सोने-चांदी के भाव में भूचाल, रिकॉर्ड ऊंचाई से चांदी ₹2.45 लाख सस्ती, आगे क्या होगा?
Gold Silver Price Crash 2026: सोने-चांदी के भाव में भूचाल, रिकॉर्ड ऊंचाई से चांदी ₹2.45 लाख सस्ती, आगे क्या होगा?
Gold Silver Price Crash 2026: मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को हल्की रिकवरी के बाद आज दोनों धातुओं में बिकवाली का दबाव बढ़ा। दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी एक दिन में ₹8,528 प्रति किलो गिरकर ₹1,75,251 पर पहुंच गई। यह नवंबर 2025 के आखिरी हफ्ते के बाद का सबसे निचला स्तर है। सोना भी करीब ₹2,079 प्रति 10 ग्राम गिरकर ₹1,37,863 पर कारोबार कर रहा था।
इन दोनों धातुओं के ऑल टाइम हाई से दूरी काफी बढ़ गई है। चांदी अपने रिकॉर्ड भाव ₹4,20,048 प्रति किलो से लगभग ₹2.45 लाख सस्ती हो चुकी है। सोना भी अपने उच्चतम स्तर ₹1,92,991 प्रति 10 ग्राम से करीब ₹55,100 नीचे है। बाजार में इस गिरावट के पीछे भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता मुख्य कारण बताए जा रहे हैं।
सोने-चांदी की कीमतें इतनी तेजी से क्यों गिर रही हैं?
कीमतों में गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप पर हमला किया है। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब एक प्रतिशत उछल गई। मिडिल ईस्ट दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति वाले क्षेत्रों में से एक है। यहां तनाव बढ़ने से सप्लाई बाधित होने की आशंका रहती है।
कच्चा तेल महंगा रहने से वैश्विक महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा होता है। सोना और चांदी ऐसे निवेश हैं जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता। जब महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ती है तो निवेशक इन धातुओं से पैसा निकालकर बॉन्ड या बैंक डिपॉजिट जैसे विकल्पों में लगाना पसंद करते हैं। इससे मांग कम होती है और कीमतें नीचे आती हैं।
CME FedWatch टूल के आंकड़ों के मुताबिक ट्रेडर्स दिसंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की करीब 75 प्रतिशत संभावना देख रहे हैं। ब्याज दरें ऊंची रहने से सोने-चांदी पर दबाव और बढ़ सकता है। इसके अलावा अमेरिकी मिडटर्म चुनाव और इस हफ्ते आने वाले रोजगार आंकड़ों पर भी नजरें टिकी हुई हैं। मजबूत रोजगार और महंगाई के आंकड़े फेडरल रिजर्व को दरें ऊंची रखने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
ऑल टाइम हाई से कितनी गिरावट आई है और वर्तमान स्तर क्या है?
सोने का ऑल टाइम हाई ₹1,92,991 प्रति 10 ग्राम था। आज का भाव ₹1,37,863 के आसपास है, यानी लगभग ₹55,128 की गिरावट। चांदी का रिकॉर्ड स्तर ₹4,20,048 प्रति किलोग्राम था। मौजूदा दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट ₹1,75,251 पर है। इस हिसाब से चांदी अपने शिखर से करीब ₹2,44,797 प्रति किलो नीचे आ चुकी है।
ये आंकड़े दिखाते हैं कि चांदी में सोने की तुलना में कहीं ज्यादा तेज सुधार आया है। चांदी की कीमतें अक्सर औद्योगिक मांग और सट्टेबाजी दोनों से प्रभावित होती हैं। जब वैश्विक आर्थिक माहौल अनिश्चित हो और ब्याज दरों की दिशा साफ न हो तो चांदी में उतार-चढ़ाव सोने से ज्यादा तेज हो जाता है। आज की गिरावट के बाद दोनों धातुएं अपने हालिया हाई से काफी दूर हैं, लेकिन इनमें अभी भी अस्थिरता बनी हुई है।
आगे भाव और नीचे जा सकते हैं क्या? तकनीकी स्तर क्या कहते हैं?
