JPSC Scam: 11 अभ्यर्थियों से वसूले गए 1.10 करोड़ रुपये, लैपटॉप से मिली 24 नामों की लिस्ट
झारखंड CID की जांच में कथित भर्ती सिंडिकेट का खुलासा। मुख्य बिचौलिए के लैपटॉप से 24 अभ्यर्थियों की सूची मिली
JPSC Scam: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित धांधली, अनियमितताओं और पेपर लीक से जुड़ा मामला अब राज्य का सबसे बड़ा प्रशासनिक और भर्ती घोटाला बनता जा रहा है। प्रशासनिक सेवाओं में सीधी नियुक्ति और चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये की अवैध उगाही के संगठित सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। अपराध अनुसंधान विभाग (CID) द्वारा विशेष अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट और तकनीकी जांच से यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि एक मुख्य बिचौलिए ने महज प्रारंभिक परीक्षा (PT) पास कराने के नाम पर 11 अभ्यर्थियों से 1.10 करोड़ रुपये की भारी रकम वसूली थी। इसके अतिरिक्त, आरोपी के लैपटॉप के फॉरेंसिक विश्लेषण में 24 अभ्यर्थियों की एक संदिग्ध ‘सेटिंग लिस्ट’ बरामद की गई है, जिनमें से 11 अभ्यर्थियों का नाम जेपीएससी द्वारा जारी प्रारंभिक परीक्षा परिणाम में सफल अभ्यर्थियों की सूची में पहले से दर्ज पाया गया। जांच एजेंसी ने डिजिटल साक्ष्यों, बैंक लेन-देन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स के माध्यम से इस पूरे भर्ती रैकेट की परतें खोल दी हैं।
JPSC Scam: मुख्य बिचौलिए के लैपटॉप से बरामद हुई 24 अभ्यर्थियों की ‘सेटिंग लिस्ट’
सीआईडी की विशेष जांच टीम (SIT) द्वारा लोहरदगा निवासी मुख्य बिचौलिए बुद्धेश्वर भगत के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जब्ती और फॉरेंसिक लैब से प्राप्त विश्लेषण रिपोर्ट में कई अहम डिजिटल साक्ष्य उजागर हुए हैं। जांच एजेंसी को आरोपी के निजी लैपटॉप की हार्ड ड्राइव से एक गुप्त डिजिटल दस्तावेज मिला है, जिसमें 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा से जुड़े 24 विशिष्ट अभ्यर्थियों के रोल नंबर और नाम दर्ज थे। सीआईडी ने जांच में इसे भर्ती सिंडिकेट की गोपनीय ‘सेटिंग लिस्ट’ करार दिया है।
चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि जब सीआईडी के जांच अधिकारियों ने इस बरामद सूची का मिलान आयोग द्वारा घोषित आधिकारिक पीटी परीक्षा परिणाम से किया, तो उस सूची में दर्ज 24 में से 11 अभ्यर्थी वास्तव में परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके थे। इस प्रत्यक्ष साक्ष्य के सामने आने के बाद जांच एजेंसी ने संबंधित सभी 11 सफल अभ्यर्थियों और उनके परिजनों के संपर्कों, परीक्षा केंद्रों और ओएमआर शीट्स की गहन तकनीकी व भौतिक समीक्षा शुरू कर दी है। सीआईडी का स्पष्ट आरोप है कि आयोग की आंतरिक व्यवस्था अथवा परीक्षा संचालन से जुड़े बाहरी तत्वों के साथ मिलकर इन अभ्यर्थियों को अनुचित साधन उपलब्ध कराए गए थे।
11 अभ्यर्थियों से 1.10 करोड़ की वसूली और भाईयों से 40 लाख का सौदा
हिरासत में लिए गए बिचौलिए बुद्धेश्वर भगत से लंबी पूछताछ के बाद धन के अवैध लेन-देन का पूरा नेटवर्क सामने आ गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, 14वीं प्रारंभिक परीक्षा में अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए कुल 24 अभ्यर्थियों अथवा उनके परिजनों ने दलालों से सीधा संपर्क साधा था, जिनमें से 11 अभ्यर्थियों ने तयशुदा अग्रिम राशि का भुगतान कर दिया था।
प्रत्येक अभ्यर्थी से प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कराने के नाम पर औसतन 10 लाख रुपये की राशि वसूली गई, जिसके तहत कुल 1.10 करोड़ रुपये की पहली किस्त सिंडिकेट तक पहुंचाई गई। इसी कड़ी में हजारीबाग निवासी दो सगे भाइयों—दिलीप कुमार राणा और ओमप्रकाश राणा—का मामला भी प्रमुखता से सामने आया है। पूछताछ के विवरण के अनुसार, इन दोनों भाइयों को प्रारंभिक से लेकर अंतिम चयन तक पहुंचाने के लिए 20-20 लाख रुपये में अलग से विशेष सौदा तय किया गया था। जांच एजेंसी ने दोनों भाइयों को तलब कर उनके वित्तीय लेन-देन और संपर्कों के संबंध में कड़ाई से पूछताछ की है।
