8th Pay Commission: दिल्ली बैठक में पेंशनर्स की बड़ी मांगें, न्यूनतम पेंशन ₹45 हजार और हर तिमाही DA-DR संशोधन का प्रस्ताव

न्यूनतम पेंशन ₹45 हजार, 67% पेंशन और हर तिमाही DA-DR संशोधन की मांग

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8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की तैयारियां तेज हो गई हैं। राजधानी दिल्ली में हुई ताजा बैठकों में विभिन्न कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने अपनी मांगें और सुझाव आयोग के सामने रखे हैं। इनमें भारत पेंशनर्स समाज (BPS) की मांगें खासतौर पर चर्चा में हैं। संगठन ने न्यूनतम पेंशन 45 हजार रुपये, अंतिम वेतन का 67 प्रतिशत पेंशन और महंगाई राहत में हर तीन महीने पर बदलाव जैसे कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं। ये मांगें लाखों पेंशनभोगियों के हितों से जुड़ी हैं और आयोग की सिफारिशों को प्रभावित कर सकती हैं।

भारत पेंशनर्स समाज के प्रतिनिधिमंडल ने चेयरमैन आर.के. चौहान और महासचिव अविनाश राजपूत की अगुवाई में जनपथ स्थित चंद्रलोक भवन में आठवें वेतन आयोग के सदस्यों से मुलाकात की। बैठक के दौरान संगठन ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए अपनी प्रमुख मांगें विस्तार से रखीं। बीपीएस करीब 10 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करता है और इसे पेंशन विभाग तथा नीति आयोग से मान्यता प्राप्त है। संगठन की स्थापना 1955 में हुई थी और यह ‘स्कोवा’ (SCOVA) में भी प्रतिनिधित्व रखता है।

8th Pay Commission: 5.2 फैमिली यूनिट के आधार पर पेंशन निर्धारण की मांग

बीपीएस की सबसे महत्वपूर्ण मांगों में से एक है न्यूनतम पेंशन तय करने के लिए 5.2 वेटेड फैमिली यूनिट को आधार बनाना। इसमें कर्मचारी के लिए 1 यूनिट, जीवनसाथी के लिए 1 यूनिट, दो बच्चों में से प्रत्येक के लिए 0.8 यूनिट और दो आश्रित माता-पिता में से प्रत्येक के लिए 0.8 यूनिट शामिल करने का प्रस्ताव है। संगठन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में परिवार की वास्तविक जरूरतों पर पूरा ध्यान नहीं दिया जाता। अगर इस आधार पर गणना की जाए तो न्यूनतम पेंशन अधिक व्यावहारिक और पर्याप्त हो सकती है।

इसके साथ ही संगठन ने न्यूनतम मूल वेतन 69 हजार रुपये तय करने और फिटमेंट फैक्टर 3.83 रखने की मांग रखी है। ये प्रस्ताव वेतन संरचना को मौजूदा महंगाई और जीवनयापन की लागत के अनुरूप बनाने की दिशा में उठाए गए हैं। पेंशनर्स का मानना है कि आठवें वेतन आयोग को इन बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

न्यूनतम पेंशन 45 हजार और पेंशन दर बढ़ाने का प्रस्ताव

बीपीएस ने न्यूनतम पेंशन को कम से कम 45 हजार रुपये प्रति माह रखने की पुरजोर वकालत की है। वर्तमान में कई पेंशनभोगी कम राशि पर गुजारा करने को मजबूर हैं। संगठन का कहना है कि अंतिम प्राप्त वेतन का 50 प्रतिशत के बजाय 67 प्रतिशत पेंशन दी जानी चाहिए। वहीं पारिवारिक पेंशन को अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत रखने का सुझाव दिया गया है। ये मांगें पेंशनर्स की बढ़ती स्वास्थ्य और जीवनयापन संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर रखी गई हैं।

पेंशन में समानता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। 1 जनवरी 2026 से पहले और बाद में रिटायर होने वाले पेंशनभोगियों के बीच किसी भी तरह की असमानता नहीं होनी चाहिए। संगठन ने हर पांच साल में वेतन और पेंशन में संशोधन की व्यवस्था करने की भी मांग की है ताकि महंगाई के असर को समय पर कम किया जा सके।

