Pakistan Cricket Board में बड़ा फेरबदल! आकिब जावेद की चयन समिति से हो सकती है छुट्टी, इंग्लैंड दौरे के बीच पीसीबी में मचा महासंग्राम

इंग्लैंड दौरे में खराब प्रदर्शन के बाद चयन समिति और कोचिंग स्टाफ में बदलाव की तैयारी

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Pakistan Cricket Board: पाकिस्तान क्रिकेट में इन दिनों मैदान पर बल्ले और गेंद के प्रदर्शन से कहीं अधिक बवाल ड्रेसिंग रूम, चयन समिति और बोर्ड की अंदरूनी राजनीति को लेकर मचा हुआ है। इंग्लैंड के खिलाफ जारी तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के शुरुआती दोनों मुकाबलों में शर्मनाक और एकतरफा हार झेलने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) पूरे सिस्टम की व्यापक ओवरहालिंग की तैयारी में जुट गया है। इसी उथल-पुथल की कड़ी में राष्ट्रीय चयन समिति के सबसे प्रभावशाली सदस्य और पूर्व तेज गेंदबाज आकिब जावेद की चयन समिति से छुट्टी किए जाने की मजबूत संभावना सामने आई है। बोर्ड के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, इंग्लैंड दौरा समाप्त होते ही चयन समिति का पुनर्गठन किया जाएगा और आकिब जावेद की भूमिका को केवल लाहौर स्थित नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) के डेवलपमेंट कार्यों तक सीमित किया जा सकता है।

यह नाटकीय घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान की टेस्ट टीम पिछले दो वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। पहले दो टेस्ट मैचों में करारी शिकस्त के बाद बीच दौरे से ही पूर्व कप्तान सलमान अली आगा, अनुभवी विकेटकीपर मोहम्मद रिजवान और सलामी बल्लेबाज इमाम-उल-हक सहित सात खिलाड़ियों को स्वदेश वापस भेज दिया गया। इसके अलावा रेड-बॉल हेड कोच सरफराज अहमद और बॉलिंग कोच उमर गुल को भी उनके पदों से हटाकर अंतरिम रूप से माइक हेसन को कमान सौंप दी गई। इस अप्रत्याशित और अफरातफरी भरे फैसले ने पाकिस्तान क्रिकेट में स्थिरता, पारदर्शिता और रणनीतिक दृष्टि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Pakistan Cricket Board: डेवलपमेंट डायरेक्टर तक सीमित होगी भूमिका

अक्टूबर 2024 में जब आकिब जावेद को राष्ट्रीय चयन समिति में शामिल किया गया था, तब उन्हें घरेलू क्रिकेट की प्रतिभाओं को परखने और आधुनिक रणनीतियां लागू करने वाला मुख्य सूत्रधार माना जा रहा था। पिच की परिस्थितियों से लेकर अंतिम एकादश के चयन तक आकिब का दबदबा निर्विवाद रहा। किंतु इंग्लैंड दौरे पर टीम के लचर प्रदर्शन और विवादित चयन निर्णयों ने अब उनकी ही कुर्सी हिला दी है।

बोर्ड सूत्रों का कहना है कि पीसीबी का शीर्ष नेतृत्व चयन समिति से जुड़े विवादों से खुद को अलग करना चाहता है। योजना के अनुसार, आकिब जावेद से राष्ट्रीय चयन के अधिकार वापस लेकर उन्हें लाहौर स्थित हाई परफॉर्मेंस सेंटर में ‘डायरेक्टर डेवलपमेंट’ के रूप में युवा प्रतिभाओं को तराशने के मूल काम पर लौटने को कहा जाएगा। हालांकि पीसीबी ने अभी इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, किंतु इंग्लैंड दौरे के खत्म होने के बाद प्रस्तावित नई चयन व्यवस्था में आकिब का पत्ता कटना लगभग तय माना जा रहा है।

