Delhi-NCR GRAP-2: दिल्ली-NCR में ग्रैप-2 लागू, पार्किंग शुल्क दोगुना और दफ्तरों के समय में बदलाव
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने के बीच GRAP-2 लागू होने का दावा किया गया है।
Delhi-NCR GRAP-2: दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ते हुए ‘बेहद खराब’ (Very Poor) श्रेणी में प्रवेश कर गई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में लगातार दर्ज की जा रही इस गिरावट और आगामी दिनों में मौसमी परिस्थितियों के प्रतिकूल होने की आशंका को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 2 नवंबर 2026 को पूरे दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का दूसरा चरण यानी ‘ग्रैप-2’ (GRAP-2) तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। इसके अंतर्गत धूल नियंत्रण, मैकेनिकल स्वीपिंग, डीजल जनरेटर के संचालन पर सख्ती और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने से जुड़े आपातकालीन उपायों को अनिवार्य किया गया है।
इसी क्रम में राजधानी में सर्दियों के दौरान गहराने वाले वायु संकट से निपटने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा अधिसूचित विशेष विंटर एक्शन प्लान के तहत 1 नवंबर से ही कई दीर्घकालिक प्रशासनिक प्रावधान भी सक्रिय कर दिए गए हैं। निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए पार्किंग दरों में तेज बढ़ोतरी, पीक-ऑवर ट्रैफिक को बांटने के लिए सरकारी दफ्तरों के अलग-अलग कामकाजी घंटे और 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) की व्यवस्था को लागू किया गया है। दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले करोड़ों नागरिकों, दैनिक यात्रियों और वाहन चालकों के लिए इन सख्त दिशा-निर्देशों को विस्तार से समझना आवश्यक है।
Delhi-NCR GRAP-2: ग्रैप-2 के तहत पूरे एनसीआर में लागू किए गए कड़े प्रतिबंध
सीएक्यूएम के ग्रैप-2 आदेश के क्रियान्वयन के साथ ही दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के स्थानीय निकायों को धूल नियंत्रण और प्रदूषणकारी तत्वों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। सड़कों पर धूल उड़ने से रोकने के लिए प्रतिदिन वैक्यूम-आधारित मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों का संचालन बढ़ाया जा रहा है और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के शोधित जल तथा धूल-रोधी रसायनों का नियमित छिड़काव सुनिश्चित किया जा रहा है।
निर्माण एवं विध्वंस (C&D) स्थलों पर 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्ट्स पर धूल नियंत्रण पोर्टल के नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराने के लिए विशेष उड़नदस्तों का गठन किया गया है। वहीं, बिजली कटौती के दौरान उपयोग किए जाने वाले डीजल जनरेटर (डीजी सेट) पर व्यापक प्रतिबंध लागू रहेगा; केवल आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, लिफ्ट, मेट्रो संचालन और रेलवे जैसी अनिवार्य जीवनरक्षक सेवाओं को ही सीएनजी अथवा हाइब्रिड मोड में जनरेटर चलाने की अनुमति होगी। निजी और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को नियमित ग्रिड बिजली का उपयोग करने की सख्त हिदायत दी गई है।
पार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी, डीएमआरसी की पार्किंग को मिली विशेष छूट
सड़कों पर निजी कारों और दोपहिया वाहनों की आवाजाही को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से पार्किंग प्रबंधन में बड़ा बदलाव किया गया है। दिल्ली सरकार के विंटर एक्शन प्लान के अनुसार, 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक नगर निगमों और स्थानीय प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाले सभी अधिकृत पार्किंग स्थलों पर सामान्य पार्किंग शुल्क को दोगुना करने का निर्देश जारी किया गया है।
हालांकि, सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) द्वारा संचालित पार्किंग स्थलों को इस वृद्धि से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि लोग अपनी निजी गाड़ियों को मेट्रो स्टेशनों पर सामान्य दरों पर पार्क करें और लंबी दूरी के सफर के लिए मेट्रो नेटवर्क तथा डीटीसी की इलेक्ट्रिक व सीएनजी बसों का उपयोग करें, जिससे मुख्य मार्गों पर वाहनों का जाम और कार्बन उत्सर्जन न्यूनतम हो सके।
