझेदार भी ऐसा ही करें।
जांच मार्च 2026 में शुरू हुई थी। इस दौरान 45 से ज्यादा सरकारों से चर्चा की गई। सार्वजनिक सुनवाई भी हुई और हजारों प्रतिक्रियाएं मिलीं। जून में USTR ने पाया कि यह मामला सेक्शन 301 के तहत कार्रवाई योग्य है, जिसके बाद यह अंतिम फैसला लिया गया।
भारत को कम शुल्क क्यों मिला
भारत को शुरू में 12.5 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन जून में भारत ने अपनी विदेशी व्यापार नीति में बदलाव कर फोर्स्ड लेबर से बने सामानों के आयात पर रोक लगा दी। इस कदम को अमेरिका ने सकारात्मक माना। नतीजतन भारत को 10 प्रतिशत वाले समूह में शामिल कर लिया गया। इससे भारत बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, इंडोनेशिया, मलेशिया और मैक्सिको जैसे देशों के बराबर आ गया है।
भारत के इस फैसले को USTR ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में उल्लेखनीय सुधार बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारत को कुछ प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बेहतर स्थिति में रखता है, खासकर उन देशों के मुकाबले जिन्हें 12.5 प्रतिशत का शुल्क झेलना पड़ रहा है।
10 प्रतिशत टैरिफ वाले देशों की सूची
USTR ने जिन देशों पर 10 प्रतिशत का शुल्क लगाया है उनमें भारत के अलावा निम्नलिखित देश शामिल हैं:
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अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, कनाडा, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास, इंडोनेशिया, जॉर्डन, मलेशिया, मैक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और यूनाइटेड किंगडम (UK)।
ये देश या तो फोर्स्ड लेबर आयात पर रोक लगा चुके हैं या आंशिक व्यवस्था लागू की है या पारस्परिक व्यापार समझौते के तहत प्रतिबद्धता जताई है। इन देशों से आने वाले ज्यादातर सामानों पर मौजूदा MFN (Most Favored Nation) शुल्क के अलावा अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ लगेगा।
12.5 प्रतिशत शुल्क वाले देश और खास प्रावधान
बाकी जांच में शामिल देशों पर 12.5 प्रतिशत का टैरिफ लगाया गया है। इनमें चीन, रूस, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस, तुर्की, वियतनाम और सऊदी अरब जैसे देश शामिल हैं।
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यूरोपीय संघ और ताइवान: इनके लिए थोड़ा अलग नियम बनाया गया है। अगर किसी उत्पाद पर पहले से ही 10 प्रतिशत या ज्यादा MFN शुल्क लग रहा है तो अतिरिक्त सेक्शन 301 शुल्क शून्य हो जाएगा।
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जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड: इनके लिए यह सीमा 12.5 प्रतिशत रखी गई है।
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छूट: कुछ कच्चे माल और ऐसे उत्पाद जो अमेरिका में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें छूट दी गई है। स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स पर पहले से सेक्शन 232 के तहत ऊंचे शुल्क जारी रहेंगे।
भारतीय निर्यात पर क्या असर पड़ेगा
भारतीय निर्यातकों के लिए कुल शुल्क का बोझ पहले जितना ही बना रहेगा क्योंकि नया 10 प्रतिशत शुल्क पुराने अस्थायी टैरिफ की जगह ले रहा है।
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प्रभावित क्षेत्र: इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल, गारमेंट, केमिकल, मशीनरी, प्लास्टिक, लेदर प्रोडक्ट, जेम्स एंड ज्वेलरी और फर्नीचर जैसे उत्पादों पर MFN के अलावा 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगेगा। ये उत्पाद भारत के अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा हैं।
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प्रतिस्पर्धा: हालांकि कुछ प्रतिस्पर्धी देशों को टेक्सटाइल में ‘टैरिफ रेट कोटा’ जैसी सुविधाएं मिली हैं जो भारत को नहीं मिलीं। इससे कुछ क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
जांच प्रक्रिया और अमेरिकी अधिकारी का बयान
USTR की जांच 12 मार्च 2026 को शुरू हुई। अप्रैल में सार्वजनिक सुनवाई हुई (US Tariffs) और जून में प्रारंभिक नतीजे आए। जुलाई में दोबारा सुनवाई के दौरान सौ से ज्यादा लोगों ने गवाही दी।
जेमिसन ग्रीयर ने कहा कि यह फैसला मानवाधिकार उल्लंघन और व्यापार को बिगाड़ने वाली प्रथा दोनों को सुधारने की दिशा में है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ व्यापार संरक्षण नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर मजदूरों की स्थिति सुधारने का प्रयास है।
US Tariffs: भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और आगे की राह
यह फैसला उस समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत चल रही है। भारतीय पक्ष ने पहले भी फोर्स्ड लेबर के आरोपों को खारिज किया था, लेकिन विदेशी व्यापार नीति में समय रहते बदलाव करके भारत ने अपेक्षाकृत कम शुल्क दर हासिल कर ली।
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