Anurag Kashyap: बिना देखे फिल्म पर ज्ञान बांट रहे अनुराग कश्यप? ‘गोंधल’ के डायरेक्टर संतोष दावखर ने लगाई क्लास

Anurag Kashyap: बिना देखे फिल्म पर ज्ञान बांट रहे अनुराग कश्यप? 'गोंधल' के डायरेक्टर संतोष दावखर ने लगाई क्लास

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Anurag Kashyap: बॉलीवुड में एक बार फिर भारत की ऑस्कर एंट्री को लेकर बहस छिड़ गई है, और इस बार यह विवाद फिल्ममेकर अनुराग कश्यप के बयान से शुरू होकर मराठी फिल्म ‘गोंधल’ के डायरेक्टर संतोष दावखर तक जा पहुंचा है। दरअसल अनुराग कश्यप ने एक इंटरव्यू के दौरान भारत की ओर से ऑस्कर के लिए चुनी जाने वाली फिल्मों की चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने यह भी कहा कि देश अक्सर गलत फिल्में चुनता है, और जब सही मौका मिलता है तब भी उसे गंवा दिया जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्होंने ‘गोंधल’ समेत इस साल ऑस्कर के लिए भेजी गई कई फिल्में अभी देखी ही नहीं हैं। अनुराग कश्यप के इस बयान के बाद ‘गोंधल’ के निर्देशक संतोष दावखर ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लोगों से अपील की कि वे फिल्म देखे बिना उस पर फैसला न सुनाएं। इस पूरे मामले ने फिल्म इंडस्ट्री में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

Anurag Kashyap ने उठाए ऑस्कर चयन प्रक्रिया पर सवाल

एक हालिया इंटरव्यू के दौरान अनुराग कश्यप ने भारत की ऑस्कर एंट्री को लेकर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि भारत अक्सर गलत फिल्में चुनता है और जब वाकई अच्छी फिल्मों को मौका देने का समय आता है, तब भी देश उस अवसर को गंवा देता है। इस दौरान उन्होंने उदाहरण के तौर पर ‘द लंचबॉक्स’ और ‘ऑल वी इमेजिन ऐज लाइट’ जैसी फिल्मों का जिक्र किया, जिन्हें उनके मुताबिक ऑस्कर एंट्री के लिए बेहतर दावेदार माना जा सकता था। अनुराग ने आगे यह भी कहा कि पूरी चयन प्रक्रिया में बहुत ज्यादा राजनीति हावी रहती है, जिसके चलते सही मायने में योग्य फिल्में अक्सर पीछे रह जाती हैं।

फिल्म देखे बिना ही उठाए सवाल, खुद की स्वीकारोक्ति

अनुराग कश्यप के बयान में सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि उन्होंने खुद स्वीकार किया कि उन्होंने ‘गोंधल’ या इस साल ऑस्कर के लिए भेजी गई अन्य फिल्मों को अभी तक देखा ही नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने मौजूदा चयन प्रक्रिया और उसकी योग्यता पर सीधी टिप्पणी कर दी, हालांकि साथ ही उन्होंने यह भी माना कि बिना फिल्में देखे इस पर टिप्पणी करना जल्दबाजी भरा फैसला हो सकता है। अनुराग के इसी विरोधाभासी बयान ने पूरे विवाद को और हवा दे दी, क्योंकि एक तरफ वे चयन प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे थे तो दूसरी तरफ खुद स्वीकार कर रहे थे कि उन्होंने फिल्म देखी ही नहीं है।

‘गोंधल’ के डायरेक्टर संतोष दावखर ने दिया करारा जवाब

अनुराग कश्यप के इस बयान के बाद ‘गोंधल’ के निर्देशक संतोष दावखर ने सोशल मीडिया पर इसका जवाब दिया। उन्होंने साफ किया कि वे अनुराग कश्यप और उनकी फिल्ममेकिंग का बेहद सम्मान करते हैं, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने एक ऐसी दिलचस्प बात भी साझा की जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। संतोष के मुताबिक, 26 अप्रैल को बेंगलुरु से मुंबई जाने वाली एक फ्लाइट में उनकी मुलाकात खुद अनुराग कश्यप से हुई थी, जहां उन्होंने अपनी फिल्म ‘गोंधल’ के बारे में विस्तार से बताया था।