हर तिमाही महंगाई भत्ता और राहत में बदलाव की मांग

महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) को लेकर बीपीएस ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। संगठन का प्रस्ताव है कि तीन महीने के औसत के आधार पर हर तिमाही डीए और डीआर में बढ़ोतरी की जाए। वर्तमान में यह व्यवस्था अर्धवार्षिक है जिससे पेंशनर्स को महंगाई का असर ज्यादा झेलना पड़ता है। अगर तिमाही आधार पर बदलाव होता है तो राहत जल्द मिलेगी।

इसके अलावा जब महंगाई राहत 25 प्रतिशत से अधिक हो जाए तो उसे बेसिक पेंशन में मिलाने पर विचार करने की मांग भी रखी गई है। पॉइंट टू पॉइंट मुआवजे की व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी बल दिया गया। ये मांगें पेंशनर्स की क्रय शक्ति बनाए रखने की दिशा में अहम मानी जा रही हैं।

स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य लाभ बढ़ाने पर जोर

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी बीपीएस ने विस्तृत सुझाव दिए हैं। संगठन ने सीजीएचएस (CGHS) को मजबूत और विस्तारित करने के साथ कैशलेस स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) को बढ़ाकर 5 हजार रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। ग्रामीण और गैर-सीजीएचएस क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनभोगियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

पेंशनभोगियों को उचित हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और लीव ट्रैवल कंसेशन (LTC) का लाभ देने की मांग भी की गई है। केंद्रीय स्वायत्त और वैधानिक निकायों के योग्य पेंशनभोगियों को भी आठवें वेतन आयोग का लाभ एक साथ दिए जाने का सुझाव दिया गया। बीएसएनएल (BSNL) पेंशनभोगियों की लंबे समय से चली आ रही पेंशन समानता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान की मांग भी रखी गई।

कम्यूटेड पेंशन और अतिरिक्त पेंशन की व्यवस्था

कम्यूटेड पेंशन की बहाली को लेकर भी संगठन ने स्पष्ट मांग रखी है। 60 वर्ष की उम्र में रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए 11 वर्ष बाद या 71 वर्ष की उम्र पूरी होने पर (जो भी पहले हो) पेंशन के कम्यूटेड हिस्से को बहाल करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा 65 वर्ष की उम्र से शुरू होने वाली उम्र के हिसाब से अतिरिक्त पेंशन देने की मांग की गई है। यह अतिरिक्त पेंशन पांच साल के स्लैब में दी जाए।

संगठन ने संशोधित वेतन, पेंशन और भत्तों को 1 जनवरी 2026 से लागू करने की भी वकालत की है। बीपीएस का मानना है कि ये सभी मांगें जायज हैं और लाखों पेंशनभोगियों के हित में हैं। बैठक के दौरान आयोग के सदस्यों ने प्रेजेंटेशन को ध्यान से सुना और प्रतिनिधियों से विस्तार से बातचीत की।

8th Pay Commission: आयोग की सिफारिशों पर पेंशनर्स की उम्मीद

भारत पेंशनर्स समाज ने आठवें वेतन आयोग के साथ हुई बातचीत पर संतोष जताया है। संगठन को उम्मीद है कि आयोग अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देते समय पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों की जायज उम्मीदों और चिंताओं पर उचित ध्यान देगा। आठवां केंद्रीय वेतन आयोग फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, पेंशन, भत्ते और सेवा संबंधी अन्य लाभों की समीक्षा का काम तेजी से कर रहा है।

पेंशनर्स संगठनों की इन मांगों से साफ है कि आठवें वेतन आयोग से बड़ी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। न्यूनतम पेंशन बढ़ाने, महंगाई राहत को अधिक प्रभावी बनाने और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने जैसी मांगें आम पेंशनभोगियों की वास्तविक जरूरतों को दर्शाती हैं। आयोग इन सुझावों पर कितना ध्यान देता है, यह आने वाले समय में सिफारिशों के जरिए सामने आएगा।

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