Kerala News: छात्र पर महिला शिक्षकों की तस्वीरें मॉर्फ कर फैलाने का आरोप, गिरफ्तार
महिला शिक्षकों और छात्राओं की तस्वीरों के दुरुपयोग का आरोप, पुलिस ने डिजिटल डिवाइस जब्त किए
Kerala News: केरल के प्रमुख शैक्षणिक हब माने जाने वाले कोच्चि शहर से साइबर अपराध, निजता हनन और महिलाओं की गरिमा को आहत करने वाला एक अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है। त्रिक्काकरा स्थित प्रतिष्ठित भरता माता कॉलेज के एक स्नातक छात्र को अपनी ही महिला प्राध्यापिकाओं (शिक्षिकाओं) और साथी छात्राओं की सामान्य तस्वीरों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आधुनिक एडिटिंग टूल्स के माध्यम से डिजिटल रूप से मॉर्फ कर अश्लील सामग्री में तब्दील करने तथा उन्हें सोशल मीडिया मंचों पर प्रसारित करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
कोच्चि सिटी पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए 20 वर्षीय आरोपी की पहचान एस. श्रीहरि के रूप में हुई है, जो इसी संस्थान में बीबीए लॉजिस्टिक्स (BBA Logistics) के द्वितीय वर्ष का नियमित छात्र है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से उसका मोबाइल फोन, लैपटॉप और एक्सटर्नल स्टोरेज ड्राइव जब्त कर ली है। शुरुआती तकनीकी पड़ताल में आरोपी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से सैकड़ों मॉर्फ की गई तस्वीरें और वीडियो बरामद हुए हैं। जांच एजेंसियां अब इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही हैं कि क्या यह कृत्य केवल व्यक्तिगत स्तर पर किया गया था या आरोपी किसी बड़े ऑनलाइन साइबर नेटवर्क का हिस्सा था, जहां ऐसी आपत्तिजनक सामग्री का वित्तीय लेन-देन या खरीद-फरोख्त की जाती थी।
Kerala News: कॉलेज मीडिया सेल और फोटोग्राफी के विशेषाधिकार का उठाया अनुचित फायदा
पुलिस की विस्तृत पूछताछ और कॉलेज से प्राप्त जानकारियों के अनुसार, आरोपी छात्र कॉलेज की विभिन्न सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों में अत्यंत सक्रिय था। वह एक प्रमुख छात्र संगठन की मीडिया सेल का संचालन करता था और कॉलेज के वार्षिक उत्सवों, सेमिनारों, खेल प्रतियोगिताओं व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आधिकारिक फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का दायित्व संभालता था।
इस दायित्व के चलते उसे संस्थान के डिजिटल आर्काइव, कैमरा मेमोरी कार्ड्स और कॉलेज की छात्राओं व महिला शिक्षकों की उच्च-रिजॉल्यूशन वाली मूल तस्वीरों तक सीधी और निर्बाध पहुंच प्राप्त थी। पुलिस एफआईआर के अनुसार, आरोपी वर्ष 2025 से ही कॉलेज के कार्यक्रमों के दौरान महिला शिक्षकों और छात्राओं की तस्वीरें संकलित कर रहा था। बाद में उसने इन सामान्य और गरिमापूर्ण तस्वीरों को एआई-आधारित डीपफेक और मॉर्फिंग टूल्स के जरिए आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री में रूपांतरित करना शुरू कर दिया।
टेलीग्राम और इंस्टाग्राम पर सीक्रेट ग्रुप्स: अश्लील नेटवर्क की पड़ताल में जुटी पुलिस
जांच से जुड़े वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी इन डिजिटल रूप से विकृत की गई तस्वीरों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स—विशेष रूप से टेलीग्राम (Telegram) और इंस्टाग्राम (Instagram) पर संचालित गुप्त समूहों में साझा कर रहा था। पुलिस को टेलीग्राम पर सक्रिय एक ऐसे समूह का सुराग मिला है जिसमें बड़ी संख्या में सदस्य जुड़े हुए थे।
इस टेलीग्राम समूह के भीतर पीड़ित छात्राओं और शिक्षिकाओं के नाम, कॉलेज की पहचान और उनके सोशल मीडिया हैंडल्स के साथ इन मॉर्फ्ड तस्वीरों को सर्कुलेट किया जा रहा था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान पुलिस ने कुछ पीड़ित शिक्षकों और छात्राओं को थाने बुलाकर आरोपी के फोन में मौजूद सामग्री का सत्यापन कराया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन-किन व्यक्तियों की पहचान और तस्वीरों का दुरुपयोग किया गया है। साइबर सेल अब इस समूह के एडमिन और अन्य सक्रिय सदस्यों के डिजिटल फुटप्रिंट्स, आईपी एड्रेस और चैट बैकअप को ट्रैक करने में जुटी है।
गर्ल्स हॉस्टल के कमरों की तस्वीरों से हड़कंप: निजता के गंभीर उल्लंघन की आशंका
मामले की जांच के दौरान उस समय और अधिक सनसनी फैल गई जब फॉरेंसिक टीम को आरोपी के मोबाइल फोन से कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल के आंतरिक परिसरों और कमरों से जुड़ी कुछ तस्वीरें भी बरामद हुईं। इस खुलासे के बाद हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं और उनके अभिभावकों में गहरा आक्रोश और असुरक्षा की भावना व्याप्त हो गई है।
