Petrol-Diesel Price 5 June 2026: देशभर में लगातार दूसरे दिन स्थिर भाव, उपभोक्ताओं को राहत लेकिन वैश्विक अनिश्चितता बनी हुई
देशभर में लगातार दूसरे दिन कोई बदलाव नहीं, उपभोक्ताओं को राहत लेकिन वैश्विक अनिश्चितता बरकरार
Petrol-Diesel Price 5 June 2026: शुक्रवार को देश के तेल बाजार से आम उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। देश की प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने आज सुबह छह बजे जारी की गई नई मूल्य सूची में पिछले दिन की दरों को ही पूरी तरह से बरकरार रखा है। इस स्थिरता के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर टिका रहा, जबकि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर के पुराने भाव पर ही बिक रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र के बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में लगातार जारी उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय तेल कंपनियों ने घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखा है। हालांकि, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की शुरुआत, देश में ईंधन की बदलती मांग और वैश्विक घटनाक्रमों को देखते हुए आने वाले दिनों में इन कीमतों में दोबारा हलचल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं आज पूरे देश में ईंधन की वास्तविक स्थिति, प्रमुख शहरों के भाव और आम उपभोक्ताओं की जेब पर इसके पड़ रहे प्रभावों का पूरा विश्लेषण।
आज के पेट्रोल-डीजल भाव: देश के प्रमुख महानगरों और बड़े शहरों का हाल
भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें रोजाना सुबह छह बजे देश की तेल कंपनियों द्वारा संशोधित और अपडेट की जाती हैं। 5 जून 2026 को देश के अधिकांश राज्यों और प्रमुख शहरों में ईंधन की दरें पूरी तरह से स्थिर दर्ज की गईं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-एनसीआर) के विभिन्न इलाकों में स्थानीय वैट और ट्रांसपोर्टेशन शुल्कों के अंतर के कारण पेट्रोल की कीमत 101.90 रुपये से लेकर 102.85 रुपये प्रति लीटर के बीच बनी हुई है।
चारों प्रमुख महानगरों की बात करें तो मुंबई में पेट्रोल की कीमत हमेशा की तरह सबसे ऊंचे स्तर पर रही, जहां उपभोक्ताओं को एक लीटर पेट्रोल के लिए 111.21 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। वहीं, पूर्वी भारत के मुख्य केंद्र कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये प्रति लीटर और दक्षिण के प्रमुख महानगर चेन्नई में 107.74 रुपये प्रति लीटर के भाव पर चल रहा है। इसके अतिरिक्त, देश के प्रमुख आईटी हब बेंगलुरु में पेट्रोल 110.93 रुपये जबकि हैदराबाद में यह 115.62 रुपये प्रति लीटर के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल की कीमत करीब 102.04 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है, जबकि जयपुर और पटना जैसे शहरों में पेट्रोल का भाव 112 रुपये से 114 रुपये प्रति लीटर के आसपास बना हुआ है। राहत की बात यह है कि देश भर में डीजल की कीमतें पेट्रोल के मुकाबले औसतन 10 से 15 रुपये प्रति लीटर तक सस्ती बनी हुई हैं, जो मुख्य रूप से देश के परिवहन, माल ढुलाई और कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ा संबल है।
अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल बाजार की हलचल और भारत का आयात गणित
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर नजर डालें तो इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमत 92 डॉलर से लेकर 97 डॉलर प्रति बैरल के बीच झूल रही है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी लगातार कूटनीतिक तनाव, ओपेक प्लस (OPEC+) देशों द्वारा कच्चे तेल की उत्पादन कटौती की जारी नीति और वैश्विक स्तर पर मांग व आपूर्ति के बीच बनते-बिगड़ते संतुलन के कारण हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चूंकि भारत अपनी कुल घरेलू तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की विनिमय दर सीधे तौर पर देश की घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित करती हैं।
