Ayodhya Ram Temple: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की आज बड़ी बैठक, नया महासचिव नियुक्त हो सकता है, सीईओ चयन पर भी चर्चा
नए महासचिव, ट्रस्टियों और सीईओ चयन प्रक्रिया पर हो सकता है बड़ा फैसला
Ayodhya Ram Temple: श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आज एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है। इस बैठक में ट्रस्ट को नया महासचिव मिलने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही नए ट्रस्टियों के नामों की औपचारिक घोषणा और मंदिर प्रबंधन को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए विभिन्न समितियों के गठन पर भी अहम फैसले लिए जा सकते हैं। चढ़ावा चोरी का मामला उजागर होने के बाद ट्रस्ट में कई महत्वपूर्ण पद रिक्त हो गए थे। ऐसे में आज की बैठक को ट्रस्ट के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने और व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने की दिशा में बेहद खास माना जा रहा है।
बैठक का स्थान और समय
आज ट्रस्ट की दो चरण में बैठकें तय की गई हैं। पहली बैठक दोपहर तीन बजे और दूसरी बैठक चार बजे कब मठ मणिराम छावनी में आयोजित होगी। इससे पूर्व की बैठक राम मंदिर परिसर में आयोजित की गई थी। आज की इस बैठक में अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास सहित ट्रस्ट के सभी स्थाई सदस्य उपस्थित रहेंगे। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद यह ट्रस्ट की दूसरी बड़ी बैठक है, जिसके चलते इसके फैसलों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता लाने और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। आज की बैठक में इन्हीं प्राथमिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
नया महासचिव नियुक्त होने की संभावना
ट्रस्ट को आज अपना नया स्थाई महासचिव मिल सकता है। चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद पूर्व महासचिव चंपत राय ने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिससे यह मुख्य पद खाली हो गया था। इसके बाद छह जुलाई को हुई बैठक में कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब आज की बैठक में सर्वसम्मति से स्थाई महासचिव के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है।
महासचिव का पद ट्रस्ट के दैनिक संचालन के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की व्यवस्था, चढ़ावे का पूरा हिसाब-किताब और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं महासचिव के मार्गदर्शन में ही संचालित होती हैं।
नए ट्रस्टियों के नामों की घोषणा संभव
वर्तमान में ट्रस्ट के तीन पद रिक्त चल रहे हैं। अयोध्या राज परिवार के राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा का पिछले वर्ष निधन हो गया था। इसके अलावा पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद दो अन्य सीटें खाली हुई हैं। ट्रस्ट डीड के नियमों के अनुसार, ट्रस्ट बैठक बुलाकर बहुमत के प्रस्ताव से नए सदस्यों का चयन कर सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के पुत्र यतींद्र मिश्रा को सदस्य बनाए जाने की पूरी संभावना है। वहीं निर्मोही अखाड़े के लिए आरक्षित सीट पर वर्तमान में महंत दीनेन्द्र दास हैं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
समितियों के गठन पर फैसला
मंदिर के रोजाना के कार्यों को व्यवस्थित करने के लिए कई विशेष समितियों का गठन किया जा सकता है। इनमें मुख्य रूप से:
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वित्त समिति और चढ़ावा गिनती समिति
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पूजा व्यवस्था समिति
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दर्शन पास और सुरक्षा समिति
इन समितियों के बनने से जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन होगा और विशेषज्ञता के साथ प्रबंधन का कार्य आगे बढ़ेगा। चढ़ावा चोरी की घटना के बाद से ही चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, जिसे अब इन समितियों के माध्यम से और मजबूती मिलेगी।
सीईओ चयन प्रक्रिया और भूमिका पर चर्चा
राम मंदिर के नए सीईओ (Chief Executive Officer) पद के लिए 5,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। चयन समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवरे शामिल हैं। यह समिति आवेदनों की स्क्रूटनी कर योग्य उम्मीदवारों का साक्षात्कार लेगी और अंत में तीन नाम ट्रस्ट के समक्ष रखेगी।
उम्मीद जताई जा रही है कि 15 अगस्त तक सीईओ के चयन की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाएगी। आज की बैठक में सीईओ की भूमिका, अधिकारों और जिम्मेदारियों पर रूपरेखा तैयार की जाएगी ताकि बड़े मंदिर परिसर का प्रबंधन आधुनिक और पेशेवर तरीके से किया जा सके।
चढ़ावा चोरी मामले का संदर्भ
चढ़ावा चोरी की घटना के बाद से ही ट्रस्ट में कई बड़े संगठनात्मक फेरबदल हुए हैं। हालांकि इस मामले में एसआईटी जांच के बाद अब विषय सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है, इसलिए आज की बैठक में एसआईटी रिपोर्ट पर कोई चर्चा नहीं की जाएगी।
ट्रस्ट का मुख्य ध्येय ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना और श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना है। इसके लिए सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता के नियमों को बेहद सख्त बनाया जा रहा है।
ट्रस्ट की संरचना और महत्व
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कुल 11 स्थाई सदस्यों का प्रावधान है, जिनमें से एक सीट निर्मोही अखाड़े के लिए आरक्षित है। मंदिर के निर्माण से लेकर इसके दैनिक संचालन और देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधाओं का पूरा दायित्व इसी ट्रस्ट पर है।
Ayodhya Ram Temple: आगे की राह
आज होने वाले निर्णयों से ट्रस्ट के नए प्रशासनिक ढांचे की स्पष्ट तस्वीर सामने आ जाएगी। नए महासचिव, नए ट्रस्टियों और पेशेवर समितियों के आने से कामकाज में गति और स्पष्टता आएगी। ट्रस्ट का अंतिम लक्ष्य राम मंदिर को विश्व के सबसे सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल तीर्थ स्थलों के रूप में स्थापित करना है।
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