SBI ATM: 1 अक्टूबर से ATM से पैसे निकालने पर लगेगा चार्ज, SBI के इन ग्राहकों को देना होगा एक्स्ट्रा शुल्क
SBI ATM: 1 अक्टूबर से ATM से पैसे निकालने पर लगेगा चार्ज, SBI के इन ग्राहकों को देना होगा एक्स्ट्रा शुल्क
SBI ATM: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने अपने कुछ खास ग्राहकों के लिए कैश निकासी से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। SBI ATM चार्ज को लेकर यह नया नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है, जिसके तहत तय फ्री लिमिट से ज्यादा बार कैश निकालने पर ग्राहकों को अतिरिक्त शुल्क चुकाना होगा। हालांकि यह बदलाव बैंक के सभी खाताधारकों पर लागू नहीं होगा, बल्कि यह खासतौर पर ब्रांच के जरिए खोले गए बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट यानी BSBD अकाउंट धारकों के लिए है। गौरतलब है कि यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब 15 अक्टूबर से UPI पर भी चार्ज लागू होने वाला है, यानी अक्टूबर का महीना बैंकिंग लेनदेन के लिहाज से ग्राहकों के लिए कई नए नियम लेकर आ रहा है। अगर आपका खाता भी SBI में है और आप अक्सर ATM या अन्य माध्यमों से बार-बार कैश निकालते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है।
SBI ATM: किन ग्राहकों पर लागू होगा नया नियम
SBI का यह नया नियम पूरी तरह से BSBD यानी बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट से जुड़े ग्राहकों पर केंद्रित है। ये वे खाते होते हैं, जो आमतौर पर बैंक की शाखा के माध्यम से खोले जाते हैं और जिनमें न्यूनतम बैलेंस रखने की बाध्यता नहीं होती। सामान्य बचत खाताधारकों या अन्य प्रीमियम खातों वाले ग्राहकों पर यह नया नियम लागू नहीं होगा। इसलिए सबसे पहले ग्राहकों को यह समझना जरूरी है कि क्या उनका खाता इस श्रेणी में आता है, ताकि वे समय रहते अपने कैश निकासी के तरीकों में जरूरी बदलाव कर सकें।
महीने में कितनी बार निकासी रहेगी मुफ्त
भारतीय स्टेट बैंक ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए स्पष्ट किया है कि BSBD खाताधारकों को हर महीने एक तय संख्या में मुफ्त कैश निकालने की सुविधा मिलती रहेगी। नए नियम के तहत भी ग्राहक महीने में 4 बार तक कैश निकाल सकते हैं, जिस पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। हालांकि इस तय सीमा से ज्यादा बार निकासी करने पर हर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर ग्राहकों को 15 रुपये का चार्ज देना होगा, और इसके साथ लागू GST भी अलग से चुकानी पड़ेगी। यानी सीधे शब्दों में कहें तो महीने में चार बार तक कैश निकालना पूरी तरह मुफ्त रहेगा, लेकिन इसके बाद हर ट्रांजैक्शन आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डालेगा।
डिजिटल ट्रांजैक्शन पर नहीं पड़ेगा कोई असर
SBI ने अपने ग्राहकों को यह भी भरोसा दिलाया है कि यह नया चार्ज सिर्फ फिजिकल कैश निकासी तक ही सीमित रहेगा और डिजिटल लेनदेन पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। इसका मतलब यह है कि ग्राहक पहले की तरह ही UPI, नेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग के जरिए डिजिटल पेमेंट बिना किसी सीमा और अतिरिक्त शुल्क के जारी रख सकते हैं। बैंक की इस स्पष्टता से यह साफ हो जाता है कि नया नियम केवल उन ग्राहकों को प्रभावित करेगा, जो तय सीमा से ज्यादा बार भौतिक रूप से नकद राशि निकालते हैं, जबकि डिजिटल माध्यमों को इस्तेमाल करने वालों के लिए स्थिति पहले जैसी ही बनी रहेगी।
AePS ट्रांजैक्शन के नियम में भी हुआ बदलाव
