Student Protest: झारखंड में आज विधानसभा घेराव करेंगे हजारों छात्र, CBI जांच की मांग पर अड़े अभ्यर्थी; रांची में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

CBI जांच की मांग पर अड़े अभ्यर्थी, रांची में विधानसभा के आसपास बढ़ाई गई सुरक्षा

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Student Protest: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार को एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। राज्यभर से हजारों की संख्या में अभ्यर्थी राजधानी रांची में जुट चुके हैं और विधानसभा का शांतिपूर्ण घेराव करने की तैयारी कर रहे हैं। यह आंदोलन पिछले सोलह-सत्रह दिनों से लगातार जारी है। छात्र संगठन जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के आह्वान पर युवा भारी संख्या में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जमा हो रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने नए विधानसभा परिसर और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से कड़ा कर दिया है।

सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच अब तक कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन ये सभी बेनतीजा साबित हुई हैं। सरकार का दावा है कि अभ्यर्थियों की लगभग नब्बे से पंचानवे प्रतिशत मांगों को मान लिया गया है, परंतु छात्र सीबीआई जांच की अपनी मुख्य मांग पर पूरी तरह अड़े हुए हैं। ऐसे में आज का दिन राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक माहौल दोनों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Student Protest: प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली का आरोप और छात्रों का बढ़ता आक्रोश

झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थी सड़कों पर उतरे हैं। आंदोलनकारी छात्रों का स्पष्ट कहना है कि कई परीक्षाओं में पेपर लीक, ओएमआर शीट में हेरफेर, कट ऑफ अंकों में अस्पष्टता और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी रही है। छात्र लंबे समय से इन प्रशासनिक कमियों को उजागर कर रहे हैं और उन्होंने विवादित परीक्षाओं को रद्द करने, दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई करने तथा पूरी जांच प्रक्रिया को एक स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी के हाथों में सौंपने की मांग रखी है।

आंदोलन के दौरान अपनी मांगों पर बल देने के लिए कुछ छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठ गए हैं। भूख हड़ताल के दौरान कुछ प्रमुख छात्र नेताओं के स्वास्थ्य में गिरावट की खबरें भी सामने आई हैं। युवाओं का तर्क है कि सरकारी नौकरियां उनके उज्ज्वल भविष्य और वर्षों की मेहनत से जुड़ी हुई हैं, और यदि संपूर्ण भर्ती प्रणाली पर से ही विश्वास उठ जाएगा, तो इससे पूरा प्रशासनिक ढांचा प्रभावित होगा। इसी एकजुटता को प्रदर्शित करने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों से छात्र रविवार रात से ही ट्रेनों, बसों और अन्य माध्यमों से रांची पहुंचना शुरू हो गए थे।

सरकार से वार्ता का दौर और प्रमुख मांगों को लेकर गतिरोध

पिछले कुछ दिनों में राज्य सरकार के उच्च अधिकारियों और छात्र नेताओं के बीच कई दौर की वार्ताएं आयोजित की गईं। सरकार की ओर से दावा किया गया है कि उसने छात्रों की कई गंभीर मांगों को स्वीकार कर लिया है। इसमें चौदहवीं जेपीएससी परीक्षा को रद्द करने के साथ-साथ कुछ अन्य विवादित परीक्षाओं पर कार्रवाई शामिल है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने सीआईडी और प्रवर्तन निदेशालय जैसी जांच एजेंसियों से मामलों की जांच कराने का प्रस्ताव भी रखा है। साथ ही, मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन और भविष्य के सुधारों के लिए आईआईएम रांची जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की मदद लेने की बात कही गई है।

