Rahul Gandhi News: ’24 घंटे हो गए मोदी जी…’, राहुल गांधी ने फिर दी PM मोदी को खुली बहस की चुनौती, US डील और अडानी पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमने-सामने बहस की चुनौती दोहराई।
Rahul Gandhi vs PM Modi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तीखे मोड़ पर पहुंच गई है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को आमने-सामने खुली बहस (Open Debate) की चुनौती दोहराते हुए सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता ने कहा कि उनके द्वारा दी गई चुनौती को 24 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय अथवा सरकार की ओर से कोई उत्तर नहीं आया है। राहुल गांधी ने विदेशी संबंधों, राष्ट्रीय सुरक्षा, देशद्रोह के आरोपों, अमेरिका के साथ हुए हालिया समझौतों और अडानी समूह से जुड़े मामलों पर सार्वजनिक मंच पर दूध का दूध और पानी का पानी करने की मांग रखी है। उन्होंने यहां तक पेशकश की है कि प्रधानमंत्री इस बहस के लिए अपनी पसंद का कोई भी मंच, मीडिया समूह अथवा निर्णायक तय कर सकते हैं।
Rahul Gandhi vs PM Modi: 24 घंटे बाद राहुल गांधी ने फिर दी खुली चुनौती
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि चुनौती दिए हुए पूरे 24 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री की तरफ से चुप्पी साधी गई है। राहुल गांधी ने तर्क दिया कि यदि सत्ता पक्ष द्वारा विपक्ष पर लगातार ‘देशद्रोही’ होने या विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया जाता है, तो इस मुद्दे पर जनता के सामने खुली बहस होनी चाहिए ताकि देश को सच का पता चल सके।
राहुल गांधी ने प्रस्ताव रखा कि इस खुली चर्चा में देश के युवाओं, छात्रों और स्वतंत्र मीडिया को शामिल किया जाए ताकि दोनों पक्षों से तीखे और निष्पक्ष सवाल पूछे जा सकें। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में यह भी कहा कि यदि प्रधानमंत्री को किसी स्वतंत्र मॉडरेटर पर आपत्ति है, तो वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत को भी इस बहस का निर्णायक नियुक्त कर सकते हैं।
अमेरिकी समझौते, अडानी विवाद और एपस्टीन केस पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने इस प्रस्तावित बहस का एजेंडा केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रखकर देश के आर्थिक और रणनीतिक निर्णयों से भी जोड़ दिया है। उन्होंने अमेरिका के साथ हाल में संपन्न हुए महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इन सौदों को इतनी जल्दबाजी में क्यों अंतिम रूप दिया गया और क्या इस पर केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) से विधिवत पूर्व अनुमति ली गई थी।
इसके साथ ही उन्होंने उद्योगपति गौतम अडानी के कारोबारी मामलों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे जेफ्री एपस्टीन विवाद का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर संदेह जताया। राहुल गांधी का कहना है कि देश के वित्तीय ढांचे और संसाधनों के आवंटन को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब एक खुली, बिना स्क्रिप्ट वाली बहस में ही सामने आ सकता है।
45 मानहानि मुकदमों का हवाला देकर सरकार को घेरा
अपनी पोस्ट में राहुल गांधी ने अपने कानूनी मुकदमों का उल्लेख करते हुए सत्ता पक्ष पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक बयानों के कारण उनके ऊपर देशभर में लगभग 45 मानहानि के मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं।
राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब उनके अन्य बयानों पर तत्काल कानूनी कार्रवाई और मुकदमे दर्ज हो जाते हैं, तो फिर सत्ता पक्ष के नेता उन पर विदेशी ताकतों के साथ सांठगांठ के जो आरोप लगाते हैं, उन पर कोई कानूनी आधार क्यों नहीं पेश किया जाता? उन्होंने कहा कि बहस के मंच पर इन सभी कानूनी और राजनीतिक पहलुओं पर खुलकर बात की जानी चाहिए। अपने संदेश के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिवाली पर्व की अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं।
विवाद की पृष्ठभूमि: पीएम मोदी का ‘अवरोध पक्ष’ वाला बयान
इस राजनीतिक तकरार की शुरुआत 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती (राष्ट्रीय एकता दिवस) के अवसर पर गुजरात के एकता नगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए संबोधन के बाद हुई थी। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि देश में कुछ राजनीतिक तत्व सकारात्मक ‘विरोध पक्ष’ के स्थान पर विकास विरोधी ‘अवरोध पक्ष’ बन चुके हैं।
पीएम मोदी ने सतर्क करते हुए कहा था कि कुछ ताकतें विदेशी तत्वों और सोशल मीडिया नैरेटिव के माध्यम से भारत की संप्रभुता, एकता और आर्थिक प्रगति को बाधित करने का प्रयास कर रही हैं। प्रधानमंत्री के इसी भाषण को आधार बनाकर कांग्रेस और राहुल गांधी ने पलटवार किया और इसे विपक्ष की देशभक्ति पर अनुचित हमला बताते हुए सीधी बहस की चुनौती दे डाली।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का पलटवार
राहुल गांधी के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी की चुनौती पर तंज कसते हुए कहा कि संसदीय लोकतंत्र में बहस संसद के पटल पर होती है और उच्च स्तरीय विचार-विमर्श परिपक्व राजनेताओं के बीच शोभा देता है।
रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता विदेश यात्राओं के दौरान भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों की छवि धूमिल करते हैं और जब देश में उन पर सवाल उठते हैं, तो वे ध्यान भटकाने के लिए इस प्रकार के स्टंट का सहारा लेते हैं।
Rahul Gandhi vs PM Modi: राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और आगे की राह
संसदीय लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच इस प्रकार की आमने-सामने की बहस अमेरिका जैसी प्रेसिडेंशियल डिबेट व्यवस्था का हिस्सा रही है, लेकिन भारत में ऐसी परंपरा औपचारिक रूप से कभी देखने को नहीं मिली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का यह कदम विपक्ष के आक्रामक तेवर और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी स्थिति को मजबूत दिखाने की रणनीति का हिस्सा है।
फिलहाल प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस बहस को लेकर कोई आधिकारिक सहमति या प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, किंतु सोशल मीडिया और राष्ट्रीय टीवी डिबेट्स में दोनों दलों के प्रवक्ताओं के बीच तीखी बयानबाजी लगातार जारी है।
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