NEET Protest: संसद में नीट विवाद पर गरमाई राजनीति, अखिलेश यादव ने सरकार और कांग्रेस के बीच समझौते का लगाया गंभीर आरोप

NEET Protest: संसद में नीट विवाद पर गरमाई राजनीति; अखिलेश यादव ने कांग्रेस और सरकार के बीच गुप्त समझौते का लगाया गंभीर आरोप

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NEET Protest: संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा का माहौल उस वक्त पूरी तरह से गरमा गया जब देश के सबसे बड़े शिक्षण और परीक्षा विवाद यानी नीट पेपर लीक को लेकर विपक्षी दलों के भीतर ही आपसी खींचतान खुलकर सामने आ गई। सदन की कार्यवाही के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के बीच तीखी बहस देखने को मिली। नीट के मुद्दे पर बोलने की अनुमति न मिलने से खफा नजर आ रहे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि क्या सरकार और कांग्रेस के बीच अंदरखाने कोई गुप्त समझौता हो चुका है। हंगामे और नारेबाजी के बीच लोकसभा की कार्यवाही को एक बार फिर अगले दिन तक के लिए स्थगित करना पड़ा, लेकिन संसद के गलियारों में इस सियासी टकराव की गूंज बहुत तेज सुनाई दे रही है।

NEET Protest: क्या था पूरा घटनाक्रम और क्यों भड़के अखिलेश यादव?

बुधवार को जैसे ही सदन की बैठक शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। वे लगातार नीट पेपर लीक मामले पर तत्काल चर्चा कराए जाने की मांग पर अड़े हुए थे। हालांकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने व्यवस्था बनाने की कोशिश की और हंगामे के बीच ही कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल तथा केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को अपनी बात रखने की अनुमति दे दी।

यहीं से सारा विवाद शुरू हुआ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस बात से बेहद नाराज थे कि इस संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दे पर उनकी पार्टी को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया। अपनी सीट से तेजी से खड़े होते हुए उन्होंने इस पक्षपात पर कड़ी आपत्ति जताई और जोर देकर कहा कि यह केवल किसी एक दल विशेष का विषय नहीं है, बल्कि देश के लाखों युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

“क्या सरकार और मुख्य विपक्षी दल के बीच कोई डील हो गई है?”

सदन के भीतर माहौल उस समय और अधिक तनावपूर्ण हो गया जब अखिलेश यादव ने तल्ख तेवर अपनाते हुए पीठासीन अधिकारी और सत्ता पक्ष के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी पर भी सीधा निशाना साधा। उन्होंने खुलेआम सवाल दागा कि आखिर क्यों सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों को ही बोलने की छूट दी जा रही है।

अपने तीखे अंदाज में उन्होंने पूछा कि क्या सरकार और मुख्य विपक्षी दल के बीच कोई अंदरूनी डील हो चुकी है, जिसके तहत विपक्ष की आवाज को सीमित किया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को दोहराते हुए कड़ी चेतावनी दी कि यदि देश के युवाओं की चिंताओं को इसी तरह नजरअंदाज किया जाता रहा, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और इस लड़ाई को एक बार फिर सड़कों पर लेकर आएंगे। उनका यह आक्रामक रुख देखकर सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी खेमे में भी खामोशी छा गई।

NEET Protest: केसी वेणुगोपाल की नाराजगी और आमने-सामने की तकरार

सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद यह राजनीतिक गर्मागरम माहौल सेंट्रल हॉल या गलियारों तक भी पहुंच गया। लोकसभा के भीतर अखिलेश यादव की इस टिप्पणी से कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल खासे नाराज बताए जा रहे थे। जब दोनों नेता आमने-सामने आए, तो वेणुगोपाल ने इस तीखे बयान पर अपनी स्पष्ट नाराजगी जताई।

हालांकि, समाजवादी पार्टी प्रमुख ने भी पीछे हटने से इंकार कर दिया और दो टूक शब्दों में कहा कि मंत्रियों के इस्तीफे या अन्य राजनीतिक औपचारिकताएं बाद में भी पूरी की जा सकती हैं, लेकिन सरकार को पहले उन युवाओं और छात्रों पर हुई बर्बरता का स्पष्ट जवाब देना होगा जो अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लेते हुए सवाल किया कि यदि देश के मुखिया संसद के बाहर इस विषय पर बोल सकते हैं, तो सदन के भीतर आकर देश के युवाओं के नाम पर बयान क्यों नहीं दे सकते?

NEET Protest: सत्ता पक्ष का पक्ष और आगे की राजनीतिक सुगबुगाहट

विपक्ष के लगातार हमलों और हंगामे के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि सरकार हर नियम सम्मत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है और छात्र हमेशा से उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहे हैं। इसके बावजूद, नीट परीक्षा और हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान बीस जुलाई को हुई घटनाओं को लेकर विपक्ष का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र के बचे हुए दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय दलों के बीच समन्वय की कमी भी अब खुलकर सामने आने लगी है। संसद के भीतर और बाहर जिस तरह से युवा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इस सवाल पर सियासत गरमाई हुई है, उसने आने वाले दिनों में राजनीतिक तापमान को और अधिक बढ़ाने के संकेत दे दिए हैं।

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