इंग्लैंड में ऐतिहासिक दुर्गति: दो टेस्ट में पारी और 194 रन की करारी हार

पाकिस्तान के लिए इंग्लैंड का यह दौरा किसी भयानक दुःस्वप्न से कम साबित नहीं हुआ है। पहले टेस्ट मैच में मेजबान इंग्लैंड ने पाकिस्तान को पारी और 103 रनों के विशाल अंतर से रौंदा, जबकि दूसरे टेस्ट में पाकिस्तान को 194 रनों की शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि दोनों टेस्ट मैचों की चारों पारियों में से किसी में भी पाकिस्तानी टीम 200 रनों का आंकड़ा तक पार नहीं कर सकी।

बल्लेबाजी का यह ऐतिहासिक पतन उस समय हुआ जब टीम में कई अनुभवी नाम मौजूद थे। लगातार गिरते प्रदर्शन के बाद पीसीबी ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए कड़े कदम उठाए, किंतु बीच सीरीज में हेड कोच, बॉलिंग कोच और सात प्रमुख खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखाए जाने से टीम का मनोबल पूरी तरह टूट गया। ड्रेसिंग रूम में पसरे अविश्वास के माहौल ने मैदान पर खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को पूरी तरह खोखला कर दिया।

मिस्बाह-उल-हक ने पहले ही की इस्तीफे की पेशकश: चयन समिति पर बढ़ा दबाव

आकिब जावेद पर गहराते संकट की पृष्ठभूमि तब तैयार हुई जब चयन समिति के एक अन्य दिग्गज सदस्य और पूर्व कप्तान मिस्बाह-उल-हक ने बोर्ड के रवैये से आहत होकर पद छोड़ने की पेशकश कर दी। इसी वर्ष मार्च में गठित चार सदस्यीय चयन समिति में मिस्बाह, आकिब, सरफराज अहमद और असद शफीक को शामिल किया गया था।

विवाद तब भड़का जब पीसीबी चेयरमैन और वरिष्ठ अधिकारियों ने इंग्लैंड दौरे के लिए खिलाड़ियों की चयन सूची पर सवाल उठाते हुए चयनकर्ताओं से लिखित स्पष्टीकरण मांग लिया। बोर्ड ने विशेष रूप से यह पूछा कि हालिया घरेलू प्रदर्शन और फॉर्म की अनदेखी करते हुए मोहम्मद रिजवान और इमाम-उल-हक जैसे खिलाड़ियों को किस तकनीकी और सांख्यिकीय आधार पर टेस्ट टीम में शामिल किया गया था। अपने चयन फैसलों पर बोर्ड के इस सीधे अविश्वास के बाद मिस्बाह ने अलग होने का मन बना लिया, जिससे पूरी समिति के अस्तित्व पर ही संकट के बादल मंडराने लगे।

रिजवान, इमाम और सलमान आगा पर दोहरा संकट: प्रदर्शन के साथ अनुशासन की जांच

इंग्लैंड दौरे से अचानक वापस भेजे गए खिलाड़ियों के मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मोहम्मद रिजवान, इमाम-उल-हक और सलमान अली आगा को स्वदेश भेजने का निर्णय केवल उनकी खराब फॉर्म तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें टीम अनुशासन और ऑफ-फील्ड आचरण से जुड़े गंभीर मुद्दे भी शामिल हैं।

पीसीबी इन सीनियर खिलाड़ियों से दौरे के दौरान हुई कुछ अप्रिय घटनाओं और टीम प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर औपचारिक जवाब तलब करने की तैयारी में है। यह भी दावा किया जा रहा है कि अंतरिम रेड-बॉल कोच माइक हेसन ने कार्यभार संभालते ही अनुशासन को सर्वोपरि रखने की वकालत की थी और उन खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने की सिफारिश की थी जो बिना किसी व्यक्तिगत अहंकार के टीम रणनीति के प्रति पूरी तरह समर्पित हों।

पूर्व कोच जेसन गिलेस्पी का तीखा प्रहार: बाहर हो रहे खिलाड़ियों को मीडिया से मिल रही जानकारी