मार्केट एक्सपर्ट पोनमुडी आर के अनुसार चांदी का चार्ट फिलहाल कमजोर दिख रहा है। सोमवार की तेजी के बावजूद कीमत ₹1,86,000 के ऊपर टिक नहीं पाई। इससे ऊंचे स्तर पर बिकवाली का दबाव साफ नजर आता है।
चांदी के लिए पहला सपोर्ट ₹1,72,000 से ₹1,70,000 प्रति किलो के बीच देखा जा रहा है। अगर यह स्तर टूटता है तो और गिरावट की संभावना बन सकती है। ऊपर की तरफ पहला रेजिस्टेंस ₹1,86,000 से ₹1,88,000 और अगला ₹1,94,000 से ₹1,96,000 के आसपास है। RSI करीब 23 पर है, जो ओवरसोल्ड जोन दर्शाता है। इसका मतलब काफी बिकवाली हो चुकी है। हालांकि ओवरसोल्ड होने से तुरंत रिकवरी का मतलब नहीं निकलता। MACD अभी भी कमजोरी का संकेत दे रहा है।
सोने में भी कमजोरी बनी हुई है। एक्सपर्ट ₹1,34,000 से ₹1,35,000 प्रति 10 ग्राम को अहम सपोर्ट मान रहे हैं। ऊपर की तरफ ₹1,40,000 से ₹1,41,000 पहला रेजिस्टेंस और ₹1,43,000 से ₹1,43,700 अगला स्तर हो सकता है। सोने का RSI करीब 32 पर है और MACD बिकवाली की तरफ इशारा कर रहा है। मजबूत तेजी के संकेत अभी नहीं दिख रहे।
क्या अभी चांदी खरीदने का सही समय है?
बड़ी गिरावट के बाद कई निवेशक सोच रहे हैं कि क्या अब खरीदारी करनी चाहिए। मौजूदा संकेतों को देखते हुए जल्दबाजी में पूरा पैसा लगाने से बचना बेहतर है। RSI ओवरसोल्ड जोन में होने के बावजूद गिरावट खत्म होने की पुष्टि नहीं हुई है।
अगर चांदी ₹1,70,000 से ₹1,72,000 के सपोर्ट जोन पर टिकती है और वहां से रिकवरी के संकेत देती है तो कुछ राहत मिल सकती है। सपोर्ट टूटने पर और दबाव आ सकता है। लंबी अवधि के निवेशक एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय किस्तों में निवेश की रणनीति अपना सकते हैं। शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को बाजार में साफ तेजी का इंतजार करना चाहिए।
सोने में भी यही स्थिति है। सपोर्ट स्तर के पास स्थिरता आने तक इंतजार करना समझदारी भरा कदम माना जा रहा है। भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी आंकड़ों के आने के बाद दिशा और साफ हो सकती है।
अमेरिकी चुनाव और रोजगार आंकड़ों का सोने-चांदी पर क्या असर पड़ सकता है?
निवेशकों की नजर अमेरिका के मिडटर्म चुनावों पर भी है। इन चुनावों से तय होगा कि संसद के दोनों सदनों में किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच मुकाबला बाजार में अनिश्चितता बढ़ा रहा है। राजनीतिक अनिश्चितता अक्सर सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की मांग बढ़ाती है, लेकिन अभी ब्याज दरों का डर ज्यादा भारी पड़ रहा है।
इस हफ्ते आने वाले अमेरिकी रोजगार आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे। अगर रोजगार बाजार मजबूत रहता है और महंगाई का दबाव बना रहता है तो फेडरल रिजर्व दरें ऊंची रख सकता है। ऐसे में सोने-चांदी पर और दबाव आ सकता है। इसके विपरीत अगर आंकड़े कमजोर आते हैं तो दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ सकती है, जिससे इन धातुओं को सहारा मिल सकता है।
कुल मिलाकर मौजूदा माहौल में सावधानी बरतना जरूरी है। कीमतें ओवरसोल्ड जोन में पहुंच चुकी हैं, लेकिन तकनीकी और मौलिक दोनों संकेतक अभी भी कमजोरी दिखा रहे हैं। निवेशकों को सपोर्ट स्तरों पर नजर रखते हुए कदम उठाना चाहिए। लंबी अवधि में सोना और चांदी मुद्रास्फीति के खिलाफ बचाव का काम करते रहे हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म में अस्थिरता जारी रह सकती है।
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