Health Tips: आयोडीन की कमी से बचना है तो डाइट में शामिल करें ये चीजें, जानें एक्सपर्ट की सलाह

Health Tips: आयोडीन की कमी से बचना है तो डाइट में शामिल करें ये चीजें, जानें एक्सपर्ट की सलाह

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Health Tips: आयोडीन शरीर के लिए एक बेहद जरूरी मिनरल माना जाता है, जिसकी सबसे बड़ी भूमिका थायरॉयड हार्मोन के निर्माण में होती है। यही हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, तापमान, एनर्जी लेवल के साथ-साथ शारीरिक विकास और दिमागी क्षमताओं को भी नियंत्रित करने का काम करते हैं। जब शरीर में आयोडीन की कमी हो जाती है, तो इसका असर सेहत के कई पहलुओं पर पड़ता है। इससे घेंघा रोग, थायरॉयड से जुड़ी परेशानियां, लगातार थकान महसूस होना और वजन बढ़ने जैसी दिक्कतें सामने आ सकती हैं। इतना ही नहीं, छोटे बच्चों में आयोडीन की कमी शारीरिक और मानसिक विकास में रुकावट भी पैदा कर सकती है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि रोजमर्रा की डाइट में किन चीजों को शामिल करके आयोडीन की इस कमी को पूरा किया जा सकता है।

Health Tips: आयोडीन युक्त नमक बन सकता है आसान विकल्प

आयोडीन की कमी दूर करने के सबसे सरल और आसानी से उपलब्ध विकल्पों में आयोडीन युक्त नमक शामिल है। रोजाना के खाने में सामान्य नमक की जगह आयोडीन वाला नमक इस्तेमाल करने से शरीर की दैनिक जरूरत को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। हालांकि इसके साथ ही यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि नमक का सेवन सीमित मात्रा में ही होना चाहिए, क्योंकि ज्यादा नमक खाने से हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा आयोडीन युक्त नमक को हमेशा बंद डिब्बे में और नमी व गर्म चीजों से दूर रखना चाहिए, ताकि उसमें मौजूद आयोडीन की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहे।

डेयरी उत्पाद और अंडे से भी मिलती है आयोडीन

नमक के अलावा डेयरी प्रोडक्ट्स भी आयोडीन का एक अच्छा स्रोत माने जाते हैं। दूध, दही और योगर्ट जैसे उत्पादों से शरीर को आयोडीन मिल सकता है, हालांकि इनमें मौजूद आयोडीन की मात्रा अलग-अलग हो सकती है। इसके साथ ही अंडे, खासतौर पर अंडे की जर्दी में भी आयोडीन अच्छी मात्रा में पाया जाता है। रोजमर्रा की डाइट में इन चीजों को शामिल करना आयोडीन की कमी को दूर करने का एक स्वाभाविक और आसान तरीका माना जाता है।

मछली और सीफूड भी हैं आयोडीन के भरोसेमंद स्रोत

समुद्री खाद्य पदार्थ यानी सीफूड और मछली को भी आयोडीन के अच्छे स्रोतों में गिना जाता है। हालांकि इससे मिलने वाली आयोडीन की मात्रा मछली के प्रकार और खाई गई मात्रा पर निर्भर करती है। जो लोग नियमित रूप से मछली या समुद्री भोजन का सेवन करते हैं, उनके शरीर में आयोडीन की कमी होने की आशंका अपेक्षाकृत कम रहती है। इसके अलावा कुछ पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थ जैसे बीन्स, अनाज और सब्जियां भी अलग-अलग मात्रा में आयोडीन प्रदान करते हैं, जिससे शाकाहारी लोगों के लिए भी विकल्प मौजूद रहते हैं।

कुछ सब्जियों से जुड़ी सावधानी भी है जरूरी

आयोडीन से जुड़ी डाइट की बात करते समय कुछ सब्जियों को लेकर सतर्कता बरतना भी जरूरी बताया गया है। पत्तागोभी, फूलगोभी और ब्रोकली जैसी सब्जियों में गोइट्रोजन नाम के तत्व मौजूद होते हैं, जो अधिक मात्रा में सेवन करने पर शरीर में आयोडीन के सही इस्तेमाल में रुकावट डाल सकते हैं। खासतौर पर जिन लोगों को पहले से आयोडीन की कमी या थायरॉयड से जुड़ी बीमारी है, उन्हें इन सब्जियों को कच्चा या सलाद के रूप में ज्यादा मात्रा में खाने से बचना चाहिए। ऐसे लोगों को अपनी डाइट को लेकर डॉक्टर से सलाह लेना ज्यादा उचित रहता है, ताकि किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके।

सीवीड में होती है सबसे ज्यादा आयोडीन की मात्रा

आयोडीन के स्रोतों में सीवीड को सबसे समृद्ध माना जाता है, क्योंकि इसमें आयोडीन की मात्रा काफी अधिक पाई जाती है। हालांकि इसे लेकर भी सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि बहुत ज्यादा सीवीड खाने या बिना डॉक्टरी सलाह के आयोडीन सप्लीमेंट लेने से शरीर में जरूरत से ज्यादा आयोडीन जमा हो सकता है, जिसका सीधा असर थायरॉयड के कामकाज पर पड़ सकता है। यही वजह है कि किसी भी सप्लीमेंट को लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी माना जाता है।

वीगन और कम सीफूड खाने वालों को रखनी होगी खास सतर्कता

जो लोग वीगन डाइट फॉलो करते हैं, डेयरी उत्पादों का सेवन नहीं करते या बहुत कम मात्रा में सीफूड खाते हैं, उन्हें अपनी डाइट में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा को लेकर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। ऐसे लोगों के लिए आयोडीन के वैकल्पिक स्रोतों की पहचान करना और उन्हें नियमित रूप से डाइट में शामिल करना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि शरीर में इस जरूरी मिनरल की कमी न हो पाए।

Health Tips: गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान बढ़ जाती है आयोडीन की जरूरत

महिलाओं के लिए गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान शरीर को आयोडीन की सामान्य से ज्यादा जरूरत होती है, क्योंकि इस दौरान मां के साथ-साथ बच्चे के विकास के लिए भी यह मिनरल अहम भूमिका निभाता है। ऐसे समय में डाइट में आयोडीन युक्त चीजों को संतुलित मात्रा में शामिल करना बेहद जरूरी हो जाता है। वहीं जिन लोगों को पहले से थायरॉयड की बीमारी है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना आयोडीन सप्लीमेंट बिल्कुल नहीं लेना चाहिए, क्योंकि आयोडीन की कमी और इसकी अधिकता, दोनों ही स्थितियां थायरॉयड की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं।

शरीर के सामान्य कामकाज और थायरॉयड हार्मोन के सही उत्पादन के लिए आयोडीन एक अनिवार्य मिनरल है, जिसकी कमी या अधिकता दोनों ही सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। आयोडीन युक्त नमक, डेयरी उत्पाद, अंडे, मछली और सीवीड जैसे खाद्य पदार्थों को संतुलित मात्रा में डाइट में शामिल करके इस कमी को दूर किया जा सकता है। हालांकि कुछ सब्जियों और सप्लीमेंट्स के इस्तेमाल में सावधानी बरतना भी उतना ही जरूरी है। खासतौर पर थायरॉयड की बीमारी, गर्भावस्था या वीगन डाइट जैसी स्थितियों में डॉक्टर की सलाह लेकर ही अपनी डाइट में बदलाव करना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

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