Para Commando Ajay Kumar: हथनीकुंड बैराज हादसे में 26 वर्षीय पैरा कमांडो नायक अजय कुमार शहीद, चार बहनों के थे इकलौते भाई

यमुना में अभ्यास के दौरान लापता पैरा कमांडो का शव मिला, सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

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Para Commando Ajay Kumar:  हरियाणा के यमुनानगर स्थित हथनीकुंड बैराज के समीप यमुना नदी के तेज बहाव में सामरिक सैन्य अभ्यास के दौरान लापता हुए भारतीय सेना की 1 पैराशूट बटालियन (स्पेशल फोर्सेज) के 26 वर्षीय जांबाज पैरा कमांडो नायक अजय कुमार कर्तव्य पथ पर सर्वोच्च बलिदान देते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए हैं। दो सितंबर को अभ्यास के दौरान मोटरबोट में आई तकनीकी खराबी के चलते नदी में डूबे नायक अजय कुमार की तलाश के लिए थलसेना, वायुसेना और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) द्वारा सघन संयुक्त तलाशी अभियान चलाया गया था। हादसे के कई घंटों बाद उनका पार्थिव शरीर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद के सीमावर्ती गांव में नदी से बरामद किया गया।

शुक्रवार को जम्मू संभाग के सीमावर्ती कस्बे अखनूर के रक्ख मुठी गांव में शहीद नायक अजय कुमार को पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अपने घर में चार बहनों के इकलौते भाई रहे अजय कुमार की शहादत की खबर ने परिवार ही नहीं, बल्कि समूचे क्षेत्र को गहरे शोक और गर्व के आंसुओं में डुबो दिया। सेना की पश्चिमी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह सहित सेना के शीर्ष अधिकारियों ने इस हादसे में नायक अजय कुमार और उनके साथी लांस नायक रोहित नारायण पाटिल के अदम्य साहस और बलिदान को नमन करते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की है।

Para Commando Ajay Kumar: हथनीकुंड बैराज पर अभ्यास के दौरान तकनीकी विफलता

यह दर्दनाक हादसा उस समय घटित हुआ जब भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 1 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) की एक टुकड़ी हथनीकुंड बैराज के पास यमुना नदी में जटिल जलीय युद्धक परिस्थितियों (Water Combat Operations) और आपातकालीन नदी पारगमन का कड़ा प्रशिक्षण ले रही थी। अभ्यास के दौरान जवानों को लेकर आगे बढ़ रही विशेष मोटरबोट में बीच धार में अचानक तकनीकी खराबी उत्पन्न हो गई।

पहाड़ों से आ रहे भारी पानी के कारण नदी का जलस्तर और प्रवाह काफी तीव्र था। बोट के अनियंत्रित होने और पलटने के कारण उस पर सवार सभी जवान उफनते पानी में गिर गए। अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में भी जवानों ने तैरकर खुद को सुरक्षित निकालने का भरसक प्रयास किया। इस दौरान कुछ जवान किनारे तक पहुंचने में सफल रहे, किंतु तेज भंवर और लहरों के वेग के कारण नायक अजय कुमार और लांस नायक रोहित नारायण पाटिल नदी के गहरे बहाव में लापता हो गए।

त्रिपक्षीय बचाव अभियान: सहारनपुर के पास 15 किलोमीटर दूर मिला पार्थिव शरीर

हादसे की सूचना मिलते ही सेना की स्थानीय टुकड़ियों, जिला प्रशासन, हरियाणा पुलिस और एसडीआरएफ की बचाव नौकाओं ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। अभियान की गंभीरता को देखते हुए भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों को भी हवाई निगरानी और सर्च मिशन में तैनात किया गया। नदी के तेज बहाव को देखते हुए खोज का दायरा बैराज से नीचे की ओर डाउनस्ट्रीम में विस्तृत किया गया।

करीब 30 घंटे से अधिक चले निरंतर तलाशी अभियान के बाद 2 सितंबर की रात लगभग आठ बजे हथनीकुंड बैराज से लगभग 15 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के बरथा कोरसी गांव के निकट यमुना में अजय कुमार का पार्थिव शरीर बरामद हुआ। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा नदी में मछली पकड़ने के लिए लगाए गए जाल में शव फंसा हुआ दिखाई दिया, जिसके बाद पुलिस और सेना की टीमों ने मौके पर पहुंचकर पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक बाहर निकाला। इसके उपरांत दूसरे लापता जांबाज, महाराष्ट्र निवासी लांस नायक रोहित नारायण पाटिल का पार्थिव शरीर भी खोज निकाला गया।

