Bihar Chaur Vikas Yojana: बिहार में बेकार पड़ी चौर जमीन से अब होगी बंपर कमाई, मछली पालन पर सरकार दे रही 50 प्रतिशत तक सब्सिडी
Bihar Chaur Vikas Yojana: बिहार में बेकार पड़ी चौर जमीन से अब होगी बंपर कमाई, मछली पालन पर सरकार दे रही 50 प्रतिशत तक सब्सिडी
Bihar Chaur Vikas Yojana: बिहार में बेकार और अनुपयोगी पड़ी चौर भूमि अब किसानों के लिए आमदनी का बड़ा जरिया बनने जा रही है। राज्य सरकार ने डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस योजना के तहत राज्य में बड़े पैमाने पर मौजूद निजी चौर भूमि को मत्स्य आधारित समेकित जलकृषि के लिए विकसित किया जाएगा, जिससे मछली पालन के साथ-साथ कृषि, बागवानी और कृषि वानिकी को भी बढ़ावा मिलेगा। सबसे खास बात यह है कि इस योजना के तहत लाभुकों को इकाई लागत पर 50 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाएगा, जबकि उद्यमी आधारित मॉडल में 40 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान रखा गया है। सरकार का मकसद चौर भूमि में उपलब्ध जल और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर किसानों की आय बढ़ाना है। आइए जानते हैं इस योजना से जुड़ी पूरी जानकारी।
क्यों शुरू की गई मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना
बिहार में बड़ी मात्रा में चौर भूमि ऐसी है, जो सालों से बेकार पड़ी रहती है और इसका कोई उत्पादक उपयोग नहीं हो पाता। इसी समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना की शुरुआत की है। इस योजना के जरिए राज्य में उपलब्ध निजी चौर भूमि को मत्स्य आधारित समेकित जलकृषि के लिए विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसका सीधा उद्देश्य चौर भूमि में मौजूद पानी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल करते हुए उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाना है, ताकि किसानों की आमदनी में इजाफा हो सके।
किसानों की आय बढ़ाने पर है सरकार का पूरा फोकस
इस योजना के तहत सरकार ने दो अलग-अलग मॉडल तैयार किए हैं, जिनमें लाभुक आधारित चौर विकास और उद्यमी आधारित चौर विकास मॉडल शामिल हैं। इन दोनों मॉडलों के जरिए अलग-अलग वर्ग के किसानों और उद्यमियों को चौर भूमि के विकास से जोड़ा जाएगा। मछली पालन के साथ-साथ कृषि और बागवानी गतिविधियों को भी इस योजना में शामिल किया गया है, ताकि किसानों को एक ही जमीन से कई स्रोतों से आमदनी हासिल करने का मौका मिल सके। सरकार का मानना है कि इस तरह की समेकित खेती पद्धति से चौर भूमि का पूरा इस्तेमाल संभव हो पाएगा।
तालाब निर्माण के लिए तय की गई है यूनिट कॉस्ट
योजना के तहत सरकार ने तालाब निर्माण की लागत भी स्पष्ट रूप से निर्धारित कर दी है। एक हेक्टेयर क्षेत्र में दो तालाबों के निर्माण के लिए प्रति हेक्टेयर 8.88 लाख रुपये की इकाई लागत तय की गई है, जबकि चार तालाबों के निर्माण के लिए यह लागत 7.32 लाख रुपये रखी गई है। वहीं एक तालाब के निर्माण के साथ-साथ भूमि विकास के लिए 9.69 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की इकाई लागत निर्धारित की गई है। इन सभी श्रेणियों में सभी वर्ग के लाभुकों को इकाई लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा, जो किसानों के लिए काफी राहत भरा कदम माना जा रहा है।
उद्यमी आधारित मॉडल में मिलेगा 40 प्रतिशत अनुदान
जो आवेदक व्यक्तिगत लाभुक की श्रेणी में नहीं, बल्कि उद्यमी के रूप में इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उनके लिए अलग प्रावधान रखा गया है। उद्यमी आधारित चौर विकास मॉडल के तहत आवेदकों को इकाई लागत का 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। यह मॉडल खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो बड़े स्तर पर मत्स्य पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं और इसके लिए व्यावसायिक दस्तावेजों के साथ आवेदन करने में सक्षम हैं।
व्यक्तिगत और समूह लाभुकों के लिए जरूरी दस्तावेज
इस योजना का लाभ उठाने के लिए व्यक्तिगत या समूह में आवेदन करने वाले लाभुकों को कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें स्व-अभिप्रमाणित दो पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड और जाति प्रमाण-पत्र शामिल हैं। इसके अलावा जो लोग समूह में मिलकर आवेदन कर रहे हैं, उन्हें समूह में कार्य करने की सहमति से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे। यह प्रक्रिया आवेदन को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए तय की गई है।
उद्यमी लाभुकों के लिए अलग दस्तावेजों की सूची
उद्यमी श्रेणी के तहत आवेदन करने वाले लाभुकों के लिए दस्तावेजों की सूची थोड़ी अलग और विस्तृत है। इन्हें स्व-अभिप्रमाणित निबंधन प्रमाण-पत्र के साथ पिछले तीन वर्षों का अंकेक्षण और आयकर रिटर्न प्रस्तुत करना होगा। इसके अतिरिक्त पैन कार्ड, जीएसटी पंजीकरण, भू-स्वामित्व प्रमाण-पत्र और लीज एकरारनामा जैसे दस्तावेज भी जरूरी माने गए हैं। यह प्रक्रिया इसलिए रखी गई है ताकि योजना का लाभ वास्तव में पात्र और गंभीर आवेदकों तक ही पहुंच सके।
मत्स्य प्रशिक्षण प्राप्त आवेदकों को मिलेगी प्राथमिकता
योजना के तहत चयन प्रक्रिया में उन आवेदकों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने मत्स्य पालन से जुड़ा प्रशिक्षण प्राप्त किया हो या जिनके पास मत्स्य आधारित उद्यम चलाने का अनुभव हो। इस तरह की प्राथमिकता व्यवस्था से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि योजना का लाभ उन्हीं लोगों तक पहुंचे, जो इसे सफलतापूर्वक चला सकें और वास्तव में चौर भूमि का उत्पादक उपयोग कर सकें। इससे योजना की सफलता दर बढ़ने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
कैसे और कहां करें आवेदन
इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक किसान और उद्यमी मत्स्य निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट fisheries.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा जिन लोगों को ऑनलाइन प्रक्रिया में दिक्कत आती है, वे अपने नजदीकी जिला मत्स्य कार्यालय में जाकर भी योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी हासिल कर सकते हैं और वहीं से आवेदन प्रक्रिया में मदद ले सकते हैं।
मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना बिहार के उन किसानों के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकती है, जिनकी जमीन सालों से बेकार पड़ी है। मछली पालन के साथ कृषि और बागवानी को जोड़कर सरकार ने एक समेकित मॉडल तैयार किया है, जिससे किसानों की आमदनी में स्थायी बढ़ोतरी की उम्मीद है। 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी और आसान ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया इस योजना को किसानों के लिए और आकर्षक बनाती है। जो किसान अपनी चौर भूमि का सही इस्तेमाल करना चाहते हैं, उनके लिए यह योजना एक बेहतरीन मौका साबित हो सकती है।
Read More Here:-
BOB SO Recruitment 2026: स्पेशलिस्ट ऑफिसर के पदों पर आवेदन का आज आखिरी मौका, जानें पूरी डिटेल