Neha Bora Controversy: नेहा बोरा के मंदिर-पुजारी वाले बयान पर विवाद, सपा और शिवसेना (UBT) ने भी जताई आपत्ति

मंदिर-पुजारियों पर बयान से सियासी विवाद, INDIA गठबंधन में भी असहमति

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Neha Bora Controversy: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा द्वारा मंदिरों और पुजारियों को लेकर दिए गए एक पुराने बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद देश में नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। इस वीडियो क्लिप के वायरल होते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि नेहा बोरा की इस टिप्पणी पर केवल सत्ता पक्ष ने ही नहीं, बल्कि विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन के प्रमुख घटक दलों—समाजवादी पार्टी (SP) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे)—ने भी स्पष्ट असहमति व्यक्त करते हुए इसे अनुचित और अस्वीकार्य करार दिया है।

Neha Bora Controversy: क्या है नेहा बोरा के बयान से जुड़ा पूरा विवाद?

इस विवाद की शुरुआत 3 नवंबर 2026 को उस समय हुई, जब भाजपा नेताओं ने नेहा बोरा का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। इस वीडियो में वह महिला सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था पर अपनी बात रखते हुए कहती सुनी जा रही हैं कि ब्राह्मणवादी व्यवस्था में महिलाओं और वंचितों का दमन होता है। इसी संदर्भ में उन्होंने दावा किया कि ब्राह्मण महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं और मंदिरों के भीतर पुजारियों द्वारा महिलाओं के साथ यौन अपराध किए जाते हैं। उन्होंने अपने तर्क के समर्थन में उन्नाव और कठुआ जैसी घटनाओं का उल्लेख किया।
वीडियो सामने आने के बाद पुजारियों और धार्मिक स्थलों को लेकर किए गए इस व्यापक सामान्यीकरण (Sweeping Generalisation) पर भारी विरोध शुरू हो गया। आलोचकों और कानूनी विशेषज्ञों का तर्क है कि किसी एक आपराधिक मामले के आधार पर पूरी जाति, समुदाय अथवा धार्मिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करना कानून और सामाजिक सौहार्द दोनों ही दृष्टि से अनुचित है।

भाजपा का राहुल गांधी और विपक्षी राजनीति पर सीधा प्रहार

वीडियो सामने आने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया। भंडारी ने आरोप लगाया कि नेहा बोरा की यह सोच हिंदू धर्म के प्रति दुर्भावना से प्रेरित है और वे राहुल गांधी के विचारों का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने पूर्व में मंदिरों को लेकर राहुल गांधी द्वारा दिए गए एक बयान का हवाला देते हुए इसे वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा बताया।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने भी इस बयान की कड़ी भर्त्सना की। उन्होंने नेहा बोरा के पुराने आंदोलनों और पूर्व में बांग्लादेश की राजनीतिक उथल-पुथल को लेकर दिए गए बयानों को रेखांकित करते हुए कहा कि वामपंथी संगठनों की यह भाषा सनातन संस्कृति और धार्मिक संस्थाओं की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से प्रयोग की जा रही है। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस में धार्मिक भावनाओं को आहत करने को लेकर उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग भी उठाई गई है।

सपा सांसद राजीव राय ने बताया अनुचित, कहा- सामान्यीकरण से बचें

इस विवाद में विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ की ओर से समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। उत्तर प्रदेश की घोसी लोकसभा सीट से सांसद राजीव राय ने नेहा बोरा के बयान से पार्टी को पूरी तरह अलग करते हुए कहा कि इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना सामान्यीकरण किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
राजीव राय ने स्पष्ट किया कि हर धर्म, जाति और समाज में अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोग होते हैं, इसलिए किसी एक घटना के आधार पर पूरे समुदाय या धार्मिक व्यवस्था को दोष देना पूरी तरह गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि इस दौर में ऐसी बयानबाजी केवल समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करती है और विपक्ष को ऐसी बयानबाजी से बचना चाहिए ताकि कोई राजनीतिक जाल में न फंसे।

शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने जताई कड़ी नाराजगी

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी नेहा बोरा के इस बयान को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और समाज को बांटने वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील विषय है, लेकिन इसे जाति या धर्म के चश्मे से देखना पूरी तरह गलत दृष्टिकोण है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि कट्टरपंथी सोच चाहे वामपंथ की ओर से आए या दक्षिणपंथ की ओर से, वह देश और समाज के ताने-बाने के लिए घातक ही होती है। उन्होंने स्वयं एक ब्राह्मण महिला होने का उल्लेख करते हुए कहा कि मंदिरों और पुजारियों के लिए इस प्रकार की अपमानजनक भाषा का प्रयोग अस्वीकार्य है। उन्होंने सुझाव दिया कि युवा छात्र नेताओं को अपनी बौद्धिक क्षमता का उपयोग रचनात्मक और सकारात्मक मुद्दों पर करना चाहिए, न कि समाज में कटुता घोलने के लिए।

Neha Bora Controversy: कौन हैं नेहा बोरा और पहले किन मामलों को लेकर रही हैं चर्चा में?

नेहा बोरा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में शोधार्थी हैं। वह छात्र राजनीति और नागरिक आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लेती रही हैं। हाल के दिनों में विपक्षी दलों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शनों, ‘मॉक पार्लियामेंट’ और राहुल गांधी के नेतृत्व में निकाले गए मार्च में भी उनकी उपस्थिति प्रमुखता से दर्ज की गई थी।
वर्तमान में इस वीडियो और बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में गरमा-गरमी तेज है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी गठबंधन के भीतर से ही आई त्वरित और तीखी असहमति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक व सामाजिक संवेदनशीलता से जुड़े ऐसे बयानों पर गठबंधन का कोई भी बड़ा दल साथ खड़े होने के मूड में नहीं है।

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