चार बहनों के इकलौते भाई का संघर्ष: मजदूरी कर पिता ने बेटे को बनाया था कमांडो

शहीद नायक अजय कुमार का जीवन संघर्ष, निष्ठा और असीम देशभक्ति की मिसाल रहा है। जम्मू जिले के अखनूर तहसील अंतर्गत रक्ख मुठी गांव के रहने वाले अजय कुमार अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और चार बहनों के अकेले भाई थे। उनके पिता बिट्टू राम ने दैनिक मजदूरी करके अत्यंत सीमित संसाधनों में परिवार का भरण-पोषण किया और बेटे को पढ़ा-लिखाकर इस योग्य बनाया कि वह देश की सबसे कठिन सैन्य शाखा में शामिल हो सके।

अजय ने अपनी प्रारंभिक और बारहवीं तक की पढ़ाई अखनूर के गवर्नमेंट बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की थी। बचपन से ही सेना की वर्दी पहनने का सपना संजोने वाले अजय ने कठिन शारीरिक और लिखित परीक्षाएं उत्तीर्ण कर भारतीय सेना में प्रवेश पाया। सेना में आने के बाद उन्होंने अपनी उत्कृष्ट शारीरिक क्षमता के दम पर स्पेशल फोर्सेज की अत्यंत दुष्कर 90-दिवसीय प्रोबेशन ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी की और 1 पैरा (एसएफ) में पैरा कमांडो के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।

1 सितंबर की वह आखिरी कॉल: पिता से पूछा था घर का हालचाल

शहीद अजय कुमार के पिता बिट्टू राम ने रुंधे गले से बताया कि हादसे से ठीक एक दिन पहले, 1 सितंबर को अजय ने उन्हें फोन किया था। उस समय वह प्रशिक्षण के बाद आराम कर रहे थे। फोन पर उन्होंने अपने पिता से उनकी तबीयत पूछी थी, घर में मां और बहनों का कुशलक्षेम लिया था और कहा था कि अभ्यास सत्र समाप्त होने के बाद वह जल्द ही छुट्टी लेकर घर आएंगे।

उस समय पिता को यह जरा भी अहसास नहीं था कि बेटे की यह आवाज वे आखिरी बार सुन रहे हैं। अगले ही दिन 2 सितंबर की दोपहर जब सैन्य अधिकारियों का फोन आया कि अजय अभ्यास के दौरान नदी में लापता हो गए हैं, तो पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। परिवार रातभर इस आस में प्रार्थना करता रहा कि उनका बेटा तैरकर कहीं किनारे लग गया होगा, किंतु रात में जब शहादत की पुष्टि हुई तो मां और बहनों की चीत्कार से पूरा गांव दहल उठा। अजय कुमार का विवाह लगभग चार वर्ष पूर्व हुआ था और उनकी अभी कोई संतान नहीं थी।

अखनूर की धरती पर गूंजे अमर रहे के जयकारे: नम आंखों से विदा हुआ लाल

शुक्रवार को जब तिरंगे में लिपटा शहीद नायक अजय कुमार का पार्थिव शरीर सेना के फूलों से सजे विशेष वाहन में उनके पैतृक गांव रक्ख मुठी पहुंचा, तो समूचा वातावरण ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, अजय तेरा नाम रहेगा’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा। सैकड़ों की संख्या में स्थानीय युवा तिरंगा हाथ में लेकर शहीद के काफिले के आगे दौड़ते नजर आए।

सेना के विशेष दस्ते ने हवा में गोलियां दागकर अपने वीर साथी को अंतिम सलामी दी। पारंपरिक सैन्य बिगुल की मातमी धुन के बीच शहीद के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी गई। पिता बिट्टू राम ने कंपकंपाते हाथों से बेटे को अंतिम विदाई दी, जबकि बहनों का विलाप देखकर वहां मौजूद हर सैनिक और ग्रामीण की आंखें नम हो गईं।

Para Commando Ajay Kumar: शांति काल में भी जान हथेली पर रखकर अभ्यास करते हैं स्पेशल फोर्सेज के जवान

हथनीकुंड बैराज में घटित इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर देशवासियों को यह अहसास कराया है कि स्पेशल फोर्सेज के कमांडो केवल युद्धक्षेत्र में ही नहीं, बल्कि शांतिकाल के दौरान होने वाले बेहद जोखिम भरे अभ्यासों में भी हर क्षण मौत से जूझते हैं। पैरा कमांडो को किसी भी भौगोलिक परिस्थिति—चाहे वह दलदली नदियां हों, बर्फ से ढकी ऊंची चोटियां हों या घने जंगल—में त्वरित सर्जिकल ऑपरेशन करने के लिए इसी प्रकार के जीवंत और कठिन अभ्यासों से गुजरना पड़ता है।

नायक अजय कुमार और लांस नायक रोहित नारायण पाटिल ने अपने देश और अपनी रेजिमेंट की गरिमा को अक्षुण्ण रखने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। 26 वर्ष की अल्पायु में देश सेवा करते हुए वीरगति पाने वाले नायक अजय कुमार का बलिदान भारतीय सेना के स्वर्णिम इतिहास और अखनूर की माटी में सदैव अमर रहेगा।

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