अंतिम चयन के लिए एक करोड़ तक का कथित ‘रेट कार्ड’
सीआईडी द्वारा अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों में भर्ती सिंडिकेट के संगठित ‘रेट कार्ड’ का भी पर्दाफाश हुआ है। पूछताछ के दौरान आरोपी बुद्धेश्वर भगत ने स्वीकार किया कि सिविल सेवा के अलग-अलग चरणों और विभिन्न वर्गों के अभ्यर्थियों के लिए चयन का अलग-अलग मूल्य निर्धारित किया गया था। सामान्य (General) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अभ्यर्थियों के लिए अंतिम मेरिट लिस्ट में नाम दर्ज कराने का कथित सौदा 1 करोड़ रुपये तक में तय किया जाता था, जबकि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) संवर्ग के अभ्यर्थियों के लिए यह दर 80 लाख रुपये रखी गई थी।
इस सौदेबाजी की कार्यप्रणाली चरणबद्ध तरीके से संचालित होती थी। प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए 10 लाख रुपये अग्रिम के तौर पर लिए जाते थे, जबकि मुख्य (Mains) परीक्षा में बैठने और साक्षात्कार (Interview) तक पहुंचने पर कुल राशि का 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा वसूला जाता था। शेष बची हुई अंतिम राशि अंतिम परिणाम में नाम आने और नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद लिए जाने की सहमति बनाई जाती थी।
हवाला, आरटीजीएस और शेल कंपनियों के जरिए पैसों की हेराफेरी
जांच एजेंसी ने आरोपियों के वित्तीय साम्राज्य को ध्वस्त करने के लिए विस्तृत बैंकिंग फोरेंसिक जांच की है। चार्जशीट के अनुसार, इस पूरे रैकेट ने नकद राशि के साथ-साथ डिजिटल ट्रांसफर (RTGS और UPI) और बड़े पैमाने पर हवाला नेटवर्क का उपयोग किया। अभ्यर्थियों से वसूली गई अवैध संपत्ति को छुपाने के लिए कई संदिग्ध और फर्जी कागजी कंपनियों (Shell Companies) के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया, जहां से यह रकम रियल एस्टेट और अघोषित संपत्तियों में निवेश की गई।
सीआईडी ने कई बैंकों से आरोपियों के बचत और चालू खातों की पासबुक, खाता खोलने वाले फार्म, केवाईसी दस्तावेज और शाखाओं के सीसीटीवी फुटेज एकत्र किए हैं। इसके साथ ही विभिन्न आरोपियों, बिचौलियों और मध्यस्थों के मोबाइल फोनों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और टॉवर लोकेशन का मिलान किया गया है। इन तकनीकी साक्ष्यों से यह प्रमाणित होता है कि परीक्षा से ठीक पहले और परिणाम जारी होने के दौरान आरोपी लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे और हवाला ऑपरेटरों के साथ नियमित बातचीत कर रहे थे।
JPSC Scam: अब तक 34 आरोपियों की गिरफ्तारी, दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल
14वीं जेपीएससी परीक्षा में हुई इस सुनियोजित धांधली के खिलाफ सीआईडी की कार्रवाई लगातार जारी है। नवंबर 2026 तक की आधिकारिक स्थिति के अनुसार, इस बड़े भर्ती घोटाले में अब तक कुल 34 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच एजेंसी ने विशेष निगरानी अदालत में अपनी दूसरी पूरक (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट भी दाखिल कर दी है, जिसमें मुख्य बिचौलिए बुद्धेश्वर भगत और उसके सहयोगी रमेश कुमार समेत 10 नए आरोपियों को नामजद किया गया है।
इस बहुचर्चित खुलासे ने राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता, गोपनीयता और झारखंड लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्यभर के लाखों निष्ठावान और दिन-रात मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों में इस संगठित भ्रष्टाचार को लेकर भारी आक्रोश है। सीआईडी वर्तमान में सिंडिकेट से जुड़े अन्य संदिग्ध सफेदपोशों, आयोग के संभावित सहयोगियों और वित्तीय लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है, ताकि इस पूरे षड्यंत्र को कानूनी रूप से उसके अंजाम तक पहुंचाया जा सके।
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