पिछले एक सप्ताह के भीतर वैश्विक स्तर पर क्रूड की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत तक का उछाल देखा गया है, लेकिन केंद्र सरकार और घरेलू तेल कंपनियों ने अपने मजबूत इन्वेंट्री प्रबंधन, रणनीतिक भंडार और विशेष सब्सिडी व्यवस्था के जरिए इस बढ़े हुए खर्च का सीधा बोझ फिलहाल देश के आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद भारतीय रिटेल मार्केट में कीमतें नियंत्रण में बनी हुई हैं।
आम उपभोक्ताओं, मध्यम वर्ग और देश की अर्थव्यवस्था पर ऊंचे भावों का प्रभाव
भले ही आज पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहकर आम जनता को एक तात्कालिक मानसिक राहत दे रही हैं, लेकिन हकीकत यह है कि लंबे समय से ईंधन के दामों का इतने ऊंचे स्तर पर बने रहना देश की समग्र अर्थव्यवस्था और आम लोगों के मासिक बजट पर अदृश्य चोट कर रहा है। डीजल की ऊंची कीमतों के कारण देश के भीतर लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई की लागत लगातार बढ़ी हुई है, जिसका सीधा असर रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली चीजों जैसे हरी सब्जियों, फलों, दूध और अन्य आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है और बाजार में महंगाई का दबाव बना हुआ है।
ट्रांसपोर्ट क्षेत्र से जुड़े संघों का कहना है कि वर्तमान में डीजल की कीमतें अभी उनके व्यावसायिक मार्जिन के लिए किसी तरह प्रबंधनीय हैं, लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर कंपनियों ने आगे कीमतों में और बढ़ोतरी की, तो देश में माल ढुलाई का किराया बढ़ाना उनकी मजबूरी हो जाएगा। इसके अलावा, देश के ग्रामीण इलाकों के किसानों के लिए डीजल एक बेहद महत्वपूर्ण कृषि इनपुट है, क्योंकि जून के इस महीने में सिंचाई के पंप, ट्रैक्टर और थ्रेशर जैसी भारी कृषि मशीनरी पूरी तरह से इसी ईंधन पर निर्भर करती हैं। शहरी क्षेत्रों की बात करें तो मध्यम वर्गीय दोपहिया और चारपहिया वाहन मालिकों को हर महीने अपने पेट्रोल खर्च पर एक बड़ी राशि आवंटित करनी पड़ रही है। एक औसत मध्यम वर्गीय परिवार जो अपने दैनिक दफ्तर और पारिवारिक कार्यों के लिए महीने में 80 से 100 लीटर पेट्रोल का इस्तेमाल करता है, उस पर हर महीने केवल ईंधन के मद में 10,000 रुपये से अधिक का सीधा आर्थिक बोझ आ रहा है, जो उनके बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और बचत के घरेलू बजट को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है।
ईंधन की टैक्स संरचना और इसे जीएसटी के दायरे में लाने की मांग
भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों का एक बहुत बड़ा और मुख्य हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा लगाई जाने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और अलग-अलग राज्य सरकारों द्वारा वसूले जाने वाले वैट (VAT यानी वैल्यू ऐडेड टैक्स) से मिलकर तय होता है। यही मुख्य कारण है कि देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल के भावों में एक बड़ा अंतर दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य उत्तर भारतीय राज्यों में राज्य सरकार द्वारा लगाया जाने वाला वैट अपेक्षाकृत कम है, जिसके कारण वहां पेट्रोल 102 रुपये के आसपास मिल जाता है। इसके विपरीत, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और देश के दक्षिणी राज्यों में टैक्स की दरें काफी ज्यादा होने के कारण कीमतें 111 रुपये से लेकर 115 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाती हैं।
केंद्र सरकार ने पिछले वर्षों में आम जनता को बड़ी महंगाई से बचाने के लिए अपनी एक्साइज ड्यूटी में कुछ महत्वपूर्ण कटौतियां की थीं, जिससे बाजार को एक बड़ी स्थिरता मिली थी। देश के कई बड़े अर्थशास्त्रियों और वित्तीय विशेषज्ञों का लगातार यह सुझाव रहा है कि यदि देश की कर प्रणाली में सुधार करते हुए पेट्रोलियम उत्पादों और ईंधन को पूरी तरह से वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी (GST) के दायरे में ला दिया जाए, तो पूरे देश में ईंधन की कीमतें न केवल एक समान और अत्यधिक पारदर्शी हो जाएंगी, बल्कि टैक्स की अधिकतम सीमा तय होने से आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की मौजूदा कीमतों से पूरे 15 से 20 रुपये प्रति लीटर तक की एक बहुत बड़ी और स्थाई राहत मिल सकती है।