हालांकि, छात्र प्रतिनिधि सरकार के इन आश्वासनों से बिल्कुल भी संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। छात्र नेताओं के अनुसार, सरकार ने कुल तेरह विवादित परीक्षाओं में से केवल तीन को ही रद्द करने पर सहमति जताई है। वे पूरे मामले की सीबीआई जांच को अनिवार्य मानते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि राज्य की स्थानीय एजेंसियां बिना किसी बाहरी दबाव के निष्पक्ष जांच नहीं कर पाएंगी। प्रेस वार्ताओं में छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक केंद्रीय जांच एजेंसी की जांच का आदेश जारी नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा।

विधानसभा घेराव का कार्यक्रम और पुलिस-प्रशासन की तैयारियां

छात्र संगठनों की तय योजना के अनुसार, सोमवार सुबह करीब नौ से दस बजे के बीच जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से मार्च शुरू होकर नया विधानसभा परिसर की ओर बढ़ेगा। छात्र नेताओं ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि उनका यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से अनुशासित और शांतिपूर्ण रहेगा। उन्होंने जुलूस में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की उकसावे वाली या हिंसक गतिविधि से दूर रहें और केवल लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर ही अपनी आवाज उठाएं।

दूसरी तरफ, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। नए विधानसभा परिसर के सात सौ पचास मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी गई है, जिसके तहत बिना पूर्व अनुमति के पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एकत्रित होने, जुलूस निकालने या धरना-प्रदर्शन करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। परिसर के चारों ओर त्रिस्तरीय बैरिकेडिंग की गई है और त्वरित कार्य बल के साथ-साथ पुलिस बल की अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं। सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेते हुए सभी प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने का अनुरोध किया है।

आंदोलन की व्यापक पृष्ठभूमि और बेरोजगार युवाओं की चिंताएं

यह आंदोलन केवल एक या दो भर्ती परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार जेएसएससी की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा, तकनीकी इंजीनियरिंग परीक्षा और शिक्षक भर्ती परीक्षा से भी जुड़े हुए हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षाओं का कट ऑफ अंक समय पर जारी न होना और चयन सूचियों में अस्पष्टता का होना उनकी मेहनत पर पानी फेर देता है। इससे पहले भी कुछ मामलों में अभ्यर्थियों को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा था।

झारखंड में बेरोजगारी एक अत्यंत संवेदनशील विषय है, जहां युवाओं के पास करियर निर्माण के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं एक मुख्य साधन हैं। ऐसे में जब भर्ती प्रक्रियाओं की साख पर सवाल खड़े होते हैं, तो युवाओं का निराश होना स्वाभाविक है। छात्र संगठनों ने परीक्षाओं के समयबद्ध संचालन के लिए एक पारदर्शी मॉडल भी सरकार के समक्ष रखा है, जिसमें यूपीएससी और एसएससी के तर्ज पर एक निश्चित वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करने की मांग की गई है।

Student Protest: सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव और आगे का संभावित रास्ता

इस बड़े छात्र आंदोलन ने झारखंड के राजनीतिक तापमान को भी काफी बढ़ा दिया है। राज्य के प्रमुख विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष पर हमलावर हैं और अभ्यर्थियों की मांगों का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, सरकार बातचीत के माध्यम से गतिरोध को समाप्त करने के प्रयास में जुटी है। इस बीच, प्रशासनिक हलकों में जांच आयोगों के पुनर्गठन और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने पर भी मंथन चल रहा है।

आज रांची की सड़कें राज्य के युवाओं की उम्मीदों, संघर्ष और असंतोष की गवाह बनेंगी। प्रशासन का मुख्य ध्यान किसी भी संभावित टकराव को रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने पर केंद्रित है, जबकि अभ्यर्थी अपनी जायज मांगों पर टिके रहने के लिए कटिबद्ध हैं। यदि आज के प्रदर्शन के बाद दोनों पक्षों में किसी तीसरे मध्यस्थ के जरिए सकारात्मक वार्ता की खिड़की खुलती है, तो इसका समाधान निकल सकता है। संपूर्ण राज्य की निगाहें आज रांची में होने वाले इस बड़े प्रशासनिक और सामाजिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

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