Bombay High Court: MBBS फर्स्ट ईयर में सिर्फ 4 मौके, बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले से छात्रा को झटका, जानें पूरा मामला

Bombay High Court: MBBS फर्स्ट ईयर में सिर्फ 4 मौके, बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले से छात्रा को झटका, जानें पूरा मामला

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Bombay High Court: मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का एक फैसला काफी अहम साबित हो सकता है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि MBBS कोर्स के फर्स्ट ईयर में किसी भी छात्र को परीक्षा पास करने के लिए चार से ज्यादा प्रयास करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह फैसला कोर्ट ने एक एमबीबीएस छात्रा की उस याचिका को खारिज करते हुए सुनाया, जिसमें उसने एनाटॉमी विषय की परीक्षा चौथी बार देने की मांग की थी। सबसे अहम बात यह है कि इस अटेम्प्ट लिमिट का इस बात से कोई संबंध नहीं है कि छात्र ने हर प्रयास में किन-किन विषयों की परीक्षा दी थी।

Bombay High Court: क्या था पूरा मामला

यह मामला जस्टिस फिरदौस पी. पूनीवाला और जस्टिस आर. आई. चागला की खंडपीठ के सामने आया था। याचिकाकर्ता छात्रा ने महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज यानी MUHS की एनाटॉमी थ्योरी और प्रैक्टिकल परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। छात्रा ने अगस्त 2023 में एमबीबीएस फर्स्ट ईयर में दाखिला लिया था और एनाटॉमी को छोड़कर बाकी सभी विषयों के इंटरनल असेसमेंट पास कर लिए थे।

तीन बार दी परीक्षा, फिर भी नहीं मिली सफलता

इंटरनल असेसमेंट पास करना थ्योरी और प्रैक्टिकल परीक्षा में बैठने के लिए जरूरी शर्त थी। इसके बाद छात्रा ने एनाटॉमी की परीक्षा तीन बार दी, लेकिन हर बार वह थ्योरी परीक्षा में सफल नहीं हो पाई। छात्रा को यूनिवर्सिटी की तरफ से बताया गया कि दाखिले की तारीख से चार साल पूरे हो चुके हैं, इसलिए उसे एक और अटेम्प्ट देने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

छात्रा की दलील और यूनिवर्सिटी का जवाब

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक छात्रा की दलील थी कि उसने एनाटॉमी का पेपर सिर्फ तीन बार ही दिया है, इसलिए उसे इसी विषय में चौथी बार परीक्षा देने की अनुमति मिलनी चाहिए। इसके जवाब में यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि नियमों के मुताबिक प्रथम वर्ष एमबीबीएस के लिए किसी भी छात्र को चार से ज्यादा प्रयास की अनुमति नहीं दी जा सकती, और छात्रा पहले ही चार प्रयास पूरे कर चुकी थी।

कोर्ट ने रेगुलेशन 21 का दिया हवाला

कोर्ट ने 2023 के नियमों के रेगुलेशन 21 का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में छात्र को प्रथम वर्ष यानी फर्स्ट प्रोफेशनल एमबीबीएस के लिए चार से ज्यादा प्रयास की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट के मुताबिक इसमें यह मायने नहीं रखता कि छात्र ने उन प्रयासों में अलग-अलग विषयों की परीक्षा दी हो या नहीं। यानी कुल अटेम्प्ट की संख्या ही इस नियम के तहत सबसे अहम मानी जाती है।

हाईकोर्ट ने खारिज की छात्रा की याचिका

कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि 2023 के रेगुलेशन 21 के प्रावधानों के तहत याचिकाकर्ता को एनाटॉमी में एक और प्रयास की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि याचिकाकर्ता को प्रथम वर्ष एमबीबीएस के लिए पहले ही चार प्रयास दिए जा चुके हैं, इसलिए अब उसे कोई और मौका नहीं दिया जा सकता। इसी आधार पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने छात्रा की रिट याचिका खारिज कर दी।

कुल मिलाकर देखा जाए तो बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला उन सभी मेडिकल छात्रों के लिए एक जरूरी सबक है, जो एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की पढ़ाई कर रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि नियमों में तय अटेम्प्ट लिमिट को किसी भी परिस्थिति में नहीं बढ़ाया जा सकता, चाहे छात्र ने किसी एक विषय की परीक्षा कम बार क्यों न दी हो। यह मामला NEET क्वालिफाई करके मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए भी एक चेतावनी की तरह है, कि पहले साल की परीक्षाओं को गंभीरता से लेना कितना जरूरी है। इस फैसले के बाद अब मेडिकल छात्रों को अपनी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सतर्क रहना होगा।

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