ट्रैफिक जाम से राहत के लिए सरकारी दफ्तरों के समय में फेरबदल
सड़कों पर एक ही समय में वाहनों का भारी जमावड़ा रोकने और वाहनों से होने वाले धुएं के पीक उत्सर्जन को कम करने के लिए सरकारी महकमों के खुलने और बंद होने के समय में स्पष्ट विभाजन किया गया है। यह व्यवस्था भी 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेगी।
इस संशोधित व्यवस्था के तहत नगर निगम दिल्ली (MCD) के सभी कार्यालय प्रातः 8:30 बजे खुलेंगे और शाम 5:00 बजे बंद होंगे। वहीं, दिल्ली सरकार के विभिन्न सचिवालयों, निदेशालयों और अधीनस्थ कार्यालयों का संचालन प्रातः 10:00 बजे से प्रारंभ होकर शाम 6:30 बजे तक किया जाएगा। दोनों स्तरों के कार्यालयों के समय में डेढ़ घंटे का यह अंतर सुबह और शाम के व्यस्ततम समय में मुख्य चौराहों पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम को कम करने में सहायक होगा।
सरकारी और निजी प्रतिष्ठानों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम का नियम
सड़कों पर दैनिक यात्रियों की संख्या को घटाने के लिए सरकार ने कार्यस्थलों पर कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर भी अहम दिशा-निर्देश दिए हैं। 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 की अवधि के दौरान दिल्ली सरकार के गैर-आपातकालीन विभागों में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति का नियम लागू रहेगा, जबकि शेष 50 प्रतिशत कर्मियों को घर से ही कार्य करने का निर्देश दिया गया है।
निजी कॉरपोरेट दफ्तरों, आईटी कंपनियों और गैर-सरकारी संस्थानों से भी पुरजोर अपील की गई है कि वे अपने कर्मचारियों के लिए 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम की नीति का पालन करें तथा कार्यालय आने वाले कर्मचारियों के लिए साझा कैब, शटल व कार पूलिंग की व्यवस्था करें। हालांकि, यह प्रतिबंध स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं, दमकल, पुलिस, आपदा प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता और विद्युत जैसी आवश्यक एवं आपातकालीन सेवाओं पर लागू नहीं होगा।
गैर-बीएस VI बाहरी वाहनों के प्रवेश पर रोक और निर्माण पर पहरा
अंतरराज्यीय सीमाओं से दिल्ली में प्रवेश करने वाले प्रदूषणकारी वाहनों पर नियंत्रण के लिए दिल्ली पुलिस और परिवहन विभाग ने सीमाओं पर कड़ा पहरा बैठा दिया है। 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली की सीमाओं से अन्य राज्यों में पंजीकृत ऐसे मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा जो बीएस-VI (BS-VI) मानकों को पूरा नहीं करते हैं।
केवल इलेक्ट्रिक वाहनों, पूर्णतः सीएनजी आधारित गाड़ियों और आवश्यक खाद्य व चिकित्सा सामग्री ले जाने वाले ट्रकों को ही राजधानी की सीमा में आने की अनुमति दी जा रही है। इसके साथ ही खुले में कचरा, पत्ते या प्लास्टिक जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी पर्यावरण क्षतिपूर्ति जुर्माना लगाया जा रहा है। निर्माण स्थलों पर धूल-रोधी तिरपाल न लगाने या खुले में मलबा डालने पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।
Delhi-NCR GRAP-2: नागरिकों के लिए स्वास्थ्य परामर्श और एहतियाती कदम
वायु गुणवत्ता के ‘बेहद खराब’ स्तर पर पहुंचने से बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और अस्थमा व ब्रोंकाइटिस जैसी श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य जोखिम काफी बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने परामर्श दिया है कि सुबह और देर शाम के समय खुले वातावरण में जॉगिंग, साइकिलिंग या भारी व्यायाम करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय हवा की निचली परत में सूक्ष्म कण (PM 2.5 और PM 10) घनीभूत रहते हैं।
नागरिकों को बाहर निकलते समय प्रमाणित N-95 या एंटी-पॉल्यूशन मास्क का उपयोग करने की सलाह दी गई है। इसके अतिरिक्त, घरों में वेंटिलेशन का ध्यान रखने, आवश्यकता पड़ने पर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करने और किसी भी प्रकार के कचरे को जलाने से परहेज कर प्रशासन को सहयोग देने का अनुरोध किया गया है। ग्रैप-2 और विंटर एक्शन प्लान के इन समन्वित कदमों का उद्देश्य आने वाले दिनों में मौसमी प्रतिकूलता के बावजूद दिल्ली-एनसीआर के वायुमंडल को ‘गंभीर’ (Severe) स्थिति में जाने से बचाना है।
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