फ्लाइट में हुई मुलाकात का जिक्र

संतोष दावखर ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में बताया कि उस फ्लाइट यात्रा के दौरान जब उन्होंने अनुराग कश्यप को अपनी फिल्म के बारे में जानकारी दी, तो अनुराग ने कहा था कि उन्होंने इस फिल्म के बारे में पहले कभी सुना नहीं और न ही इसे देखा है, लेकिन वे जल्द ही यह फिल्म जरूर देखेंगे। संतोष ने आगे स्पष्ट किया कि उस मुलाकात के बाद से लेकर अब तक न तो फिल्म सार्वजनिक रूप से रिलीज हुई है और न ही मुंबई में इसकी कोई स्क्रीनिंग आयोजित की गई है। ऐसे में उन्होंने दर्शकों और आलोचकों दोनों से अपील की कि वे फिल्म देखे बिना उस पर कोई राय न बनाएं।

‘फिल्म देखने के बाद ही बनाएं राय’ – संतोष की अपील

अपनी प्रतिक्रिया में संतोष दावखर ने साफ तौर पर कहा कि वे चाहते हैं कि लोग पहले ‘गोंधल’ को देखें, उसके बाद ही उसकी ऑस्कर एंट्री को लेकर अपनी राय बनाएं। उन्होंने अपनी फिल्म को एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर करार देते हुए बताया कि इसमें मराठी संस्कृति और वैश्विक अपील को खूबसूरती से जोड़ने की कोशिश की गई है। संतोष ने यह भी कहा कि फिल्म फ्रेटरनिटी से बाहर आने वाले एक डेब्यू फिल्ममेकर के तौर पर उनके लिए भारत का प्रतिनिधित्व करना बेहद बड़ी जिम्मेदारी है, और उन्हें पूरा भरोसा है कि उनकी टीम देश को निराश नहीं करेगी।

क्या है ‘गोंधल’ फिल्म की कहानी

‘गोंधल’ एक मराठी मनोवैज्ञानिक थ्रिलर फिल्म है, जिसकी पृष्ठभूमि महाराष्ट्र की पारंपरिक गोंधल लोक परंपरा पर आधारित है। फिल्म की कहानी एक नवविवाहिता के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी शादी में खुद को फंसा हुआ महसूस करती है और धीरे-धीरे गोंधल की पारंपरिक रस्म को एक खतरनाक खेल में तब्दील कर देती है। फिल्म में ईशिता देशमुख, योगेश सोहोनी, किशोर कदम और सुरेश विश्वकर्मा जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। इस फिल्म के लिए निर्देशक संतोष दावखर को इफ्फी यानी अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में सिल्वर पीकॉक फॉर बेस्ट डायरेक्टर का प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुका है, जो फिल्म की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।

इंडस्ट्री में छिड़ी नई बहस

अनुराग कश्यप और संतोष दावखर के बीच का यह विवाद अब पूरी फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा का विषय बन गया है। यह घटना एक बार फिर इस सवाल को जन्म देती है कि क्या किसी फिल्म या चयन प्रक्रिया पर टिप्पणी करने से पहले उसे देखना और समझना जरूरी है। कई फिल्म प्रेमी और आलोचक इस बहस में अपनी-अपनी राय दे रहे हैं, जहां कुछ लोग अनुराग कश्यप की बेबाक राय को सही ठहरा रहे हैं तो कुछ संतोष दावखर की अपील को वाजिब मान रहे हैं। भारत की ऑस्कर एंट्री की चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार यह बहस सीधे फिल्ममेकर्स के बीच की तीखी बयानबाजी तक पहुंच गई है।

आगे क्या रहेगी फिल्म की राह

फिलहाल ‘गोंधल’ की सार्वजनिक रिलीज और मुंबई में स्क्रीनिंग को लेकर अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन फिल्म को लेकर बना यह विवाद निश्चित रूप से इसकी चर्चा को और बढ़ा रहा है। संतोष दावखर की टीम का दावा है कि वे जल्द ही फिल्म को बड़े पर्दे पर दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास करेंगे। भारत की ऑस्कर एंट्री के तौर पर ‘गोंधल’ अब सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक बहस का प्रतीक बन चुकी है, जिस पर आने वाले दिनों में और प्रतिक्रियाएं सामने आने की उम्मीद है।

अनुराग कश्यप और संतोष दावखर के बीच का यह विवाद भारत की ऑस्कर चयन प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस को एक नया आयाम देता है। जहां अनुराग कश्यप ने बिना फिल्म देखे ही चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए, वहीं संतोष दावखर ने संयमित लेकिन दमदार तरीके से जवाब देते हुए दर्शकों से निष्पक्ष राय बनाने की अपील की। ‘गोंधल’ जैसी मराठी फिल्म का भारत की ओर से ऑस्कर भेजा जाना खुद में एक बड़ी उपलब्धि है, और अब देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद फिल्म की चर्चा और उसकी पहुंच पर किस तरह असर डालता है।

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