SBI ATM चार्ज के इस नए नियम के साथ-साथ बैंक ने आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम यानी AePS से जुड़े ट्रांजैक्शन के नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पहले AePS के जरिए की जाने वाली निकासी को डिजिटल लेनदेन के दायरे में रखा जाता था, जिसके चलते इसे महीने की 4 फ्री कैश निकासी की सीमा में नहीं गिना जाता था। लेकिन अब बैंक ने इस विशेष छूट को पूरी तरह हटा दिया है। इसका सीधा असर यह होगा कि अब AePS के माध्यम से की जाने वाली नकद निकासी को भी सामान्य कैश ट्रांजैक्शन की तरह ही नए नियमों के दायरे में रखा जाएगा, जिससे इस माध्यम का इस्तेमाल करने वाले ग्रामीण और छोटे ग्राहकों पर भी असर पड़ सकता है।
SBI पहले भी कर चुका है कई बड़े बदलाव
यह पहली बार नहीं है जब भारतीय स्टेट बैंक ने अपने नियमों में इस तरह का बदलाव किया हो। इससे पहले अगस्त महीने में बैंक ने 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की घरेलू बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में भी संशोधन किया था। बैंक की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, ये नई ब्याज दरें 15 अगस्त से प्रभावी हो चुकी हैं। इस तरह के लगातार बदलाव यह दर्शाते हैं कि बैंक अपनी नीतियों को समय-समय पर अपडेट करता रहता है, ताकि परिचालन को बेहतर बनाया जा सके।
वित्तीय प्रदर्शन में भी दर्ज हुई अच्छी बढ़त
नियमों में बदलाव के साथ-साथ SBI ने अपने वित्तीय प्रदर्शन के मोर्चे पर भी बेहतर नतीजे दर्ज किए हैं। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान बैंक का नेट प्रॉफिट 21,121 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही के 19,160 करोड़ रुपये के मुकाबले 10.23 प्रतिशत ज्यादा है। इस आंकड़े से साफ है कि नियमों में बदलाव के बावजूद बैंक का समग्र कारोबार मजबूत बना हुआ है, और यह बढ़त बैंक की वित्तीय स्थिरता को भी दर्शाती है।
ग्राहकों के लिए क्या रखनी होगी सावधानी
नए नियम के लागू होने से पहले BSBD खाताधारकों को अपनी कैश निकासी की आदतों पर गौर करना जरूरी हो गया है। अगर कोई ग्राहक महीने में चार बार से ज्यादा नकद निकासी करता है, तो उसे अब इस आदत पर पुनर्विचार करना होगा, क्योंकि हर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर उसे 15 रुपये और उस पर लगने वाला GST अतिरिक्त रूप से देना पड़ेगा। ऐसे में जरूरी है कि ग्राहक डिजिटल भुगतान के विकल्पों को ज्यादा से ज्यादा अपनाएं, ताकि अनावश्यक शुल्क से बचा जा सके और उनका मासिक बजट भी प्रभावित न हो।
अक्टूबर से बैंकिंग क्षेत्र में कई बदलाव
गौरतलब है कि यह सिर्फ SBI ATM चार्ज से जुड़ा अकेला बदलाव नहीं है, बल्कि पूरे बैंकिंग सेक्टर में अक्टूबर महीने से कई नए नियम लागू होने जा रहे हैं। 15 अक्टूबर से UPI लेनदेन पर भी चार्ज लगने की खबर सामने आई है, जिससे साफ है कि आने वाले हफ्तों में ग्राहकों को अपने वित्तीय लेनदेन के तरीकों में सतर्कता बरतनी होगी। ऐसे में जरूरी है कि सभी बैंक ग्राहक अपने-अपने बैंकों की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखें, ताकि किसी भी नए नियम की जानकारी समय पर मिल सके।
भारतीय स्टेट बैंक का यह नया कैश निकासी नियम खासतौर पर BSBD खाताधारकों के लिए बड़ा बदलाव लेकर आया है, जिसमें महीने में चार बार तक फ्री निकासी की सुविधा तो बरकरार रहेगी, लेकिन उसके बाद हर ट्रांजैक्शन पर शुल्क देना होगा। डिजिटल लेनदेन पर इस बदलाव का कोई असर न होना ग्राहकों के लिए राहत की बात जरूर है, लेकिन AePS ट्रांजैक्शन को लेकर हुए बदलाव से ग्रामीण इलाकों के ग्राहक प्रभावित हो सकते हैं। कुल मिलाकर 1 अक्टूबर से पहले सभी संबंधित ग्राहकों को अपने लेनदेन के तरीकों की समीक्षा कर लेनी चाहिए, ताकि अनावश्यक शुल्क से बचा जा सके और बैंकिंग अनुभव सहज बना रहे।
Read More Here:-
BJP Election Spending: BJP ने 5 राज्यों के चुनाव में खर्च किए ₹529 करोड़, बंगाल में सबसे ज्यादा खर्च