JPSC Scam में बड़ा खुलासा: अभय तिवारी का दावा, खियांग्ते ने ₹2 करोड़ लेकर TDPL को परीक्षा संचालन का काम दिलाया

अभय तिवारी के बयान से बढ़ी जांच, TDPL को काम देने में कथित रिश्वत का खुलासा

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JPSC Scam: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े कथित परीक्षा घोटाले में एक और बड़ा और सनसनीखेज मोड़ सामने आया है। सीआईडी (CID) की जांच के दौरान गिरफ्तार टीडीपीएल (TDPL) कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उनके बयान के अनुसार, आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने टीडीपीएल कंपनी को परीक्षा संचालन का महत्वपूर्ण कार्य सौंपने के एवज में दो करोड़ रुपये नकद लिए और भविष्य में होने वाले हर भुगतान में 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी तय की। इस बयान के सार्वजनिक होने के बाद सीआईडी ने अपनी जांच की गति तेज कर दी है और संबंधित आरोपियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है।

अभय तिवारी ने सीआईडी के समक्ष विस्तार से बताया कि टीडीपीएल कंपनी को जेपीएससी के भीतर प्रवेश दिलाने का घटनाक्रम किस प्रकार शुरू हुआ। उनके बयान से यह स्पष्ट होता है कि यह धांधली केवल एक निजी कंपनी की औपचारिक नियुक्ति तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें आयोग के अंदरूनी तंत्र की पूरी साठगांठ शामिल थी। इस पूरे नेटवर्क में पूर्व अध्यक्ष के कंप्यूटर सेल (कोषांग) में कार्यरत धर्मेंद्र नाम के कर्मी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में उभरकर सामने आई है।

JPSC Scam: टीडीपीएल की एंट्री और होटल रेडिसन ब्लू में पहली बैठक

अभय तिवारी ने अपने दर्ज बयान में बताया कि जून महीने में उन्होंने सर्वप्रथम पूर्व अध्यक्ष के कंप्यूटर सेल में तैनात धर्मेंद्र से संपर्क साधा था। धर्मेंद्र के माध्यम से ही अभय तिवारी ने टीडीपीएल कंपनी के दो निदेशकों—रामवीर सिंह और सत्यपाल—का परिचय कराया। इसके बाद, दोनों निदेशकों, बोकारो निवासी सानंद प्रकाश और तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के बीच रांची स्थित होटल रेडिसन ब्लू के रेस्तरां में एक गोपनीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक के दौरान तत्कालीन अध्यक्ष खियांग्ते ने टीडीपीएल कंपनी को जेपीएससी के समक्ष अपना प्रेजेंटेशन देने का स्पष्ट निर्देश दिया।

होटल में हुई इस मुलाकात के ठीक दो दिन बाद टीडीपीएल की पूरी तकनीकी टीम जेपीएससी कार्यालय पहुंची और आयोग के अधिकारियों के सामने अपना प्रेजेंटेशन दिया। उस समय आयोग के सभी सदस्य और परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता भी उपस्थित थीं। प्रेजेंटेशन समाप्त होने के तुरंत बाद अध्यक्ष खियांग्ते ने कंपनी का प्रस्ताव परीक्षा उपनियंत्रक को सौंप दिया और निदेशक रामवीर सिंह को धर्मेंद्र के साथ निरंतर संपर्क में रहने की हिदायत दी। पूरी प्रक्रिया को जिस तीव्र गति से आगे बढ़ाया गया, उससे सांठगांठ की बात और स्पष्ट होती है।

चार शर्तें, दो करोड़ नकद और 20% कट मनी पर सहमति

प्रेजेंटेशन समाप्त होने के बाद मोरहाबादी मैदान में अभय तिवारी, टीडीपीएल निदेशक रामवीर सिंह और धर्मेंद्र के बीच एक विस्तृत बैठक हुई। इसी बैठक में धर्मेंद्र ने काम सौंपने के बदले चार प्रमुख शर्तें सामने रखीं:

  1. पहला: अध्यक्ष (चेयरमैन) को अग्रिम के तौर पर दो करोड़ रुपये नकद दिए जाएंगे।

  2. दूसरा: धर्मेंद्र खुद मध्यस्थता के लिए 25 लाख रुपये लेगा।

  3. तीसरा: कंपनी को आयोग द्वारा दिए गए नाम वाले कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों को परीक्षा में उत्तीर्ण (पास) कराना होगा।

  4. चौथा: जेपीएससी द्वारा कंपनी को किए जाने वाले हर भुगतान (बिलिंग) का 20 प्रतिशत हिस्सा हर बार अध्यक्ष को दिया जाएगा।

टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह ने इन सभी शर्तों को स्वीकार कर लिया। शर्तें तय होने के बाद धर्मेंद्र दोनों निदेशकों को पास ही स्थित स्टेट गेस्ट हाउस ले गया, जहां एल. खियांग्ते से दोबारा मुलाकात कराई गई। खियांग्ते ने कंपनी प्रतिनिधियों से धर्मेंद्र के संपर्क में रहने को कहा। इसके बाद जून माह में ही जेपीएससी और टीडीपीएल के बीच आधिकारिक अनुबंध (एग्रीमेंट) हुआ और कंपनी को परीक्षाओं के संचालन का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया।

सीआईडी की त्वरित कार्रवाई: छापेमारी और धर्मेंद्र की गिरफ्तारी

अभय तिवारी द्वारा दिए गए इकबालिया बयान के आधार पर सीआईडी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सानंद प्रकाश, धर्मेंद्र और अन्य संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान सीआईडी ने धर्मेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में धर्मेंद्र ने भी सीआईडी को कई अहम जानकारियां दी हैं, जिससे जांच का दायरा और विस्तृत हो गया है। सीआईडी ने मामले में गंभीरता दिखाते हुए जेपीएससी के तीनों तत्कालीन सदस्यों को समन जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है, जिनसे सोमवार से पूछताछ शुरू की जा रही है।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि टीडीपीएल को काम दिए जाने के दौरान आयोग के अन्य सदस्यों की क्या भूमिका थी। क्या उन्होंने इस प्रक्रिया का विरोध किया था या वे भी इस लेन-देन का हिस्सा थे। सीआईडी इस पूरे मामले में वित्तीय लेन-देन, शर्तों के निर्धारण और परीक्षा संचालन की कड़ियों को एक साथ जोड़कर साक्ष्य जुटा रही है।

JPSC Scam: परीक्षा प्रणाली की साख पर उठते गंभीर सवाल

झारखंड लोक सेवा आयोग में इस स्तर की रिश्वतखोरी और अनियमितताओं के खुलासे ने राज्य की परीक्षा प्रणाली पर गहरा संकट खड़ा कर दिया है। राज्य के लाखों अभ्यर्थी पहले से ही जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शी व्यवस्था की मांग को लेकर सड़कों पर आंदोलनरत हैं। अभ्यर्थी लगातार सीबीआई (CBI) जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग कर रहे हैं।

निजी कंपनी को काम देने के पीछे दो करोड़ रुपये नकद, 20 प्रतिशत कट मनी और मनचाहे अभ्यर्थियों को पास कराने की शर्त ने आयोग की निष्पक्षता को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है। सीआईडी फिलहाल होटल रेडिसन ब्लू, स्टेट गेस्ट हाउस के सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और बैंक खातों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच के जरिए आरोपों की वैज्ञानिक पुष्टि करने में लगी हुई है।

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