Monsoon Tips: मानसून में फ्रिज में जम रही नमी और खराब हो रहा खाना? अपनाएं ये आसान टिप्स और बचाएं अपना बजट
Monsoon Tips: फ्रिज में नमी से खाना हो रहा खराब? अपनाएं ये आसान टिप्स और बचाएं पैसे
Monsoon Tips: आसमान में घिरे काले बादलों और झमाझम बारिश के बीच मौसम सुहाना जरूर हो जाता है, लेकिन यह अपने साथ रसोई घर के सबसे अहम उपकरण यानी रेफ्रिजरेटर के लिए कई बड़ी मुसीबतें भी लेकर आता है। हवा में फैली भारी नमी बिना किसी आहट के चुपचाप फ्रिज के अंदर तक सेंध लगा लेती है।
घरों में ज्यादातर लोगों को इस बात का अहसास तब तक बिल्कुल नहीं होता जब तक खाने-पीने की चीजें समय से पहले सड़ने नहीं लगतीं या shelves पर पानी की बूंदें जमा होने की शिकायत सामने नहीं आती। मानसून के इस मौसम में यदि आपके भी फ्रिज से सीलन भरी अजीब सी बदबू आने लगी है या फ्रीजर के भीतर बर्फ बहुत तेजी से जम रही है, तो समझ लीजिए कि आपके अप्लायंस को खास देखभाल की सख्त जरूरत है।
Monsoon Tips: क्यों बढ़ जाती है बारिश के दिनों में फ्रिज के भीतर नमी?
मौसम का मि बदलते ही नमी का स्तर यानी ह्यूमिडिटी काफी ऊपर चली जाती है। जब हम बार-बार फ्रिज का दरवाजा खोलते हैं, तो रसोई की गर्म और नम हवा तुरंत अंदर घुस जाती है। ठंडी सतहों के संपर्क में आते ही यह हवा पानी की बूंदों में तब्दील हो जाती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में कंडेनसेशन कहा जाता है।
जानकारों का मानना है कि इस मौसम में केवल तेज कूलिंग से काम नहीं चलता, बल्कि सही मायनों में मॉइश्चर मैनेजमेंट पर पूरा ध्यान देना होता है। कई बार लोग सोचते हैं कि फ्रिज के अंदर या बाहर पानी जमा होना किसी बड़ी खराबी या प्रोडक्ट डिफेक्ट का संकेत है, जबकि असलियत में यह सिर्फ अत्यधिक आद्र्रता का एक स्वाभाविक रिएक्शन होता है, जिसे थोड़ी सी सावधानी बरतकर आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
सही तापमान सेट करना है सबसे पहला और जरूरी कदम
अक्सर लोग साल भर अपने फ्रिज का तापमान एक ही पर सेट रखते हैं, जो मौसम बदलने पर गलत साबित होता है। इस मौसम में बैक्टीरिया की रफ्तार धीमी करने और अंदर अतिरिक्त नमी को पनपने से रोकने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह पर तुरंत गौर करना चाहिए।
रेफ्रिजरेटर का तापमान दो डिग्री सेल्सियस से चार डिग्री सेल्सियस के बीच रखना सबसे बेहतर माना जाता है, जिसमें तीन डिग्री सेल्सियस का विकल्प सबसे उत्तम रहता है। वहीं दूसरी तरफ, फ्रीजर का तापमान माइनस अट्ठारह डिग्री से माइनस उन्नीस डिग्री सेल्सियस के बीच सेट किया जाना चाहिए। यदि आपके आधुनिक अप्लायंस में ऑटो-एडजस्ट करने वाला सीजनल या स्मार्ट-कूलिंग मोड दिया गया है, तो इस सुविधा को तुरंत ऑन कर देना चाहिए ताकि वह खुद ब खुद मौसम के हिसाब से ठंडक को संतुलित कर सके।
एयर सर्कुलेशन और वेंटिलेशन का रखें पूरा ख्याल
अक्सर लोग फ्रिज को दीवार से बिल्कुल सटाकर या किसी तंग कोने में फिट कर देते हैं, जिससे हवा का बहाव रुक जाता है। मानसून के दिनों में यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। फ्रिज और दीवार के बीच कम से कम चार से छह इंच की पर्याप्त दूरी होना बहुत जरूरी है ताकि कंप्रेसर और कूलिंग कॉइल्स बिना किसी अतिरिक्त बिजली की खपत के अंदर की गर्मी को आसानी से बाहर निकाल सकें।
इसके अलावा, फ्रिज के भीतर भी हर शेल्फ को ठूंस-ठूंसकर सामान से भरने की आदत से बचना चाहिए। यदि सामान जरूरत से ज्यादा ठूंस दिया जाएगा, तो ठंडी हवा का प्रवाह बाधित हो जाएगा। खाद्य पदार्थों के डिब्बों के बीच थोड़ा खाली स्पेस छोड़ना चाहिए और किसी भी तरह के प्लास्टिक या सजावटी शेल्फ लाइनर्स का उपयोग करने से बचना चाहिए क्योंकि वे हवा के रास्ते में रुकावट बनते हैं।
Monsoon Tips: नमी से बचाव के लिए अपनाएं ये स्मार्ट स्टोरेज तरीके
बरसात के दिनों में रसोई का सामान बहुत जल्दी खराब होता है, इसलिए स्टोरेज के नियमों में थोड़ा बदलाव लाना जरूरी हो जाता है। कभी भी गर्म या गुनगुने खाने को सीधे फ्रिज के अंदर न रखें, बल्कि उसे पहले पूरी तरह से सामान्य तापमान पर ठंडा होने दें। इसके अलावा, बर्तनों को हमेशा अच्छी तरह से ढककर या एयरटाइट सील करके ही अंदर रखें। बाजार से लाई गई हरी सब्जियों और फलों को अच्छी तरह धोने के बाद पहले पूरी तरह सुखा लें और उसके बाद ही स्टोर करें। नमी के असर से बचाने के लिए फल और सब्जियों को मेश बैग, सूती कपड़ों या पेपर टॉवल में लपेटकर रखना ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।
Monsoon Tips: दरवाजे का बार-बार खुलना और गैस्केट की सफाई
बार-बार फ्रिज का दरवाजा खोलने की आदत से अंदर नमी तेजी से बढ़ती है। दरवाजा खोलने से पहले यह तय कर लें कि आपको क्या सामान निकालना है और काम पूरा होते ही दरवाजा तुरंत बंद कर दें। यह भी सुनिश्चित करें कि दरवाजे की रबर यानी गैस्केट पूरी तरह से फिट बैठ रही है या नहीं। मानसून के दौरान नमी के कारण रबर की सील पर फफूंद या बैक्टीरिया लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है, इसलिए हर हफ्ते इसे किसी साफ और सूखे कपड़े से पोंछना जरूरी है।
जिन घरों में डायरेक्ट-कूल फ्रिज का इस्तेमाल होता है, वहां बर्फ बहुत जल्दी जम जाती है, इसलिए उन्हें समय-समय पर मैनुअल तरीके से डीफ्रॉस्ट करना पड़ता है। साथ ही, बिजली के बार-बार होने वाले उतार-चढ़ाव से अपने कीमती अप्लायंस को सुरक्षित रखने के लिए एक अच्छे वोल्टेज स्टेबलाइजर या सर्ज प्रोटेक्टर का उपयोग करना भी समझदारी भरा कदम है। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप न केवल अपने फ्रिज की उम्र बढ़ा सकते हैं, बल्कि पूरे बरसात के सीजन में अपने खाने-पीने की चीजों को बिल्कुल ताजा और सुरक्षित रख सकते हैं।
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