पुलिस अब इस संवेदनशील पहलू की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने किसी अन्य छात्र या हॉस्टल कर्मचारी की मिलीभगत से इन निजी तस्वीरों को प्राप्त किया था, या फिर उसने किसी गोपनीय कैमरे या अनाधिकृत प्रवेश के जरिए इन्हें स्वयं खींचा था। यदि यह साबित होता है कि तस्वीरें सीधे गर्ल्स हॉस्टल के भीतर से बिना सहमति के ली गई हैं, तो मामले में आपराधिक अतिचार (Criminal Trespass) और ताक-झांक (Voyeurism) से जुड़ी अतिरिक्त कानूनी धाराएं भी जोड़ी जाएंगी।
1 सितंबर की रात हुआ भंडाफोड़, कॉलेज परिसर में छात्रों का उग्र प्रदर्शन
इस पूरे प्रकरण की जानकारी 1 सितंबर 2026 की देर रात उस समय सार्वजनिक हुई, जब कुछ छात्राओं ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अपनी विकृत तस्वीरें देखीं और तुरंत इसकी सूचना कॉलेज प्रबंधन व एंटी-रैगिंग सेल को दी। कॉलेज प्रशासन ने आंतरिक अनुशासन समिति की आपात बैठक बुलाकर प्रारंभिक जांच की और 2 सितंबर को औपचारिक रूप से स्थानीय पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इसके साथ ही कॉलेज ने आरोपी छात्र एस. श्रीहरि को तत्काल प्रभाव से संस्थान से निष्कासित कर दिया।
हालांकि, 2 और 3 सितंबर को कॉलेज परिसर में सामान्य छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों ने प्रबंधन के खिलाफ तीव्र विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप था कि शिकायत मिलने के बाद प्रबंधन ने त्वरित कानूनी कार्रवाई करने में शिथिलता बरती, जिससे आरोपी को परिसर से बाहर निकलने और अपने डिजिटल डेटा को आंशिक रूप से नष्ट करने का अवसर मिल गया। वहीं दूसरी ओर, कॉलेज प्रशासन ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि संस्थान ने बिना किसी पक्षपात के त्वरित कानूनी कदम उठाए और पुलिस को पूरी जांच सौंप दी।
क्या तस्वीरों की खरीद-फरोख्त से कमाए जा रहे थे पैसे? बैंक खातों की होगी फॉरेंसिक ऑडिट
कोच्चि पुलिस अब इस मामले को केवल सामान्य साइबर उत्पीड़न तक सीमित न रखकर एक संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के कोण से भी देख रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांचकर्ताओं को अंदेशा है कि टेलीग्राम समूहों में विशिष्ट तस्वीरों की मांग (On-demand Morphing) के बदले यूपीआई या क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भुगतान किया जाता था।
पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा आरोपी के बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट्स और यूपीआई लेन-देन के पिछले एक वर्ष के स्टेटमेंट्स की स्क्रूटनी कर रही है। यदि बैंक खातों में संदेहास्पद वित्तीय लेन-देन की पुष्टि होती है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि आरोपी डिजिटल ब्लैकमेलिंग और अश्लील सामग्री की व्यावसायिक बिक्री के एक बड़े सिंडिकेट से जुड़ा हुआ था।
बीएनएस और आईटी एक्ट की गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज
कोच्चि पुलिस ने पीड़िता की शिकायत और बरामद डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79 (किसी महिला की लज्जा का अनादर करने के इरादे से शब्द, इशारा या कृत्य), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करना) और केरल पुलिस अधिनियम की धारा 119(1)(b) (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले तरीके से तस्वीरें लेना या उनका प्रसार करना) के तहत प्राथमिकी पंजीकृत की है।
पुलिस ने आरोपी के सभी गैजेट्स को राज्य फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) को सौंप दिया है ताकि डिलीट किए गए डेटा, क्लाउड बैकअप और एन्क्रिप्टेड चैट फाइल्स को पूरी तरह रिकवर किया जा सके।
Kerala News: परिसरों में डिजिटल सुरक्षा और एआई के दुरुपयोग पर उठे बड़े नीतिगत सवाल
केरल की यह घटना आधुनिक शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों और महिला स्टाफ की डिजिटल सुरक्षा, डेटा प्राइवेसी और संस्थागत निगरानी व्यवस्था पर गहरे नीतिगत प्रश्न खड़े करती है। डिजिटल टूल्स और एआई-संचालित इमेज जेनरेशन सॉफ्टवेयर की सुगम उपलब्धता ने यह जोखिम कई गुना बढ़ा दिया है कि सार्वजनिक मंचों पर उपलब्ध किसी भी व्यक्ति की सामान्य तस्वीर का दुरुपयोग कर उसकी सामाजिक और मानसिक प्रतिष्ठा को गहरी चोट पहुंचाई जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों को अब न केवल कैंपस के भौतिक परिवेश को सुरक्षित बनाना होगा, बल्कि कॉलेज की आधिकारिक मीडिया टीमों, सोशल मीडिया हैंडल्स और डिजिटल आर्काइव्स के उपयोग को लेकर भी सख्त विनियामक दिशानिर्देश (SOPs) लागू करने होंगे। कोच्चि की अदालत में आरोपी की रिमांड के बाद होने वाली पुलिस जांच इस मामले की सभी कड़ियों को स्पष्ट करेगी, किंतु इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर स्पेस में तकनीक का गैर-जिम्मेदाराना और आपराधिक इस्तेमाल जीवन भर की सामाजिक प्रतिष्ठा को पल भर में खतरे में डाल सकता है।
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