पाकिस्तान के पूर्व टेस्ट कोच जेसन गिलेस्पी ने पीसीबी की कार्यप्रणाली और आकिब जावेद की नीतियों पर अत्यंत तीखा हमला बोला है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत करते हुए गिलेस्पी ने कहा कि पाकिस्तान टीम की विफलता का मुख्य कारण खिलाड़ियों में असुरक्षा की भावना है। लगातार चयनकर्ताओं का बदलना, हर दूसरी सीरीज में नए कोच लाना और सीनियर खिलाड़ियों को अपमानजनक तरीके से बाहर करना पाकिस्तान क्रिकेट को गर्त में ले जा रहा है।

गिलेस्पी ने विशेष रूप से आकिब जावेद पर निशाना साधते हुए कहा कि वे पिछले दो वर्षों से व्यवस्था का अहम हिस्सा रहे हैं, किंतु अपनी गलतियों का ठीकरा हमेशा विदेशी कोचिंग स्टाफ पर फोड़ते रहे हैं। गिलेस्पी ने इस बात पर भी गहरा रोष जताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को टीम से बाहर किए जाने की सूचना प्रबंधन द्वारा सीधे संवाद के बजाय सोशल मीडिया, दोस्तों या टीवी चैनलों के माध्यम से मिल रही है, जो किसी भी पेशेवर बोर्ड के लिए बेहद शर्मनाक है।

माइक हेसन को मिल सकती है पूर्णकालिक जिम्मेदारी

इंग्लैंड में चल रहे इस संकट के बीच पीसीबी के भीतर न्यूजीलैंड के अनुभवी रणनीतिकार माइक हेसन का कद तेजी से बढ़ा है। हेसन को फिलहाल इस दौरे के लिए अंतरिम जिम्मेदारी सौंपी गई है, किंतु बोर्ड के आला अधिकारी उन्हें दीर्घकालिक आधार पर पाकिस्तान की रेड-बॉल टीम का स्थायी हेड कोच नियुक्त करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

यदि हेसन इस पूर्णकालिक प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, तो उन्हें टीम चयन और सहयोगी स्टाफ चुनने के व्यापक अधिकार दिए जा सकते हैं। यदि वे सहमत नहीं होते हैं, तो बोर्ड नवंबर में श्रीलंका के खिलाफ होने वाली घरेलू टेस्ट सीरीज से पूर्व किसी अन्य स्थापित अंतरराष्ट्रीय कोच की तलाश करेगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि पीसीबी अब स्थानीय गुटबाजी से तंग आकर टीम की बागडोर पूरी तरह पेशेवर विदेशी हाथों में सौंपने की पुरानी राह पर वापस लौटने को मजबूर हो रहा है।

Pakistan Cricket Board: पीसीबी के ‘क्लीन-अप’ अभियान की अग्निपरीक्षा

इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच तीन मैचों की सीरीज का अंतिम टेस्ट 9 से 13 सितंबर तक खेला जाना है। सीरीज 0-2 से पहले ही गंवा चुकी पाकिस्तानी टीम इस मुकाबले में बिल्कुल नए चेहरों और बदले हुए कोचिंग स्टाफ के साथ मैदान पर उतरेगी।

यह मुकाबला केवल सम्मान बचाने की लड़ाई नहीं होगा, बल्कि पीसीबी द्वारा चलाए गए इस तथाकथित ‘क्लीन-अप’ अभियान की सीधी परीक्षा भी होगा। यदि युवा खिलाड़ियों से सजी यह नई टीम तीसरे टेस्ट में जुझारू प्रदर्शन करने में सफल रहती है, तो बोर्ड अपने फैसलों को सही ठहरा सकेगा। किंतु यदि एक और शर्मनाक हार हाथ लगती है, तो पीसीबी के चेयरमैन, चयन समिति और पूरे क्रिकेट तंत्र के खिलाफ पाकिस्तान के क्रिकेट प्रेमियों का आक्रोश अनियंत्रित होना तय है। अगस्त 2024 के बाद से खेली गई पिछली आठ टेस्ट सीरीज में केवल एक जीत का शर्मनाक रिकॉर्ड यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि पाकिस्तान क्रिकेट को सतही बदलावों की नहीं, बल्कि बुनियादी प्रशासनिक सर्जरी की आवश्यकता है।

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