भविष्य की संभावनाएं: बायोफ्यूल, हाइड्रोजन मिशन और हरित विकल्पों का उदय
प्रमुख वैश्विक तेल बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि साल 2026 के बाकी बचे हुए महीनों में भी अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमतें 85 डॉलर से लेकर 105 डॉलर प्रति बैरल के एक सीमित दायरे के भीतर ही बनी रह सकती हैं। दक्षिण भारत में मॉनसून की समय पर हुई इस अच्छी शुरुआत के कारण आगामी हफ्तों में कृषि और परिवहन क्षेत्रों में ईंधन की मांग में कुछ समय के लिए प्राकृतिक कमी आ सकती है, जो घरेलू स्तर पर कीमतों को और अधिक नियंत्रण में रखने में मददगार साबित होगी।
दीर्घकालिक परिदृश्य को देखें तो वैश्विक और घरेलू स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता, सीएनजी (CNG) इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे अत्याधुनिक विकल्प आने वाले समय में जीवाश्म ईंधन यानी पेट्रोल-डीजल पर देश की पारंपरिक निर्भरता को काफी हद तक कम कर देंगे। भारत सरकार भी इस समय अपने राष्ट्रीय बायोफ्यूल मिशन (जिसके तहत पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य है) और नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन पर युद्ध स्तर पर काम कर रही है। ये सभी हरित और नवीकरणीय प्रयास भविष्य में न केवल भारत के विशाल विदेशी मुद्रा तेल आयात बिल को हजारों करोड़ रुपये तक घटा देंगे, बल्कि देश के बड़े शहरों को प्रदूषण से मुक्त करने में भी एक युगांतरकारी भूमिका निभाएंगे।
देश के प्रमुख शहरों की विस्तृत मूल्य सूची (5 जून 2026)
दिल्ली में पेट्रोल का भाव 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल का भाव 95.20 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। मुंबई में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये और डीजल की कीमत 97.83 रुपये बनी हुई है। कोलकाता में पेट्रोल उपभोक्ताओं को 113.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है। चेन्नई में पेट्रोल की दर 107.74 रुपये प्रति लीटर और डीजल की दर 99.55 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है।
बेंगलुरु में पेट्रोल का खुदरा मूल्य 110.93 रुपये प्रति लीटर और डीजल का मूल्य 98.80 रुपये प्रति लीटर चल रहा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल 102.04 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.50 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है। राजस्थान के जयपुर में पेट्रोल की कीमत 113.46 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 97.78 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। हैदराबाद में पेट्रोल का भाव 115.62 रुपये प्रति लीटर और डीजल का भाव 103.82 रुपये प्रति लीटर के उच्चतम स्तर पर बना हुआ है, जबकि बिहार की राजधानी पटना में पेट्रोल 114.20 रुपये प्रति लीटर और डीजल 98.90 रुपये प्रति लीटर के भाव पर स्थिर है।
निष्कर्ष
समग्र रूप से देखा जाए तो 5 जून 2026 को देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार स्थिरता बनी रहना देश के मध्यम वर्ग, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारिक जगत के लिए एक बेहद सुखद और राहत भरी खबर है। हालांकि, वैश्विक बाजारों की अनिश्चितता, खाड़ी देशों के बदलते हालात और डॉलर के मुकाबले रुपए के उतार-चढ़ाव को देखते हुए इस खुदरा मूल्य स्थिरता के बहुत लंबे समय तक टिके रहने की उम्मीद कम ही नजर आती है। ऐसी स्थिति में आम नागरिकों को अपने व्यक्तिगत स्तर पर ईंधन दक्षता (Fuel Efficiency) को बढ़ावा देने वाले व्यावहारिक उपायों जैसे नियमित वाहन सर्विसिंग, सही टायर प्रेशर बनाए रखने, कार-पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन व मेट्रो के अधिकतम उपयोग को अपनी दैनिक आदत का हिस्सा बनाना चाहिए। सरकार की पर्यावरण अनुकूल और संतुलित आर्थिक नीतियां ही आने वाले समय में देश को ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाएंगी।
Read More Here