ITR Filing 2026: क्या 31 जुलाई की आखिरी तारीख चूकने पर बदल सकते हैं फॉर्म? जानिए इनकम टैक्स रिटर्न से जुड़े जरूरी नियम
ITR Filing 2026: ITR डेडलाइन छूटने पर ITR-3 चुनना सही? जानें टैक्स एक्सपर्ट्स की चेतावनी
ITR Filing 2026: देशभर के करदाताओं के बीच इन दिनों वित्त वर्ष के लिए इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने की हलचल तेज है। ज्यादातर व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख इकतीस जुलाई दो हजार छब्बीस तय की गई है। इस बीच बहुत से लोगों के जेहन में एक बड़ा पशोपेश यह चल रहा है कि यदि किसी वजह से उनकी यह समयसीमा निकल जाती है, तो क्या वे बाद की डेडलाइन वाले ITR-3 फॉर्म का रुख कर सकते हैं? कर विशेषज्ञों ने इस पर अपनी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। उनका कहना है कि डेडलाइन का हवाला देकर गलत फॉर्म चुनना भारी पड़ सकता है क्योंकि रिटर्न भरने का पैमाना केवल और केवल आपकी कमाई का जरिया होता है, न कि कोई तारीख।
ITR Filing 2026: गलत फॉर्म चुनने पर आ सकती है आफत
टैक्स2विन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सह-संस्थापक सीए अभिषेक सोनी के मुताबिक, सिर्फ इस आधार पर ITR-3 का चयन नहीं किया जा सकता कि उसकी अंतिम तिथि आगे होती है। यदि कोई करदाता सामान्य रूप से ITR-1 या ITR-2 के दायरे में आता है, तो उसे हर हाल में अपनी पात्रता के अनुसार वही फॉर्म चुनना होगा।
यदि तय तारीख तक रिटर्न दाखिल नहीं भी हो पाता है, तब भी ITR-3 का विकल्प अपनाने की अनुमति नहीं मिलती। अगर कोई व्यक्ति इस नियम को नजरअंदाज करके अपनी आय के स्रोत से मेल न खाने वाला गलत फॉर्म भर देता है, तो आयकर विभाग उसके रिटर्न को ‘डिफेक्टिव रिटर्न’ यानी त्रुटिपूर्ण श्रेणी में डाल सकता है।
किस आय पर कौन सा फॉर्म है लागू
फिनकॉर्पिट कंसल्टिंग के एसोसिएट डायरेक्टर और जाने-माने सीए गौरव सिंह परमार समझाते हैं कि ITR फॉर्म का ताना-बाना पूरी तरह से आपकी सालाना कमाई के जरिया यानी सोर्स पर बुना होता है। इसे इस तरह समझा जा सकता है:
- यदि आपकी आमदनी का मुख्य जरिया सैलरी, पेंशन, बैंक ब्याज, कैपिटल गेन या फिर केवल एक मकान से होने वाली आय है, तो आपके लिए ITR-1 या ITR-2 ही वैध फॉर्म हैं।
- यदि आप किसी प्रकार के कारोबार या किसी स्वतंत्र पेशे यानी बिजनेस या प्रोफेशन से कमाई कर रहे हैं, तभी आपके लिए ITR-3 फॉर्म की पात्रता बनती है।
यानी अगर आपकी कमाई केवल वेतन या बैंक ब्याज से है, तो आप केवल इस लालच में ITR-3 नहीं चुन सकते कि उसकी डेडलाइन लंबी है। फॉर्म का चयन हमेशा कमाई के दायरे के हिसाब से ही होना चाहिए।
ITR Filing 2026: डेडलाइन छूट जाए तो क्या है अगला कदम
यदि कोई व्यक्तिगत करदाता इकतीस जुलाई की समयसीमा के भीतर अपना रिटर्न जमा करने से चूक जाता है, तो उसे निराश होने की जरूरत नहीं है। आयकर कानून की धारा 139(4) के तहत ऐसे लोगों के लिए इकतीस दिसंबर दो हजार छब्बीस तक ‘बिलेटेड रिटर्न’ यानी देर से रिटर्न दाखिल करने का कानूनी प्रावधान मौजूद है।
हालांकि, तय वक्त के बाद रिटर्न भरने पर कुछ वित्तीय हानियों और अतिरिक्त शुल्कों का सामना करना पड़ सकता है, जिनके बारे में हर करदाता को पता होना चाहिए:
- समय सीमा निकलने के बाद रिटर्न भरने पर पांच हजार रुपये तक की लेट फीस चुकानी पड़ सकती है।
- यदि किसी करदाता की कुल आय पांच लाख रुपये से कम है, तो इस स्थिति में लेट फीस की यह राशि घटकर एक हजार रुपये रह जाती है।
- बकाया कर राशि पर नियमानुसार ब्याज का भुगतान भी करना पड़ सकता है।
- कुछ विशेष परिस्थितियों में टैक्स लॉस को आगामी वर्षों में कैरी फॉरवर्ड करने का जो लाभ मिलता है, वह भी हाथ से निकल सकता है।
ITR Filing 2026: टैक्स एक्सपर्ट्स की दो टूक सलाह
विशेषज्ञों का साफ मानना है कि ITR-3 की बाद की तारीख को कभी भी सामान्य रिटर्न में देरी छिपाने का जरिया नहीं बनाना चाहिए। यह विशेष फॉर्म केवल उन्हीं करदाताओं के लिए डिजाइन किया गया है जो व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े हैं।
इसलिए, फाइलिंग प्रक्रिया पूरी करने से पहले अपने स्रोतों की जांच भली-भांति कर लें। यदि अंतिम तारीख निकल भी जाए, तो हड़बड़ी में गलत फॉर्म चुनने के बजाय अपने पात्र फॉर्म के जरिए ही नियमों का पालन करते हुए बिलेटेड रिटर्न दाखिल करें, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की कानूनी या तकनीकी उलझन से बचा जा सके।
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